“मणिपुर में हिंसा के विरोध में सैकड़ों लोगों ने उखरुल और कामजोंग में महारैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने शांति बहाली, कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ एसओओ समझौता रद करने और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाने की मांग की।“
इंफाल। मणिपुर में जारी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच शांति बहाली की मांग तेज हो गई है। राज्य के उखरुल जिले में गुरुवार को सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर महारैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य को अब गोलीबारी और हिंसा नहीं, बल्कि शांति की जरूरत है। रैली में महिलाओं समेत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान राज्य में हिंसा समाप्त करने, उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते को रद करने और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग उठाई गई।
उखरुल जिला मुख्यालय में आयोजित इस जन रैली में प्रदर्शनकारियों ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। रैली के दौरान कुकी उग्रवादी संगठनों के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य में लंबे समय से जारी तनाव और हिंसा का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है। इसके लिए सरकार को मौजूदा नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।
एसओओ समझौता रद करने की उठी मांग
रैली में सबसे प्रमुख मांग कुकी-जोमी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते को समाप्त करने की रही। दरअसल, एसओओ केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जोमी के कई उग्रवादी संगठनों के बीच हुआ त्रिपक्षीय समझौता है।
प्रदर्शनकारियों ने इस समझौते को राज्य में जारी तनाव से जोड़ते हुए इसे रद करने की मांग की। उनका कहना था कि राज्य में शांति और सुरक्षा का माहौल कायम करने के लिए उग्रवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। रैली में शामिल लोगों ने सरकार से हिंसा पर नियंत्रण के लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि राज्य में राजनीतिक संकट और मौजूदा हालात का समाधान निकालने के लिए राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने राज्य के राजनीतिक संकट का समाधान करने और नगा बहुल क्षेत्रों से असम राइफल्स को हटाने की मांग की। रैली में राज्य में कथित छद्म युद्ध को रोकने की आवाज भी उठाई गई। लोगों ने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
तांगखुल नगा संगठनों ने किया रैली का आयोजन
इस जन रैली का आयोजन तांगखुल नगा लोंग (टीएनएल) ने तांगखुल समुदाय के विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर किया था। रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने राज्य में शांति और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को सामने रखा।
उखरुल के अलावा कामजोंग जिले में भी इसी तरह की रैली निकाली गई। दोनों जिलों में प्रदर्शनकारियों ने हिंसा समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की मांग की। रैली के दौरान लोगों ने एकजुट होकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मौजूदा संकट का राजनीतिक समाधान निकालने की अपील की।
मणिपुर में शांति बहाली को लेकर बढ़ा दबाव
मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अलग-अलग संगठनों की ओर से शांति बहाली की मांग उठती रही है। उखरुल और कामजोंग में निकाली गई इन रैलियों ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक समाधान को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय हिंसा रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाली के लिए ठोस कदम उठाए। अब देखना होगा कि इन मांगों पर राज्य और केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती हैं।
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