एचआईवी की 86, एसटीआई की 14 और टीबी की 26 लोगों ने कराई जांच; आंखों की जांच भी हुई, दो दिवसीय शिविर में स्वास्थ्य जागरूकता पर जोर
कुशीनगर। कसया बस अड्डा परिसर में गुरुवार को दो दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच एवं एचआईवी-एड्स जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी, लखनऊ और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में कुल 96 लोगों का पंजीकरण किया गया। शिविर के दौरान 86 लोगों की एचआईवी जांच, 14 लोगों की एसटीआई जांच, 35 लोगों की आंखों की जांच और 26 लोगों की टीबी संबंधी जांच की गई। इसके साथ ही सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और विभिन्न संक्रामक बीमारियों के प्रति जागरूकता की गतिविधियां भी संचालित की गईं।
शिविर का उद्घाटन अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएन त्रिपाठी और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जय प्रकाश प्रधान ने फीता काटकर किया। अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और एचआईवी-एड्स सहित अन्य बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। बस अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थान पर शिविर लगाने का उद्देश्य यात्रियों, परिवहन कर्मियों और आसपास के लोगों को आसानी से जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराना रहा।
96 लोगों का पंजीकरण, अलग-अलग जांच की सुविधा
शिविर में कुल 96 लोगों ने पंजीकरण कराया। स्वास्थ्य टीम ने जरूरत के अनुसार अलग-अलग जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 86 लोगों की एचआईवी जांच की गई, जबकि 14 लोगों की एसटीआई यानी यौन संचारित संक्रमणों से संबंधित जांच हुई। इसके अलावा 35 लोगों की आंखों की जांच और 26 लोगों की टीबी संबंधी जांच की गई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अलग-अलग जांचों की संख्या को जोड़कर कुल मरीजों या पंजीकृत लोगों की संख्या नहीं माना जा सकता। एक ही व्यक्ति ने एक से अधिक जांच या परामर्श सेवाओं का लाभ लिया हो सकता है। इसलिए शिविर में पंजीकरण की कुल संख्या 96 रही, जबकि विभिन्न जांचों के आंकड़े अलग-अलग दर्ज किए गए।
शिविर में सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन जांच की सुविधा भी रखी गई थी। हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी-एड्स तथा एसटीआई/आरटीआई से संबंधित परामर्श एवं जांच की व्यवस्था की गई। टीबी के संभावित लक्षणों और जांच प्रक्रिया के बारे में भी लोगों को जानकारी दी गई। स्वास्थ्य टीम ने लोगों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
एचआईवी-एड्स को लेकर जागरूकता पर विशेष जोर
शिविर का एक प्रमुख उद्देश्य एचआईवी-एड्स को लेकर समाज में फैली झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना रहा। कई बार जानकारी के अभाव, सामाजिक संकोच और भेदभाव के डर से लोग एचआईवी जांच कराने से बचते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर नि:शुल्क जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने एचआईवी संक्रमण से बचाव, समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श के महत्व के बारे में जानकारी दी। लोगों को बताया गया कि एचआईवी की स्थिति जानने के लिए जांच कराना जरूरी है और संक्रमण की पुष्टि होने पर निर्धारित उपचार एवं चिकित्सकीय निगरानी से स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। एचआईवी से जुड़े लोगों के साथ भेदभाव नहीं करने और उन्हें सम्मानजनक व्यवहार देने का संदेश भी जागरूकता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
एसटीआई और आरटीआई से जुड़ी समस्याओं पर भी परामर्श दिया गया। इन संक्रमणों के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने जांच और उपचार को लेकर गोपनीयता तथा सही चिकित्सकीय जानकारी के महत्व पर भी जोर दिया।
टीबी और आंखों की जांच की भी व्यवस्था
शिविर में टीबी की पहचान और जागरूकता के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई। कुल 26 लोगों की टीबी संबंधी जांच की गई। टीबी के संभावित लक्षणों, समय पर जांच और उपचार के बारे में लोगों को जानकारी दी गई। स्वास्थ्य टीम ने बताया कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना और रात में पसीना आना जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर टीबी की पुष्टि नहीं की जा सकती; इसके लिए निर्धारित चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।
