उत्तर प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर राज्य में अवैध धर्मांतरण और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने इन विधेयकों को कानून-व्यवस्था और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए सदन में पेश किया। इन संशोधनों के तहत गंभीर मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा का प्रावधान किया गया है। (PTI/Indian Express)
पहला विधेयक उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध कानून में संशोधन से संबंधित है। सरकार का कहना है कि धोखे, दबाव, प्रलोभन, विवाह या अन्य अवैध तरीकों से धर्म परिवर्तन कराने के मामलों को रोकने के लिए कानून को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। संशोधित प्रावधानों में संगठित तरीके से किए गए अवैध धर्मांतरण, नाबालिगों, महिलाओं तथा विशेष श्रेणी के व्यक्तियों से जुड़े मामलों में अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी। (PTI/Indian Express)
सरकार और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस कानून को महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है। वहीं विपक्षी दलों ने विधेयक पर चर्चा के दौरान आशंका जताई कि इसका दुरुपयोग हो सकता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून केवल अवैध और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर लागू होगा तथा प्रत्येक मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। (The Hindu)
दूसरा विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया पर कार्रवाई को लेकर है। उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून में संशोधन के तहत संगठित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून को और मजबूत बनाया गया है। (PTI/Indian Express)
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हुई। राज्य सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से ऐसे अपराधों में शामिल संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। (The Hindu)
विधानसभा में विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इन्हें जनहित और सुशासन से जुड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि अवैध धर्मांतरण और पेपर लीक दोनों ही गंभीर अपराध हैं, जिनका सीधा असर समाज और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। दूसरी ओर विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बताई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कठोर कानून की प्रभावशीलता उसके निष्पक्ष और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों को प्रत्येक मामले में पर्याप्त साक्ष्य जुटाने होंगे और न्यायालय में आरोप सिद्ध होने के बाद ही दोषियों को सजा दी जा सकेगी। केवल आरोप लगने मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून का उद्देश्य निर्दोष लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि संगठित अपराधों पर रोक लगाना है। धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में प्रत्येक शिकायत की जांच नियमानुसार की जाएगी, जबकि पेपर लीक के मामलों में डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा से दोनों विधेयकों को मंजूरी मिल चुकी है। आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें अधिसूचित कर लागू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन कानूनों से राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। कानून के तहत किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।