प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सप्ताह प्रस्तावित ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच लंबे समय से लंबित यूरेनियम आपूर्ति समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यह समझौता भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि इस पर हस्ताक्षर होते हैं, तो इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत अपनी बढ़ती बिजली मांग, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परमाणु ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करना चाहता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना है ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की जा सके। इसी उद्देश्य से विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों के साथ दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2014 में असैन्य परमाणु सहयोग समझौता (Civil Nuclear Cooperation Agreement) हुआ था, जिसने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम व्यापार का रास्ता खोला था। हालांकि व्यावसायिक स्तर पर यूरेनियम आपूर्ति को लेकर समझौता अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका था। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच इस विषय पर बातचीत तेज हुई है और अब इसे प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान पूरा किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार संपर्क में हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यदि सभी तकनीकी और वाणिज्यिक प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं तो दौरे के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
भारत में डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक विस्तार के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से इस मांग को पूरी तरह पूरा करना आसान नहीं होगा। ऐसे में परमाणु ऊर्जा को स्थिर, स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। यूरेनियम की स्थायी आपूर्ति भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाली है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने पर भी कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में दोनों देश 2009 की संयुक्त रक्षा एवं सुरक्षा घोषणा को उन्नत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप, रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा संवाद लगातार बढ़े हैं, जिससे रणनीतिक विश्वास मजबूत हुआ है।
आर्थिक दृष्टि से भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देश निवेश, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, खनन और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापारिक समुदायों के बीच भी कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन प्रस्तावित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति समझौता भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे भारत को दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा मिलेगी और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार में तेजी आएगी। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया के लिए भी भारत एक बड़ा और विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार के रूप में उभर सकता है। हालांकि समझौते की अंतिम शर्तों और आपूर्ति की मात्रा की जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल दोनों देशों के बीच वार्ता अंतिम चरण में बताई जा रही है। यदि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा। सरकार की ओर से अभी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है और आधिकारिक पुष्टि यात्रा के दौरान या उसके बाद की जा सकती है। मामले से जुड़े सभी औपचारिक विवरण सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।
