यमन में वर्षों से जारी संघर्ष ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। सऊदी अरब और ईरान समर्थित माने जाने वाले हूती आंदोलन के बीच हालिया सैन्य टकराव ने न केवल यमन के भीतर युद्ध के मोर्चों को सक्रिय कर दिया है, बल्कि सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और शहरों तक हमलों का दायरा बढ़ा दिया है। 8 सितंबर 2026 को हूती बलों ने सऊदी अरब के अबहा, खमीस मुशैत, जिजान और नजरान सहित कई इलाकों को निशाना बनाया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में कम से कम 73 लोग घायल हुए और कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों में आग लग गई।
इस घटनाक्रम को इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुई युद्धविराम व्यवस्था के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच बड़े पैमाने की सीधी लड़ाई काफी हद तक कम हो गई थी। हालांकि राजनीतिक समझौता कभी पूरी तरह नहीं हो सका, फिर भी कई वर्षों तक दोनों पक्ष ऐसी व्यापक भिड़ंत से बचते रहे थे। अब मिसाइल और ड्रोन हमलों, यमन के भीतर नए जमीनी अभियानों और लाल सागर के रणनीतिक मार्ग पर बढ़ते दबाव ने पूर्ण युद्ध की वापसी की आशंका बढ़ा दी है।
सऊदी अरब पर क्या हुआ?
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में कई स्थानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमलों का निशाना ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों के साथ-साथ खमीस मुशैत स्थित सैन्य ठिकाना भी रहा। जिजान क्षेत्र में मौजूद बड़ी तेल रिफाइनरी और अन्य सुविधाओं के आसपास आग लगने और कामकाज प्रभावित होने की सूचना सामने आई।
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने हमलों के बाद कई ऊर्जा और उपयोगिता प्रतिष्ठानों पर असर पड़ने की पुष्टि की। अधिकारियों के मुताबिक नागरिकों सहित कम से कम 73 लोग घायल हुए। इसके अगले दिन खमीस मुशैत में लगाया गया सुरक्षा अलर्ट हटा लिया गया, हालांकि दक्षिणी क्षेत्रों में सतर्कता जारी रही।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि कार्रवाई हाल के दिनों में यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। हूती पक्ष का दावा है कि सऊदी अरब और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई के कारण उसने सऊदी ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर सऊदी नेतृत्व ने इन हमलों को गंभीर सैन्य उकसावे के रूप में देखा है और कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करेगा।
यमन के भीतर भी तेज हुई लड़ाई
मामला केवल सऊदी क्षेत्र पर हुए हमलों तक सीमित नहीं है। यमन के अंदर कई मोर्चों पर हूतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से जुड़ी सेनाओं के बीच लड़ाई तेज हो चुकी है।
अल-जौफ, ताइज, मारिब, अल-बायदा और होदेइदा जैसे क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है। सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने कई इलाकों में हूती ठिकानों की ओर बढ़ने और कुछ क्षेत्रों में बढ़त हासिल करने का दावा किया है। हूती पक्ष ने इन दावों को चुनौती देते हुए कई हमलों को रोकने और सरकारी बलों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। युद्ध क्षेत्र से आने वाले इन दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सितंबर के शुरुआती दिनों में पश्चिमी यमन में हुई लड़ाई में दर्जनों लड़ाकों और नागरिकों की मौत की सूचना भी सामने आई। ताइज और होदेइदा के आसपास के मोर्चे खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहीं से बाब अल-मंदेब समुद्री मार्ग की ओर पहुंचने वाले क्षेत्रों पर प्रभाव डाला जा सकता है।
जेल पर हमले का आरोप और जवाबी कार्रवाई का दावा
हालिया तनाव को और बढ़ाने वाली घटनाओं में अल-जौफ प्रांत की एक जेल पर कथित हवाई हमला भी शामिल है। हूती अधिकारियों ने सऊदी अरब पर अल-हज्म स्थित जेल को निशाना बनाने का आरोप लगाया और दावा किया कि इसमें सात लोगों की मौत हुई तथा कई लोग घायल हुए।
इस आरोप पर तत्काल सऊदी पुष्टि सामने नहीं आई थी। इसलिए इसे हूती पक्ष का आरोप ही माना जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। हूती नेतृत्व ने बाद में सऊदी अरब पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को अपने इलाकों पर हुई सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया।
बाब अल-मंदेब क्यों बन गया सबसे अहम मोर्चा?
मौजूदा संघर्ष को समझने के लिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत समझना जरूरी है। यह संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है।
हूती पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। जुलाई 2026 में समूह ने सऊदी शिपिंग के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी। इसके साथ पश्चिमी यमन के तटीय क्षेत्रों में सैन्य दबाव बढ़ने लगा।
यदि हूती बाब अल-मंदेब के आसपास अधिक प्रभावी सैन्य स्थिति हासिल करते हैं तो उनके पास लाल सागर में जहाजों पर दबाव बढ़ाने की क्षमता मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर सऊदी समर्थित बल इन क्षेत्रों में हूती विस्तार रोकने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि ताइज, होदेइदा और अल-मखा के आसपास की लड़ाई अब स्थानीय भूभाग की लड़ाई से कहीं ज्यादा महत्व रखती है।
तेल बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
सऊदी अरब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में उसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किसी भी बड़े हमले का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकता है।
8 सितंबर के हमलों के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेजी देखी गई। उस समय ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया। मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के कारण पहले से ही तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले मार्ग पर खतरा बढ़ने का अर्थ यह है कि लाल सागर के जरिए होने वाले तेल और माल परिवहन की लागत बढ़ सकती है। यदि जहाज कंपनियां सुरक्षा कारणों से लंबे वैकल्पिक मार्ग चुनती हैं तो बीमा, ईंधन और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ सकता है।
2022 के बाद क्यों बनी थी शांति?
