दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए दिल्ली जिमखाना क्लब से बेदखली की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा है। यह मामला राजधानी के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन से संबंधित है, जहां केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई बेदखली प्रक्रिया को क्लब के एक सदस्य और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने अदालत में चुनौती दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए निर्धारित की है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के एस्टेट ऑफिसर ने दिल्ली जिमखाना क्लब को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में क्लब से पूछा गया कि उसे परिसर से बेदखल क्यों न किया जाए। इसके बाद क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का रुख किया और बेदखली की प्रक्रिया को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया नोटिस समय से पहले जारी किया गया है, क्योंकि क्लब की लीज समाप्त करने के सरकार के फैसले को पहले से ही हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है और वह मामला अभी विचाराधीन है। उनका तर्क है कि जब तक अदालत लीज समाप्त करने की वैधता पर फैसला नहीं देती, तब तक बेदखली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की एकल पीठ ने की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिकाओं की प्रतियां उन्हें हाल ही में प्राप्त हुई हैं, इसलिए जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि एस्टेट ऑफिसर के समक्ष प्रस्तावित सुनवाई को स्थगित किया जा सकता है ताकि हाईकोर्ट के समक्ष मामला लंबित रहने तक कोई जल्दबाजी में कार्रवाई न हो।
अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया और यह भी दर्ज किया कि अगली सुनवाई तक क्लब के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही 7 जुलाई को प्रस्तावित एस्टेट ऑफिसर की सुनवाई को भी आगे बढ़ाने का आश्वासन अदालत के समक्ष दिया गया।
दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में से एक माना जाता है। यह क्लब लुटियंस दिल्ली स्थित लगभग 27.3 एकड़ भूमि पर संचालित होता है। वर्ष 1928 में यह भूमि स्थायी लीज पर क्लब को दी गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार यदि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यकता हो तो सरकार भूमि का पुनः अधिग्रहण कर सकती है। इसी प्रावधान के आधार पर केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में कार्रवाई शुरू की है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2022 से जुड़ी है, जब केंद्र सरकार ने क्लब के प्रबंधन और लीज की शर्तों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) का रुख किया था। बाद में अधिकरण ने क्लब के प्रशासन में सरकार द्वारा नामित सदस्यों की नियुक्ति का आदेश दिया था, जिसे राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने भी बरकरार रखा। इसके बाद लीज समाप्त करने और बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला केवल दिल्ली जिमखाना क्लब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी लीज पर संचालित अन्य संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। अदालत को यह तय करना होगा कि लंबित न्यायिक चुनौती के दौरान बेदखली की प्रक्रिया किस सीमा तक आगे बढ़ाई जा सकती है और क्या सरकार की कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के अनुरूप है।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और केंद्र सरकार को अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखना है। आधिकारिक निर्णय अभी आना बाकी है। अदालत द्वारा सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। मामला न्यायिक विचाराधीन है और अंतिम फैसला आने तक किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम नहीं माना जा सकता।
