दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए व्यंग्यात्मक डिजिटल मंच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party-CJP) के X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह आदेश उस समय दिया जब केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अब उसे अकाउंट को अनब्लॉक किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में शामिल माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने की। याचिका कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा मई 2026 में उनके X अकाउंट को भारत में ब्लॉक किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अब सरकार को अकाउंट बहाल करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्णय उस समय राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़ी परिस्थितियों और संभावित अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए लिया गया था। सरकार का कहना था कि परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम या अशांति की संभावना को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था। हालांकि अब परीक्षा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए पहले व्यक्त की गई चिंता प्रासंगिक नहीं रह गई है।
अदालत ने केंद्र सरकार के इस रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि जब सरकार स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि पहले की परिस्थितियां अब मौजूद नहीं हैं, तो अकाउंट को ब्लॉक रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके बाद अदालत ने X प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट बहाल करने का निर्देश जारी कर दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान के रूप में चर्चा में आई थी। यह मंच शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों, विशेषकर NEET परीक्षा से संबंधित विवादों के दौरान सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ था। इसके बाद मई 2026 में भारत में इसके X अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि अकाउंट को ब्लॉक करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और यह कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप नहीं थी। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर व्यंग्य और आलोचना लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हैं तथा केवल आशंका के आधार पर किसी अकाउंट को बंद करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस चरण में विस्तृत संवैधानिक प्रश्नों पर टिप्पणी किए बिना सरकार के बदले हुए रुख के आधार पर अकाउंट बहाल करने का आदेश पारित किया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामग्री को ब्लॉक करने से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि अदालत ने इस मामले में अंतिम संवैधानिक सिद्धांतों पर कोई व्यापक फैसला नहीं दिया है, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रतिबंध का आधार समाप्त हो जाए तो संबंधित कार्रवाई की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।
इस मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी हस्तक्षेप, डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के साथ ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट बहाल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट कर दिया है कि उसे अब अकाउंट अनब्लॉक किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। मामले में आगे यदि कोई नया कानूनी घटनाक्रम होता है तो उससे संबंधित जानकारी बाद में सामने आ सकती है।