- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने सपा सुप्रीमो को कृष्ण भक्त बना दिया
- अखिलेश यादव अब सब कुछ भूलकर कृष्ण भक्त बनने की ओर अग्रसर
- यानी भाजपा के ट्रैप में पूरी तरह फंसते जा रहे हैं सपा प्रमुख अखिलेश
अभयानंद शुक्ल
लखनऊ। अभी तक सिलेक्टिव सनातनी एप्रोच रखने वाले अखिलेश यादव अब खुलकर अपने को कृष्ण भक्त कहने लगे हैं। अब उनकी पार्टी और उनकी पूरी यादव सेना अपने को सबसे बड़ा कृष्ण भक्त साबित करने में लगी हुई। इसीलिए शायद बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ पूरी पार्टी अभियान छेड़े हुए हैं। पार्टी उन्हें सनातन से बहिष्कृत करने के साथ उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज करने की मांग कर रही है। यानी इस बार योगेश्वर कृष्ण ही करेंगे अखिलेश यादव का बेड़ा पार।
समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए गए एक पोस्टर में अखिलेश यादव को दिखाया गया है। उसमें लिखा गया है 27 में आएंगे तो कृष्ण ही। खास बात यह है कि ये पोस्टर किसी मुस्लिम नेता ने लगाया है। यानी समाजवादी पार्टी ने अब कृष्ण के मुद्दे को पूरी तरह पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ-साथ भाजपा को भी घेरने का अभियान शुरू हो गया है। भाजपा चाहती भी यही थी कि किसी तरह ये लड़ाई हिंदू बनाम गैर हिंदू हो जाए, और चुनावी मुकाबला धर्म का हो जाए। इससे भाजपा को ही फायदा होगा। अखिलेश जितना कृष्ण-कृष्ण बोलेंगे, उतना ही मुसलमान उनसे पीछे जाएंगे। और इससे ओवैसी को मौका मिलेगा, और उनके अब्दुल वाले नैरेटिव को भी मजबूती मिलेगी। और भाजपा तो पहले से ही सनातन का ठेका लेकर बैठी है। फिर जैसे ही लड़ाई त्रिकोणीय होगी, तो भाजपा को फायदा होगा। यानी भाजपा के ट्रैप में अखिलेश यादव फंसते जा रहे हैं। इसके अलावा यूपी में एक और पोस्टर ट्रेंड कर रहा है, जो भाजपा की ओर से लगाया गया है। उसमें योगी आदित्यनाथ हैं। उसमें स्लोगन लिखा है कि जो राम को लाए है, वही 27 में कृष्ण को भी लाएंगे। यानी भाजपा भी इस इस मुद्दे को उछालने के मूड में है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी ने एक टीवी डिबेट में यहां तक कह दिया है कि मथुरा में कृष्ण मंदिर बनना चाहिए, इससे किसी को ऐतराज नहीं है। पर उन्होंने कहा कि चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए जैसे ही फैसला हो जाए तो मथुरा में कृष्ण मंदिर बनने से किसी को एतराज नहीं है। और पिछले कई सालों से यह सपा के स्टैंड में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यानी वोट के लिए समाजवादी पार्टी ने अपना स्टैंड भी बदलने का मन बना लिया है। समाजवादी पार्टी में सर्वेश त्रिपाठी की क्या हैसियत है, यह तो वही जानें, पर अगर पार्टी को इसका समर्थन है तो पार्टी के स्टैंड में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
उधर अखिलेश यादव की कोशिश तो यहां तक है कि धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को उत्तर प्रदेश में कथा वाचन के लिए घुसने ही न दिया जाए, ताकि वह भाजपा के पक्ष में माहौल न बना सकें, जैसा कि चुनाव के पूर्व उन्होंने बिहार में किया था। वैसे जहां तक बिहार का सवाल है, तेजस्वी यादव ने बागेश्वर बाबा का विरोध कर मुसीबत मोल ली थी, और उनका गठबंधन चुनाव हार गया था। तो यहां भी खतरा इसी बात का है कि बाबा बागेश्वर का विरोध करके क्या अखिलेश यादव अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। हालांकि बाबा को रोकने की अखिलेश यादव के अरमानों पर पानी फेर दिया है, कुंडा के राजा और विधायक ने। कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपने बेंती राजमहल में बाबा बागेश्वर का कथा वाचन कार्यक्रम किया है, और सबको सामूहिक न्योता दिया है। बाबा कुछ कथाएं अन्य जगहों पर भी प्रस्तावित हैं।
इस विवाद पर आल इंडिया इमाम एसोसिएशन के मौलाना साजिद रशीदी का कहना है कि भाजपा ने पहले, जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे, अब अखिलेश यादव ने अगर कहा है कि हम कृष्ण को लाएंगे। यानी दोनों में कोई फर्क नहीं है। दोनों की ही प्राथमिकता में मुसलमान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा तो पहले से ही मुसलमानों के खिलाफ रहती है, पर अब अखिलेश यादव ने भी अपने मुस्लिम विरोधी इरादे साफ कर दिए हैं। उन्हें मुस्लिम समुदाय से कुछ नहीं लेना-लेना देना है। वह सिर्फ हिंदू और सनातन की ही बात करते हैं। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुसलमान कभी भी अपनी राजनीति में अल्लाह को नहीं लाता है, लेकिन हिंदू हराम और कृष्णा को जरूर लाते हैं। इसलिए मुसलमानों को अब खुद अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा।
प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी बाबा बागेश्वर का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रेम भाव में कृष्ण और राम की व्याख्या की थी। उसमें कुछ भी गलत नहीं है। जो समझदार होंगे, वही ये बात समझ पाएंगे। इसके अलावा एक और कथा इंद्रेश उपाध्याय ने भी बाबा बागेश्वर का समर्थन किया है। इस विषय पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर का कहना है कि जो व्यक्ति भगवान का दर्शन करने ही कभी नहीं जाता है, उसे राम और कृष्ण के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है।