उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav से जुड़े जमीन विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोला है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को लेकर भी बड़ा दावा किया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए भाजपा के भीतर ही साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कुछ राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है और इसी रणनीति के तहत मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को निशाना बनाया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि मोहन यादव पर जमीन खरीद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास भी “300 से 600 एकड़ जमीन” होने की बात कही जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि जमीन खरीदना कोई नई बात नहीं है और मोहन यादव पहले से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार भाजपा को यह जानकारी पहले से थी, इसलिए अब अचानक ऐसे आरोप सामने आना राजनीतिक मंशा की ओर इशारा करता है।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने का रास्ता तलाश रही है। उन्होंने दावा किया कि इन राज्यों के बाद उत्तर प्रदेश में भी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा हो सकती है। अखिलेश यादव के मुताबिक, मोहन यादव के खिलाफ उठ रहे आरोप इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं।
दरअसल पूरा विवाद मध्य प्रदेश में सामने आए एक भूमि खरीद मामले से जुड़ा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़े लोगों ने उज्जैन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि विकास परियोजनाओं के आसपास जमीन खरीदने से भविष्य में आर्थिक लाभ की संभावना थी। कुछ रिपोर्टों में 168 एकड़ तक जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई नई जमीन नहीं खरीदी है। भाजपा का दावा है कि जिन संपत्तियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से घोषित रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और उनमें कोई अवैधता नहीं है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि मोहन यादव ने 2017 में संबंधित कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।
अखिलेश यादव के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी पलटवार शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री Om Prakash Rajbhar ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव खुद इस विवाद को राजनीतिक लाभ के लिए उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष बिना तथ्यों के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच ऐसे बयान आने वाले समय में और अधिक तीखे हो सकते हैं। विपक्ष लगातार भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार, भूमि सौदों और प्रशासनिक फैसलों के मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा विकास और निवेश को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
फिलहाल अखिलेश यादव द्वारा किया गया “600 एकड़ जमीन” वाला दावा राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है। इसके समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं किया है। वहीं भाजपा ने भी इन आरोपों को गंभीरता से न लेते हुए राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है।