अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित दान अनियमितता मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और CBI जांच की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि हाल के दिनों में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों और चल रही विशेष जांच दल (SIT) की जांच को देखते हुए सार्वजनिक दान की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा-पद्धति या धार्मिक गतिविधियों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना नहीं है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उनकी मांग केवल ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने तक सीमित है।
सुधाकर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वर्तमान जांच को उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाए। उनका तर्क है कि मामले की निष्पक्ष जांच और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है।
याचिका में एक कोर्ट मॉनिटरड ओवरसाइट कमेटी (Oversight Committee) गठित करने की भी मांग की गई है। प्रस्तावित समिति में सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों, वित्तीय विशेषज्ञों और स्वतंत्र सदस्यों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। जांच पूरी होने तक यह समिति ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की निगरानी करे, ताकि किसी भी संभावित अनियमितता या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खाते, डिजिटल लेजर, यूपीआई लेनदेन, बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही ट्रस्ट को बिना न्यायालय की अनुमति के बड़े निवेश, महत्वपूर्ण अनुबंध या बड़े वित्तीय निर्णय लेने से रोका जाए।
आरजेडी सांसद ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि ट्रस्ट के गठन से अब तक प्राप्त सभी दान—नकद, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल भुगतान, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं—का पूरा विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा ट्रस्ट की ऑडिटेड वित्तीय रिपोर्ट और दान के उपयोग का विवरण नियमित रूप से सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कथित दान गबन मामले की जांच कर रहा है। हाल ही में SIT ने ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के खातों का दोबारा ऑडिट (Re-audit) कराने का फैसला लिया है। जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े नए तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में दायर दो अन्य याचिकाओं की तत्काल सुनवाई से इनकार किया था। हालांकि नई याचिका में विस्तृत राहतों की मांग करते हुए ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र जांच और न्यायिक निगरानी की मांग की गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की सुनवाई पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
