अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति के संकेतों के बीच वॉशिंगटन ने ईरानी तेल निर्यात पर बड़ी राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 60 दिनों के लिए आंशिक प्रतिबंधों (Sanctions Waiver) को मंजूरी दे दी है, जिससे ईरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री की अनुमति मिल गई है।
यह फैसला स्विट्जरलैंड में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद लिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार बातचीत “उत्पादक” रही है और दोनों पक्ष व्यापक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में मुक्त समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को प्रवेश देने पर सहमति जताई है।
नई व्यवस्था के तहत ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल सामान की बिक्री, परिवहन, बीमा और संबंधित वित्तीय सेवाओं को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी गई है। यह लाइसेंस 21 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पिछले कई दशकों में अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक राहतों में से एक है। 2018 में प्रतिबंधों की वापसी के बाद ईरान के तेल निर्यात पर भारी असर पड़ा था, लेकिन अब इस अस्थायी राहत से उसकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कुछ अनुमानों के अनुसार ईरान अगले दो महीनों में अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त कर सकता है।
इस फैसले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। ईरानी तेल की संभावित अतिरिक्त आपूर्ति की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक तेल आपूर्ति बेहतर होने से ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी।
वार्ता में केवल तेल ही नहीं बल्कि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, जमे हुए ईरानी फंड और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंधों का पूर्ण अंत नहीं है। यह केवल एक अस्थायी और सशर्त राहत है, जो वार्ता की प्रगति और ईरान द्वारा किए गए वादों के पालन पर निर्भर करेगी।
यदि आने वाले हफ्तों में बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिका-ईरान संबंधों में एक बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी राहत एक स्थायी शांति समझौते में बदल पाती है।