बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक कैब ड्राइवर पर अपनी पत्नी समेत उसके परिवार के छह अन्य सदस्यों की हत्या करने का आरोप है। मृतकों में सात साल का एक बच्चा भी शामिल है। आरोपी की पहचान इंदुशेखर उर्फ शेखर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सात लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने नंदी हिल्स की तलहटी से सात वर्षीय पुनीत का शव बरामद कर लिया है, जबकि बाकी छह लोगों के शवों की तलाश जारी है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद की आशंका है। बताया जा रहा है कि आरोपी अपनी पत्नी सुनीता के मायके जाने और वहां के लोगों से लगातार संपर्क रखने से नाराज रहता था। करीब 20 साल पहले हुई शादी के बाद से ही दोनों के बीच इस मुद्दे पर अक्सर विवाद होता था। परिवार के सदस्यों ने कई बार दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन मतभेद बने रहे। पुलिस आरोपी के इस कथित मकसद की जांच कर रही है।
59वें क्रॉस के रिहायशी इलाके में वारदात का आरोप
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कथित हत्याएं राजाजीनगर थाना क्षेत्र में बाश्यम सर्कल के पास 59वें क्रॉस स्थित एक रिहायशी इलाके में हुईं। आरोपी इसी इलाके में किराये के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि उसने पहले अपनी पत्नी सुनीता को निशाना बनाया। इसके बाद पत्नी के मायके के अन्य सदस्यों को अलग-अलग बहाने से अपने घर बुलाया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ने अपने दो सालों शिवकुमार और शंकर को पार्टी देने के बहाने घर बुलाया था। आरोप है कि उसने दोनों की हत्या कर दी। इसके बाद उनकी पत्नियों दिव्या और नलिनी, अपनी सास रूपवती और सात वर्षीय बच्चे पुनीत की भी हत्या कर दी। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने कथित तौर पर वारदातों को अंजाम देने के बाद शवों को अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाया।
मृतकों में पत्नी, सास और ससुराल के पांच अन्य सदस्य
पुलिस ने जिन सात लोगों को इस मामले में मृत बताया है, उनकी पहचान आरोपी की पत्नी सुनीता, सास रूपवती, सालों शिवकुमार और शंकर, उनकी पत्नियों दिव्या और नलिनी तथा सात वर्षीय पुनीत के रूप में की है। पुनीत, पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शिवकुमार का बेटा था।
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही परिवार के इतने सदस्यों के लापता होने की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली। आरोपी पर आरोप है कि उसने कथित वारदातों के बाद परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन बंद कर दिए और पड़ोसियों को बताया कि उसकी पत्नी कहीं घूमने गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या परिवार के अन्य लोगों को भी इसी तरह गुमराह किया गया था।
सिलबट्टे से हत्या और शवों को ठिकाने लगाने का आरोप
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर हत्याओं में सिलबट्टे का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आया है कि उसने सबसे पहले पत्नी सुनीता की हत्या की और उसके शव को कपड़े में लपेटकर नंदी हिल्स के आसपास फेंक दिया। इसके बाद उसने सुनीता का मोबाइल फोन बंद कर दिया और पड़ोसियों को उसके बाहर जाने की बात बताई।
इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर अपने दोनों सालों को पार्टी के बहाने घर बुलाया। पुलिस को आशंका है कि उसने इसी तरीके से परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपने घर बुलाया और उनकी हत्या कर दी। हालांकि, वारदातों का पूरा क्रम और प्रत्येक व्यक्ति की मौत का समय अभी जांच का विषय है। पुलिस आरोपी के बयानों को घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारियों से मिलान कर रही है।
घर में खून के निशान मिटाने के लिए केमिकल इस्तेमाल करने का दावा
जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर हत्याओं के बाद घर की सफाई की और खून के धब्बे मिटाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घर में क्या-क्या हुआ था।
पुलिस ने कथित हत्याओं में इस्तेमाल किए गए सिलबट्टे और शवों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में इस्तेमाल की गई कार को जब्त किया है। इन वस्तुओं की जांच से घटनाक्रम की पुष्टि करने और आरोपी के बयान को साक्ष्यों से जोड़ने में मदद मिल सकती है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि शवों को किन-किन रास्तों से ले जाया गया और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर किस तरह ठिकाने लगाया गया।
गुमशुदगी की शिकायत से खुला मामला
इस कथित सामूहिक हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब नलिनी की मां ने गुरुवार को बेंगलुरु के श्रीरामपुरा थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाने और उनके बारे में कोई जानकारी न मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस का संदेह इंदुशेखर पर गया। पूछताछ में उसके बयानों और सामने आए तथ्यों में विरोधाभास मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से पड़ताल की। इसके बाद आरोपी की कथित संलिप्तता सामने आई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि परिवार के अन्य सदस्यों की गुमशुदगी की जानकारी किस समय और किस तरह सामने आई थी।
नंदी हिल्स की तलहटी से मिला सात वर्षीय पुनीत का शव
आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस उसे लेकर नंदी हिल्स की तलहटी पहुंची। यहां करीब चार घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। इसी दौरान सात वर्षीय पुनीत का शव बरामद हुआ। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने बाकी शव भी अलग-अलग स्थानों पर फेंके हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने शवों को ठिकाने लगाने के लिए जिन स्थानों की जानकारी दी है, वहां तलाशी कराई जा रही है। नंदी हिल्स के आसपास कुछ इलाके दुर्गम और जंगलों से घिरे हैं, जिससे तलाशी अभियान में कठिनाई आ रही है। पुलिस अन्य जिलों के अधिकारियों के साथ भी समन्वय कर रही है, क्योंकि आरोपी के बताए संभावित स्थान अलग-अलग क्षेत्रों में हो सकते हैं। फिलहाल छह शव बरामद नहीं हुए हैं।
दो दिन या 15 से 20 दिन में वारदातें? समय-सीमा की पुष्टि जारी
इस मामले में हत्याओं की समय-सीमा को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। कुछ शुरुआती पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने दो दिनों के भीतर परिवार के सात सदस्यों की हत्या की। वहीं, बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने 6 नवंबर को बताया कि आरोपी ने पूछताछ में 15 से 20 दिनों के भीतर सात लोगों की हत्या करने का दावा किया है। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया कि आरोपी की बताई समय-सीमा की पुष्टि अभी की जानी बाकी है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी हत्याएं निश्चित रूप से दो दिनों में हुईं या 15 से 20 दिनों के अंतराल में। पुलिस गुमशुदगी की तारीखों, मोबाइल फोन की गतिविधियों, वाहन से जुड़े साक्ष्यों और आरोपी के बयानों के आधार पर घटनाओं का वास्तविक क्रम तय करने में जुटी है।
आरोपी की बेटी की भूमिका की भी जांच
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित हत्याओं और शवों को ठिकाने लगाने में आरोपी को किसी अन्य व्यक्ति ने मदद तो नहीं की। जांच में आरोपी की नाबालिग बेटी की संभावित भूमिका का पहलू भी सामने आया है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, आरोपी ने दावा किया है कि उसकी बेटी ने शवों को ठिकाने लगाने में मदद की थी। हालांकि, पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर और अन्य अधिकारियों की ओर से भी मामले की जांच से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के हवाले से कहा गया है कि आरोपी ने अपनी बेटी को प्रभावित कर कथित अपराध में शामिल किया हो सकता है। लेकिन नाबालिग की वास्तविक भूमिका, उसे घटना की कितनी जानकारी थी और उसने कोई सहायता की या नहीं, इन सभी सवालों पर जांच जारी है। किसी नाबालिग के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
हत्या की वजह पर भी उठ रहे सवाल
शुरुआती जांच में पारिवारिक विवाद को संभावित वजह बताया जा रहा है। आरोपी ने कथित तौर पर पूछताछ में दावा किया कि पत्नी और उसके मायके के लोग उसे लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। उसका आरोप था कि घरेलू विवादों के दौरान पत्नी के मायके वाले हमेशा उसका साथ देते थे।
हालांकि, मृतकों के परिजनों ने आरोपी के कथित दावों पर सवाल उठाए हैं। परिवार की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि यदि विवाद केवल पति-पत्नी के बीच था तो परिवार के अन्य सदस्यों और एक बच्चे को क्यों निशाना बनाया गया। कुछ परिजनों ने संपत्ति विवाद की आशंका भी जताई है। पुलिस इन सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है और अभी किसी एक वजह को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
रिहायशी इलाके में वारदातों की जानकारी क्यों नहीं मिली?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि कथित वारदातें रिहायशी इलाके में हुईं, इसके बावजूद आसपास के लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। पुलिस पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति को लेकर क्या-क्या बातें बताईं और क्या किसी ने संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं।
पुलिस मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, संदेशों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि परिवार के सदस्यों से संपर्क कब टूटा और कथित हत्याओं के बाद उनके फोन का इस्तेमाल किसने किया। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या किसी को परिवार के सदस्यों के लापता होने की जानकारी पहले से थी।
पुलिस की विशेष टीमें जांच में जुटीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीमें गठित की हैं। वरिष्ठ अधिकारी जांच की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता बाकी छह शवों को बरामद करना, घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना और आरोपी के बयानों की पुष्टि करना है।
बेंगलुरु पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की गिरफ्तारी और एक शव की बरामदगी के बावजूद मामले के कई पहलू अभी स्पष्ट होने बाकी हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित हत्याओं में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं और शवों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी।
फिलहाल इस मामले में सात लोगों की हत्या का आरोप आरोपी पर है, लेकिन बाकी छह शवों की बरामदगी और फोरेंसिक साक्ष्यों से जांच को आगे बढ़ाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।