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अमेरिका ने ईरान को दी थी इजरायल की कथित हत्या की साजिश की चेतावनी, युद्धविराम वार्ता बचाने की कोशिश का दावा

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ताओं को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने मध्य-पूर्व के सहयोगी देशों के जरिए ईरान को यह संदेश भेजा था कि इजरायल कथित तौर पर ईरान के शीर्ष वार्ताकारों (Ceasefire Negotiators) को निशाना बना सकता है। अमेरिकी अधिकारियों को […]

US Warned Iran of Alleged Israeli Plot Against Top Negotiators

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ताओं को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने मध्य-पूर्व के सहयोगी देशों के जरिए ईरान को यह संदेश भेजा था कि इजरायल कथित तौर पर ईरान के शीर्ष वार्ताकारों (Ceasefire Negotiators) को निशाना बना सकता है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ऐसा हुआ तो जारी शांति वार्ता पूरी तरह पटरी से उतर सकती है।

रिपोर्टों के अनुसार, संभावित निशाने पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) बताए गए थे। ये दोनों नेता अमेरिका और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के साथ युद्धविराम और तनाव कम करने की बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे थे।

बताया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों को चिंता थी कि यदि इन वरिष्ठ नेताओं की हत्या होती है तो ईरान में कूटनीतिक बातचीत का नेतृत्व करने वाले अपेक्षाकृत व्यावहारिक (Pragmatic) नेताओं की जगह कट्टरपंथी नेतृत्व हावी हो सकता है, जिससे किसी भी संभावित समझौते की संभावना समाप्त हो जाती। इसी कारण अमेरिका ने असामान्य कदम उठाते हुए तीसरे देशों के माध्यम से ईरान को सतर्क रहने की सलाह दी।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका ने पहले ही इजरायल को स्पष्ट कर दिया था कि राजनीतिक नेतृत्व या शांति वार्ता में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता उस समय युद्धविराम वार्ता को सफल बनाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करना थी। माना जा रहा था कि यदि ईरान के शीर्ष वार्ताकारों की हत्या हो जाती तो बातचीत तत्काल समाप्त हो सकती थी और क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और तेज़ हो सकता था।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के बीच इस मुद्दे पर रणनीतिक मतभेद भी सामने आए। जहां अमेरिका कूटनीतिक समाधान और युद्धविराम को आगे बढ़ाना चाहता था, वहीं इजरायल की सैन्य रणनीति को लेकर वाशिंगटन में चिंता जताई गई। विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम दोनों सहयोगी देशों के दृष्टिकोण में अंतर को भी दर्शाता है।

ईरान ने हाल के दिनों में कई बार चेतावनी दी है कि यदि उसके शीर्ष नेताओं या वार्ताकारों पर कोई हमला होता है तो उसका जवाब तुरंत और कड़ा होगा। ईरानी विदेश मंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि देश के नेतृत्व के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।

हालांकि अभी तक इस कथित हत्या की साजिश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इजरायल ने इन दावों को स्वीकार किया है। यह जानकारी मुख्य रूप से अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसके बावजूद इस खुलासे ने मध्य-पूर्व की कूटनीति, अमेरिका-इजरायल संबंधों और ईरान के साथ जारी वार्ताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो ऐसे सुरक्षा जोखिमों से निपटना बड़ी चुनौती रहेगा। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि युद्धविराम वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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