लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti-Paper Leak Bill) पर चर्चा आज भी जारी रही। एक सप्ताह तक चले गतिरोध के बाद शुरू हुई बहस में सरकार और विपक्ष के बीच परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस विधेयक पर 10 घंटे तक चर्चा कराई जाएगी।
सरकार ने बताया छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय छात्रों के हित में कठोर कानून लाना समय की आवश्यकता है। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद करेगा।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल
विपक्षी दलों ने विधेयक का स्वागत करते हुए भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली की प्रशासनिक खामियों, सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को भी मजबूत करना होगा। कई सांसदों ने छात्रों के हालिया आंदोलनों और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी सदन में उठाया।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन विधेयक में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर पहले से अधिक सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार—
- पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर 10 वर्ष तक की जेल।
- दोषियों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना।
- मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट।
- परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के प्रावधान।
आज भी जारी रही बहस
आज की कार्यवाही के दौरान कई सांसदों ने अपने विचार रखे। सरकार ने कहा कि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए लाया जा रहा है, जबकि विपक्ष ने इसे आवश्यक लेकिन अधूरा कदम बताया। बहस के बाद विधेयक पर सदन की आगे की प्रक्रिया जारी रही।
आगे क्या?
लोकसभा में चर्चा पूरी होने के बाद विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यदि दोनों सदनों से मंजूरी मिलती है और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होती है, तो संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।