उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी लखनऊ समेत राज्य के 50 से अधिक जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों, खुले मैदानों में काम करने वाले लोगों और पेड़ों के नीचे खड़े रहने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विभाग ने कहा है कि गरज-चमक के दौरान लोग खुले स्थानों से दूर रहें और सुरक्षित भवनों में शरण लें।
पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को उमस से राहत मिली है। हालांकि लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों को नुकसान और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। नगर निकायों और जिला प्रशासन को जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। बाढ़ संभावित जिलों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। गंगा, घाघरा, शारदा, राप्ती, सरयू और अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर की नियमित निगरानी की जा रही है। यदि लगातार बारिश जारी रहती है तो कुछ नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बारिश का असर सड़क और रेल यातायात पर भी पड़ सकता है। कई स्थानों पर जलभराव के कारण ट्रैफिक धीमा होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों पर आवागमन प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करने और मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही घर से निकलने की अपील की है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश खरीफ फसलों, विशेषकर धान, मक्का और दलहन की बुवाई के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव होने से फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। किसानों को खेतों की जलनिकासी व्यवस्था बनाए रखने और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी बारिश के मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूषित पानी के सेवन से बचने, जलजनित बीमारियों से सतर्क रहने और बच्चों एवं बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। लगातार बारिश के दौरान बिजली के खंभों, टूटे हुए तारों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर नए अलर्ट जारी किए जा सकते हैं।
फिलहाल प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल भारत मौसम विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर ही भरोसा करें। मौसम की स्थिति में बदलाव के अनुसार आगे की सलाह और चेतावनी जारी की जाएगी।
