लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उनमें शामिल Fire Station Second Officer (FSSO) कमलेंद्र कुमार सिंह ने अब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को पत्र लिखकर अपने निलंबन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस पूरे मामले में उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषकर Chief Fire Officer (CFO) की बनती है।
कमलेंद्र कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि अलीगंज अग्निकांड बेहद दुखद घटना थी और मृतकों के परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं, लेकिन हादसे के लिए उन पर की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना है कि एक FSSO की जिम्मेदारी सीमित होती है और उसका काम मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर निरीक्षण करना तथा रिपोर्ट तैयार करना होता है। उनके पास किसी भवन को फायर एनओसी (NOC) जारी करने या बड़े स्तर पर अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू कराने का अधिकार नहीं होता।
पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पूरे शहर की फायर सेफ्टी व्यवस्था की निगरानी और भवनों को फायर क्लियरेंस देने की जिम्मेदारी Chief Fire Officer की होती है। कमलेंद्र सिंह का आरोप है कि जिस भवन में यह भीषण आग लगी, उसे मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली थी, लेकिन वर्षों से उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। उनका कहना है कि इतनी बड़ी अनियमितता की जानकारी CFO को होनी चाहिए थी और समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
निलंबित अधिकारी ने अपने पत्र में यह भी दावा किया कि हादसे के बाद राहत और बचाव कार्यों में समन्वय की कमी दिखाई दी। उनके अनुसार अग्निशमन कार्यवाही में हुई देरी और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी भी जांच का विषय होनी चाहिए। उन्होंने इसे वरिष्ठ स्तर की लापरवाही से जोड़ते हुए कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर देने से वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी।
कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाए कि आखिर हादसे के लिए वास्तविक रूप से कौन जिम्मेदार था। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में किसी वरिष्ठ अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके तहत चार अधिकारियों को निलंबित किया गया और विशेष जांच टीम (SIT) का गठन भी किया गया।
जांच एजेंसियां फिलहाल भवन निर्माण, फायर सुरक्षा प्रबंध, एनओसी प्रक्रिया, प्रशासनिक निगरानी और बचाव अभियान के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं। इस बीच निलंबित FSSO की चिट्ठी ने पूरे मामले को नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ दे दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है या फिर जांच की आंच वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंचेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIT रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं मृतकों के परिजन अब भी यह मांग कर रहे हैं कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को सख्त सजा मिले, चाहे उनका पद कितना भी बड़ा क्यों न हो।
फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कमलेंद्र कुमार सिंह के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उनकी चिट्ठी ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि लखनऊ अग्निकांड की जिम्मेदारी आखिर किस स्तर तक तय की जानी चाहिए और क्या जांच केवल निलंबन तक सीमित रहेगी या बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी।