“इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ीं। गादी आइसेनकोट को 120 सदस्यीय संसद में 67 सांसदों का समर्थन मिला है। यूटीजे ने नेतन्याहू का समर्थन नहीं किया। जानिए नई सरकार बनने की पूरी राजनीतिक तस्वीर।“
यरुशलम। इजरायल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराता जा रहा है। पूर्व सेना प्रमुख और मध्यमार्गी गठबंधन के नेता गादी आइसेनकोट प्रधानमंत्री पद की दौड़ में मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। उन्हें 120 सदस्यीय इजरायली संसद (नीसेट) के 67 सांसदों का समर्थन मिल गया है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थन में 46 सांसद सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने इजरायल में संभावित सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं को तेज कर दिया है।
गुरुवार, 5 नवंबर को अरब दलों के गठबंधन ज्वाइंट लिस्ट ने राष्ट्रपति आइजक हरजोग के सामने आइसेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की घोषणा की। इससे पहले आठ सांसदों वाली अरब पार्टी राएम भी उनके समर्थन का एलान कर चुकी थी। दोनों अरब दलों के समर्थन से आइसेनकोट के पक्ष में सांसदों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है।
19 अरब सांसदों के समर्थन से मजबूत हुआ आइसेनकोट का दावा
इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। किसी उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने और संसद में विश्वास मत हासिल करने की आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री पद के लिए राष्ट्रपति के सामने हुई राजनीतिक परामर्श प्रक्रिया में 67 सांसदों ने आइसेनकोट का समर्थन किया है।
इसमें 11 सांसदों वाली ज्वाइंट लिस्ट और आठ सांसदों वाली राएम पार्टी का समर्थन महत्वपूर्ण है। ज्वाइंट लिस्ट में हदाश, ताल और बलद जैसे तीन अरब राजनीतिक गुट शामिल हैं। इन दलों का समर्थन नेतन्याहू विरोधी खेमे के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
हालांकि, अरब दलों का समर्थन मिलने के बावजूद नई सरकार का गठन आसान नहीं होगा। आइसेनकोट के सहयोगी दलों के बीच अरब पार्टियों के साथ सत्ता में भागीदारी को लेकर मतभेद हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये दल सरकार में शामिल होते हैं या बाहर से समर्थन देते हैं।
यूटीजे के फैसले से नेतन्याहू को बड़ा झटका
बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं, जब सात सांसदों वाली यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) ने उनके पक्ष में राष्ट्रपति के सामने समर्थन देने से इनकार कर दिया। पार्टी ने फिलहाल संसद में अलग बैठने का फैसला किया है।
27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली थीं। लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल नहीं हो सका। यूटीजे के समर्थन से पीछे हटने के बाद राष्ट्रपति के सामने नेतन्याहू के समर्थन की संख्या घटकर 46 रह गई।
इस घटनाक्रम ने नेतन्याहू के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, उनकी पार्टी लिकुड 27 सीटों के साथ चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा सकी।
19 साल तक इजरायल की राजनीति में प्रभावशाली रहे नेतन्याहू
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने अलग-अलग कार्यकालों में करीब 19 वर्ष तक देश की सत्ता संभाली है।
लेकिन इस बार के चुनाव में उनके गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। चुनाव के बाद छोटे दलों के समर्थन को लेकर हुई राजनीतिक खींचतान ने उनकी स्थिति कमजोर कर दी है।
दूसरी ओर, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट ने अलग-अलग राजनीतिक दलों को एक साथ लाकर प्रधानमंत्री पद के लिए अपना दावा मजबूत किया है।
आइसेनकोट की सरकार की शर्तें क्या होंगी?
नई सरकार बनाने की कोशिशों के बीच आइसेनकोट ने देश की सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सैन्य भर्ती जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है।
उनके प्रस्तावित एजेंडे में इजरायल की यहूदी राष्ट्रीय पहचान को बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत शासन चलाना शामिल है। इसके साथ ही हमास की सैन्य क्षमता समाप्त करने और सेना में भर्ती से जुड़े नियमों में बदलाव करने की बात भी सामने आई है।
सैन्य भर्ती का मुद्दा इजरायल की राजनीति में काफी संवेदनशील है। खासतौर पर अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय को मिलने वाली सैन्य सेवा की छूट को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। यही मुद्दा यूटीजे जैसे दलों के राजनीतिक रुख को भी प्रभावित करता है।
राष्ट्रपति हरजोग के फैसले पर टिकी निगाहें
अब इजरायल की राजनीति में अगला महत्वपूर्ण कदम राष्ट्रपति आइजक हरजोग का होगा। राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि वह रविवार को सरकार बनाने का जिम्मा सौंपने के संबंध में फैसला करेंगे।
इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति संबंधित संसदीय दलों से परामर्श के बाद उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास सरकार बनाने की बेहतर संभावना होती है। उम्मीदवार को सरकार गठन के लिए 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर यह अवधि 14 दिन और बढ़ाई जा सकती है।
इसलिए 67 सांसदों का समर्थन आइसेनकोट को मजबूत स्थिति में जरूर पहुंचाता है, लेकिन सरकार गठन की अंतिम सफलता गठबंधन की बातचीत और संसद में विश्वास मत पर निर्भर करेगी।
क्या इजरायल में खत्म होगा नेतन्याहू का दौर?
इजरायल के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम ने नेतन्याहू की वापसी की संभावनाओं को कमजोर किया है। एक ओर उनके पुराने सहयोगी यूटीजे ने समर्थन देने से दूरी बना ली है, वहीं दूसरी ओर अरब दलों के समर्थन से आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन हासिल हुआ है।
हालांकि, आइसेनकोट के सामने भी कई चुनौतियां हैं। उन्हें अपने मध्यमार्गी सहयोगियों के साथ अरब दलों के समर्थन को लेकर सहमति बनानी होगी। इसके अलावा सैन्य भर्ती और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी गठबंधन के भीतर संतुलन कायम करना होगा।
फिलहाल इजरायल की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गादी आइसेनकोट नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक दौर को समाप्त कर नई सरकार बना पाएंगे या गठबंधन की अंदरूनी असहमति एक बार फिर देश को राजनीतिक गतिरोध की ओर ले जाएगी।
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