आंखों की जांच के लिए भी शिविर में अलग व्यवस्था की गई थी। कुल 35 लोगों की आंखों की जांच की गई। नेत्र परीक्षण अधिकारी ने लोगों की आंखों से संबंधित समस्याओं का परीक्षण कर आवश्यक सलाह दी। इसके साथ ही सामान्य स्वास्थ्य जांच और हीमोग्लोबिन जैसी जांचों के माध्यम से लोगों को अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया गया।
हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण, उनसे बचाव और जांच की जरूरत के बारे में भी जानकारी दी गई। शिविर में बैनर, पोस्टर और पंपलेट के माध्यम से जागरूकता सामग्री वितरित की गई। माइकिंग के जरिए भी लोगों को शिविर की सेवाओं और विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
शासन के निर्देश पर आयोजित हुआ उन्मुखीकरण कार्यक्रम
शासन से प्राप्त निर्देशों और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के परियोजना निदेशक के दिशा-निर्देशन में ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण यानी मेनस्ट्रीमिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके तहत 5 नवंबर 2026 को कसया बस अड्डा परिसर में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। इसका उद्देश्य एचआईवी-एड्स और अन्य स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर लोगों को जागरूक करना तथा विभिन्न विभागों और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत करना था।
परिवहन निगम के बस अड्डे को शिविर स्थल के रूप में चुनने का महत्व भी इसी से जुड़ा है। बस अड्डे पर प्रतिदिन यात्रियों और परिवहन से जुड़े कर्मचारियों की आवाजाही रहती है। ऐसे सार्वजनिक स्थान पर जांच और परामर्श की सुविधा मिलने से उन लोगों तक भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंच सकती है, जो सामान्य दिनों में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।
स्वास्थ्य टीम की लगाई गई थी ड्यूटी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से शिविर के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और संबंधित परियोजनाओं से जुड़े कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें परामर्शदाता पूनम भारती, लैब टेक्नीशियन रंजीत कुमार, परामर्शदाता शिव कुमार पाण्डेय, कसया के एसटीएस/एसटीएलएस टीबी कर्मचारी, लक्षित हस्तक्षेप परियोजना के प्रबंधक और जिला समन्वयक लिंक वर्कर योजना से जुड़े कर्मचारी शामिल थे।
इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसया के प्रभारी चिकित्साधिकारी को चिकित्सक दल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। एचआईवी जांच किट, हेपेटाइटिस जांच किट, बलगम के नमूने एकत्र करने के लिए कप-बॉक्स और आवश्यक औषधियों की उपलब्धता बनाए रखने को भी कहा गया था। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य शिविर में आने वाले लोगों को मौके पर ही आवश्यक जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्साधिकारी डॉ. नाजरीन फातिमा, नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉ. आनंद पाल सिंह, फार्मासिस्ट मोहम्मद इमरान अंसारी, परामर्शदाता पूनम भारती, लैब टेक्नीशियन बलवंत कुशवाहा और एसटीआई परामर्शदाता शिव कुमार पाण्डेय मौजूद रहे। इनके अलावा टीआई के तारकेश्वर सिंह, एलडब्ल्यूएस अमित मिश्रा, सोनू तिवारी, नुरलायन अंसारी, दीपक, विकास और सदानंद चौरसिया सहित अन्य कर्मचारी एवं सहयोगी उपस्थित रहे।
टीबी-एचआईवी समन्वयक ने किया संचालन
शिविर का संचालन टीबी-एचआईवी समन्वयक चन्द्रशेखर यादव ने किया। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी प्राथमिकता दी गई। बैनर, पोस्टर और पंपलेट के माध्यम से लोगों को संक्रमण से बचाव, समय पर जांच और उपचार के महत्व की जानकारी दी गई। माइकिंग के जरिए भी बस अड्डे पर मौजूद लोगों को शिविर की सुविधाओं के बारे में बताया गया।
दो दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग और परिवहन निगम ने सार्वजनिक परिवहन केंद्र को स्वास्थ्य जागरूकता के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। 96 लोगों का पंजीकरण और अलग-अलग श्रेणियों में हुई जांच इस बात का संकेत है कि ऐसे शिविरों के जरिए आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस और यौन संचारित संक्रमणों के मामले में समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण होती है। जागरूकता की कमी या सामाजिक झिझक के कारण जांच में देरी होने से उपचार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कसया बस अड्डे पर आयोजित शिविर जैसे प्रयास लोगों को जांच के लिए प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
