- एनडीए से गठबंधन नहीं हुआ तो सभी सीटों पर लड़ने का ऐलान
- परंतु भाजपा के सामने ठीक से खड़े भी हो पाएंगे, इसमें ही है संदेह
अभयानंद शुक्ल
लखनऊ। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने वृहस्पतिवार को वाराणसी को नव संकल्प महासभा का आयोजन किया। इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने घोषणा की कि अगर एनडीए के साथ उनका गठबंधन हुआ तो ठीक है, अन्यथा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज करते हुए कहा कि ये लोग लोकसभा में बहस होने ही नहीं देते हैं। वे जनता के अधिकारों और उनके हितों की बात नहीं करते हैं। चिराग ने कहा कि हम युवा आयोग बनाएंगे, ताकि युवा शक्ति का भला हो सके। और हमारी पार्टी के विधायक जाति धर्म के ऊपर उठकर काम करेंगे। हम जाति आधारित नहीं बल्कि विकास आधारित राजनीति करेंगे।
उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में चिराग पासवान की एंट्री बहुत ही महत्वपूर्ण है। वैसे देखने में तो यही लग रहा है कि चिराग पासवान भाजपा के सामने खड़े होकर ताल ठोक रहे हैं। पर अंदर खाने ऐसी बात नहीं है। दरअसल एनडीए और भाजपा मायावती के कमजोर होने से आए गैप को भरने की कोशिश में है, और उसे अपने लोगों द्वारा भरना चाहती है। बसपा सुप्रीमो मायावती के कमजोर होने के बाद लगा था कि चंद्रशेखर आजाद वह गैप भर देंगे, लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं हुए। इसलिए अब चिराग पासवान के बहाने एक और कोशिश हो रही है। वैसे भी चिराग पासवान चाहें जितनी भी ताल ठोंक लें, लेकिन सच्चाई यही है कि वे एनडीए से अलग होकर न तो कुछ कर पाएंगे और न ही करना चाहेंगे। उन्हें भी मालूम है कि अगर भाजपा के साथ वे यूपी में लड़ेंगे और बीजेपी के सामने खड़े हो जाएंगे तो केंद्र में उनकी कुर्सी जा सकती है। चूंकि उनके पास सिर्फ पांच सांसद हैं, इसलिए 5 सांसदों के लिए भाजपा उनकी धौंस को बर्दाश्त करने वाली नहीं है। तो ये कुल मिलाकर नूरा कुश्ती जैसा ही लगता। उम्मीद यही है कि विधानसभा चुनाव आते-आते या तो वे यूपी एनडीए में शामिल होकर कुछ सीटें पाकर संतुष्ट हो जाएंगे या फिर चुनाव न लड़ने का ही मन बना लेंगे।
वैसे भी उत्तर प्रदेश में इनका कोई जनाधार नहीं है। थोड़ा बहुत बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे वाराणसी, बलिया, गाजीपुर और मऊ जैसे जिलों में थोड़ा-बहुत इनका आधार हो सकता है। क्योंकि वे बिहार से सटे इलाके हैं। इसके अलावा सियासी तौर पर उनकी कोई जमीन उत्तर प्रदेश में अभी तक नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में उनको चलना तो भाजपा के साथ मिलकर ही होगा। ऐसा कहने का आधार यही है कि पिछले दिनों भी चिराग ने लखनऊ में अपने पिता स्वर्गीय राम विलास पासवान की पुण्यतिथि मनाई थी। उस मंच पर विशेष रूप से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी बुलाया था। उस मंच से योगी आदित्यनाथ ने भी स्वर्गीय रामविलास पासवान की शान में कसीदे पढ़े थे। इससे भी लगता है कि चिराग जो भी काम करेंगे, भाजपा के साथ मिलकर ही करेंगे। रहा सवाल चुनावी ताल ठोंकने का, तो ऐसा सारी पार्टियां शुरुआत में करती हैं, ताकि अधिक से अधिक सीटों के लिए बारगेनिंग की जा सके, और उनके कार्यकर्ता एनर्जाइज रह सकें।