ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेता, मंत्री, संसद अध्यक्ष और विशेष दूत शामिल होने जा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 100 से अधिक देशों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों ने अंतिम संस्कार समारोह में भाग लेने की पुष्टि की है। यह समारोह 4 जुलाई से शुरू होकर कई दिनों तक तेहरान, क़ोम, मशहद और इराक के कुछ प्रमुख शिया धार्मिक स्थलों पर आयोजित किया जाएगा।
ईरानी सरकार का कहना है कि यह केवल एक राजकीय अंतिम संस्कार नहीं बल्कि देश के इतिहास के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में से एक होगा। प्रशासन को लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है और सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर की गई है। सरकारी कार्यालयों में अवकाश, विशेष सुरक्षा प्रबंध, यातायात नियंत्रण और हवाई उड़ानों पर आंशिक प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
भारत की ओर से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन भी समारोह में शामिल होंगे। भारत ने प्रधानमंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व नहीं भेजा है, लेकिन राजनयिक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान और ईरान के बीच धार्मिक एवं क्षेत्रीय संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन ने भी अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को अंतिम संस्कार में भेजने की घोषणा की है। चीन की ओर से नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई (He Wei) समारोह में भाग लेंगे। चीन ने इसे दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों का प्रतीक बताया है।
रूस की ओर से भी वरिष्ठ राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी की पुष्टि की गई है। इसके अलावा कतर, ताजिकिस्तान और कई अन्य एशियाई तथा मध्य-पूर्वी देशों के शीर्ष प्रतिनिधि समारोह में शामिल होंगे। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों के राष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष, विदेश मंत्री, विशेष दूत और धार्मिक नेता इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तेहरान पहुंच रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह समारोह केवल सरकारी प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर के धार्मिक संगठनों और शिया समुदायों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। अधिकारियों के मुताबिक 90 से अधिक देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की पुष्टि की है।
इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल न होने की खबर भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा कारणों और संभावित खतरों को देखते हुए उनके सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना नहीं है। हालांकि इस संबंध में ईरानी प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सीमित है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में विदेशी नेताओं की उपस्थिति केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और ईरान के साथ विभिन्न देशों के संबंधों का भी संकेत मानी जा रही है। विशेष रूप से चीन, रूस, भारत और क्षेत्रीय देशों की भागीदारी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
ईरान में यह अंतिम संस्कार कई दिनों तक चलेगा और इसके दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इसे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
