उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों (टैरिफ) की घोषणा कर दी है। सबसे बड़ी राहत यह है कि लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा आयोग ने कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल में 10 प्रतिशत तक की छूट जारी रखने का भी फैसला किया है।
नई टैरिफ व्यवस्था के तहत घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि सहित अधिकांश उपभोक्ता श्रेणियों के लिए मौजूदा बिजली दरें यथावत रहेंगी। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की ओर से टैरिफ बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन आयोग ने उपभोक्ताओं के हित को प्राथमिकता देते हुए उसे स्वीकार नहीं किया। आयोग का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं होगा।
आयोग के आदेश के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) के आधार पर टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, विस्तृत सुनवाई, उपभोक्ता संगठनों की आपत्तियों और वित्तीय आंकड़ों की समीक्षा के बाद आयोग ने दरों में किसी प्रकार की वृद्धि से इनकार कर दिया। इससे प्रदेश के लगभग 3.8 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
नई व्यवस्था में कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए पहले से लागू 10 प्रतिशत तक की रियायत भी जारी रखी गई है। विशेष रूप से नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट को समाप्त करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और इसे जारी रखने का निर्णय लिया गया। इससे हजारों उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलती रहेगी।
आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों की ओर से स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के खर्च को उपभोक्ताओं पर डालने के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि कंपनियां यह साबित नहीं कर सकीं कि स्मार्ट मीटरों से उन्हें वास्तविक वित्तीय लाभ कितना हुआ है। ऐसे में इस खर्च का भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं माना गया।
इसके अलावा आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बैटरी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के लिए विशेष टैरिफ व्यवस्था लागू की गई है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ईवी चार्जिंग पर 20 प्रतिशत तक की रियायत देने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहन मिलेगा।
राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी बजट में भी वृद्धि की है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बिजली सब्सिडी की राशि बढ़ाई गई है, ताकि घरेलू और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़े। आयोग ने वितरण हानियों (Distribution Losses) को कम करने और बिजली कंपनियों की कार्यकुशलता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सात वर्षों तक बिजली दरों में वृद्धि नहीं होना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि भविष्य में बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए वितरण व्यवस्था में सुधार, बिजली चोरी पर नियंत्रण और तकनीकी दक्षता बढ़ाना जरूरी होगा।
उपभोक्ता संगठनों ने आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित कई अतिरिक्त शुल्कों को अस्वीकार किया जाना आम लोगों के हित में है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में बिजली दरें स्थिर रहने से घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
फिलहाल नई टैरिफ व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। सरकार और नियामक आयोग का कहना है कि भविष्य में भी उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए बिजली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रहेंगे।