दिल्ली में शादी के महज 72 दिन बाद 28 वर्षीय महिला आकृति सुतार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक बार फिर दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिण दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित पालिका कुंज इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद आकृति को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों ने इसे दुर्घटना या आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या और दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले में दहेज मृत्यु का केस दर्ज कर आकृति के पति को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, घटना 4 जुलाई की शाम की है। आकृति गंभीर हालत में पालिका कुंज स्थित एनडीएमसी फ्लैट्स के बाहर मिली थीं। उन्हें तत्काल एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और दहेज मृत्यु से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
आकृति की शादी 24 अप्रैल 2026 को अरस्तु सिक्का से हुई थी। परिवार के अनुसार यह प्रेम और पारिवारिक सहमति से हुआ विवाह था। आकृति एक निजी कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत थीं और विवाह से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह शादी के बाद भी अपनी नौकरी जारी रखेंगी ताकि अपने छोटे भाई की आर्थिक मदद कर सकें। परिजनों का दावा है कि विवाह से पहले ससुराल पक्ष ने उनकी इस शर्त को स्वीकार कर लिया था, लेकिन शादी के बाद उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया।
मृतका की मां अनु साय सुतार ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद उनकी बेटी पर नौकरी छोड़ने, जल्द बच्चा पैदा करने और घर के सभी काम संभालने का दबाव बनाया जाने लगा। उनका आरोप है कि आकृति को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा उसे मायके आने-जाने और परिवार से बातचीत करने पर भी रोकने की कोशिश की जाती थी।
शिकायत के अनुसार, आकृति ने 17 जून को अपनी मां को फोन कर बताया था कि उनके पति ने बेल्ट से उनकी पिटाई की थी। आरोप है कि पति उन पर बेवजह शक करता था और मोबाइल फोन साइलेंट होने जैसी छोटी-छोटी बातों को लेकर मारपीट करता था। मां का कहना है कि उनकी बेटी लगातार भय और तनाव में रह रही थी तथा कई बार उसने अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई थी। ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि शादी में लगभग 7 से 8 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से 20 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी। शिकायत में कहा गया है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर आकृति के साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जाता था। मृतका के परिजनों का कहना है कि शादी के बाद उनकी बेटी को कई बार धमकियां दी गईं और उसके साथ मारपीट की गई। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है और अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मृतका की मां ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि 29 जून को आकृति ने उन्हें फोन कर बताया था कि उन्हें डर है कि उनके पति उनकी हत्या कर सकते हैं। शिकायत के अनुसार, उसी दिन भोजन को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और फिर से मारपीट की गई। बाद में आकृति अपनी मित्र और ननद के घर भी गई थीं, जहां कथित रूप से समझौता कराया गया और वह अपने पति के साथ वापस चली गईं। परिवार का दावा है कि इसके बाद भी प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका।
घटना से एक दिन पहले मृतका की मां ने कथित तौर पर ससुर से संपर्क कर घरेलू विवाद में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। शिकायत के अनुसार, इसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें हस्तक्षेप न करने की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि इन दावों की सत्यता की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और जांच पूरी होने से पहले इन्हें अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
दिल्ली पुलिस ने मामले में दहेज मृत्यु का केस दर्ज कर पति अरस्तु सिक्का को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले सबूत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी और जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु और दहेज उत्पीड़न के आरोप सामने आने पर ऐसे मामलों की विशेष संवेदनशीलता के साथ जांच की जाती है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है। हालांकि किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक न्यायालय में आरोप सिद्ध न हो जाएं।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। पुलिस साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान दर्ज करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
