मुरादाबाद। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद में भी त्योहार की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। यहां के विश्व प्रसिद्ध पीतल उत्पादों की मांग में तेजी आई है। खासतौर पर दीपावली पर घरों में पूजा के लिए खरीदी जाने वाली पीतल की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को लेकर ग्राहकों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में अलग-अलग आकार और डिजाइन की मूर्तियां सजाई गई हैं और लोग अपनी पसंद तथा बजट के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं।
मुरादाबाद के कारोबारियों के मुताबिक, इस बार पीतल से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की मांग केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और केरल जैसे राज्यों और शहरों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली के मौके पर इन मूर्तियों की मांग हर साल रहती है, लेकिन इस बार भी बाजार में अच्छी खरीदारी की उम्मीद बनी हुई है।
100 ग्राम से लेकर 20 किलो तक की मूर्तियां उपलब्ध
मुरादाबाद के पीतल बाजार में ग्राहकों के लिए छोटे आकार से लेकर बड़ी और आकर्षक मूर्तियों तक की कई किस्में उपलब्ध हैं। दुकानदारों के अनुसार, बाजार में करीब 100 ग्राम वजन से लेकर 20 किलोग्राम तक की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां मिल रही हैं। इनकी कीमत लगभग 100 रुपये से शुरू होकर 25 हजार रुपये तक पहुंचती है।
कीमत और वजन की इस विविधता के चलते अलग-अलग बजट वाले ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से मूर्तियां खरीद सकते हैं। कोई घर में पूजा के लिए छोटी मूर्ति पसंद कर रहा है, तो कोई बड़े आकार की सजावटी मूर्ति खरीद रहा है। मूर्तियों के डिजाइन, कारीगरी और फिनिशिंग को लेकर भी ग्राहकों में रुचि दिखाई दे रही है।
व्यापारियों का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों से थोक खरीदार भी मुरादाबाद पहुंच रहे हैं। कई होलसेल ग्राहक यहां से मूर्तियां खरीदकर अपने-अपने शहरों में ले जा चुके हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी माल भेजने के लिए ऑर्डर मिले हैं। इससे स्थानीय कारोबारियों को त्योहार के सीजन में व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।
लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों में उत्साह
दुकानदारों का कहना है कि इस साल पीतल से बने उत्पादों की कीमतों के साथ उत्पादन और अन्य लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को खरीदने के प्रति लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। व्यापारी मानते हैं कि दीपावली पर पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदना लोगों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी ग्राहक अपनी पसंद की मूर्ति घर ले जाना चाहते हैं।
बाजार में खरीदारी के लिए पहुंच रहे लोग मूर्तियों के आकार, डिजाइन और कीमत की तुलना कर रहे हैं। दुकानदारों को उम्मीद है कि धनतेरस और दीपावली के नजदीक आने के साथ ग्राहकों की संख्या और बढ़ेगी। त्योहार के अंतिम दिनों में खरीदारी तेज होने की संभावना को देखते हुए कारोबारी भी अपने प्रतिष्ठानों पर पर्याप्त स्टॉक रखने की तैयारी कर रहे हैं।
सर्राफा बाजार में चांदी की धार्मिक वस्तुओं की मांग बढ़ी
दीपावली की खरीदारी का असर केवल पीतल बाजार तक सीमित नहीं है। मुरादाबाद के सर्राफा बाजार में भी चांदी से बनी धार्मिक और सजावटी वस्तुओं की मांग बढ़ने की बात सामने आई है। व्यापारियों के मुताबिक, इस बार ग्राहक सोने के मुकाबले चांदी की वस्तुओं में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
चांदी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के अलावा मछली, कछुआ, तुलसी का पौधा और हाथी जैसी आकृतियों की भी मांग बढ़ी है। कई ग्राहक इन वस्तुओं को धार्मिक मान्यताओं और वास्तु से जुड़ी अपनी पसंद के आधार पर खरीद रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि चांदी की वस्तुओं को लेकर ग्राहकों की रुचि के चलते सर्राफा बाजार में भी धनतेरस पर अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
धनतेरस पर कारोबारियों को अच्छी बिक्री की उम्मीद
मुरादाबाद के व्यापारियों के लिए दीपावली और धनतेरस का समय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पीतल के उत्पादों की पहचान देश-विदेश तक है और त्योहारों के दौरान इनकी मांग बढ़ जाती है। इस बार लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के साथ-साथ चांदी की धार्मिक वस्तुओं की मांग भी कारोबारियों के लिए उम्मीद लेकर आई है।
हालांकि कच्चे माल और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी व्यापारियों के सामने चुनौती बनी हुई है, लेकिन ग्राहकों की दिलचस्पी को देखते हुए दुकानदारों को त्योहार के दौरान बिक्री अच्छी रहने की उम्मीद है। अब कारोबारियों की निगाह धनतेरस और दीपावली के बाजार पर है, जब आमतौर पर खरीदारी में तेजी आती है।
मुरादाबाद के बाजारों में बढ़ती रौनक और अलग-अलग राज्यों से मिल रहे ऑर्डर यह दिखाते हैं कि दीपावली के मौके पर पीतल नगरी के पारंपरिक कारोबार को एक बार फिर गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों के लिए यह त्योहार केवल धार्मिक खरीदारी का अवसर नहीं, बल्कि साल के महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन में से एक है।