यमन में मौजूदा युद्ध की जड़ें 2014 तक जाती हैं, जब हूतियों ने राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
इसके बाद वर्षों तक हवाई हमले, मिसाइल हमले और जमीनी लड़ाइयां चलती रहीं। संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, लाखों लोग विस्थापित हुए और यमन गंभीर मानवीय संकट में फंस गया।
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से घोषित युद्धविराम ने बड़े पैमाने की लड़ाई को काफी कम कर दिया। औपचारिक युद्धविराम की अवधि समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक दोनों पक्षों ने व्यापक युद्ध की ओर लौटने से परहेज किया। इसी दौरान सऊदी अरब और हूती नेतृत्व के बीच राजनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी बातचीत होती रही।
लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव, लाल सागर की सुरक्षा और यमन के भीतर नई सैन्य लामबंदी ने उस नाजुक संतुलन को कमजोर कर दिया।
क्या सऊदी अरब बड़े सैन्य अभियान की तैयारी करेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब हूती हमलों का जवाब किस स्तर पर देगा।
सऊदी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वह अपने क्षेत्र और आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। साथ ही रियाद की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि राजनीतिक समाधान का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इसका अर्थ है कि सऊदी अरब फिलहाल दोहरी रणनीति अपना सकता है—एक तरफ सैन्य प्रतिरोध और दूसरी ओर भविष्य के समझौते का रास्ता खुला रखना।
सऊदी अरब के लिए पूर्ण युद्ध में वापस जाना आसान विकल्प नहीं होगा। कई वर्षों तक चले यमन युद्ध की आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक कीमत काफी अधिक रही है। लेकिन यदि हूती हमले लगातार सऊदी शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और जहाजों को निशाना बनाते हैं तो रियाद पर बड़े जवाबी अभियान का दबाव बढ़ सकता है।
हूतियों की रणनीति क्या हो सकती है?
हूती आंदोलन के लिए पश्चिमी तट और बाब अल-मंदेब के आसपास प्रभाव बढ़ाना बड़ा रणनीतिक लाभ दे सकता है। इससे समूह अपने जमीनी नियंत्रण को समुद्री दबाव की क्षमता से जोड़ सकता है।
इसके साथ ही सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमले यह दिखाने का प्रयास भी हो सकते हैं कि हूती केवल यमन के अंदर सीमित सैन्य शक्ति नहीं हैं।
लेकिन ऐसा करने में जोखिम भी बड़ा है। सऊदी अरब पर लगातार बड़े हमले एक व्यापक क्षेत्रीय जवाब को जन्म दे सकते हैं और यमन पर नए हवाई तथा जमीनी अभियानों का दबाव बढ़ा सकते हैं।
सबसे बड़ा खतरा यमन के आम लोगों को
नई लड़ाई का सबसे गंभीर असर यमन की नागरिक आबादी पर पड़ने की आशंका है। देश पहले ही वर्षों के युद्ध, गरीबी, विस्थापन और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था से जूझ रहा है।
हालिया संघर्ष के दौरान कई क्षेत्रों से लोगों के घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की खबरें सामने आई हैं। यदि ताइज, होदेइदा, मारिब और अल-जौफ जैसे क्षेत्रों में युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है तो आंतरिक विस्थापन और खाद्य संकट दोनों बढ़ सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अगले कुछ दिनों और सप्ताहों में तीन संकेत बेहद महत्वपूर्ण होंगे। पहला, सऊदी अरब हूती हमलों के जवाब में सीमित सैन्य कार्रवाई करता है या व्यापक अभियान शुरू करता है। दूसरा, पश्चिमी यमन में सरकारी और हूती बलों की जमीनी लड़ाई किस दिशा में जाती है। तीसरा, बाब अल-मंदेब और लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का स्तर बढ़ता है या नहीं।
यदि हूती सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रखते हैं और सरकारी बल सना की दिशा में बड़े अभियान का प्रयास करते हैं, तो 2022 के बाद बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पूरी तरह खत्म हो सकती है। दूसरी ओर किसी मध्यस्थता या सीधी बातचीत से तनाव सीमित भी किया जा सकता है।
फिलहाल स्थिति तेजी से बदल रही है और युद्ध क्षेत्र से आने वाले कई सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है। इसलिए आने वाले दिनों में हताहतों, क्षेत्रीय नियंत्रण और सैन्य कार्रवाई से जुड़ी जानकारी बदल सकती है। इतना स्पष्ट है कि यमन का संघर्ष एक बार फिर केवल गृहयुद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है। सऊदी ऊर्जा सुरक्षा, लाल सागर का समुद्री व्यापार और बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण मार्ग इस संघर्ष को पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बना रहे हैं।