पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग (EC) को पार्टी पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई सूची भेज दी है। इस सूची में ममता बनर्जी को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखा गया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बागी गुट ने समानांतर संगठन खड़ा करते हुए वरिष्ठ नेता Arup Roy को अपना अध्यक्ष घोषित कर दिया है। बागी नेताओं का दावा है कि मौजूदा राष्ट्रीय कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और पार्टी में “संवैधानिक संकट” पैदा हो गया था।
चुनाव आयोग को भेजी गई सूची में Subrata Bakshi को उपाध्यक्ष, Abhishek Banerjee को राष्ट्रीय महासचिव, जबकि Derek O’Brien और Dola Sen को संयुक्त सचिव के रूप में बरकरार रखा गया है। ममता समर्थक गुट का कहना है कि बागी नेताओं को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है।
दूसरी ओर, विपक्ष के नेता Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले बागी गुट ने दावा किया है कि उन्हें बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। बागियों ने अपनी अलग राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन कर लिया है और चुनाव आयोग को खुद को “असली TMC” के रूप में मान्यता देने की तैयारी कर रहे हैं।
सत्ता संघर्ष और तेज तब हो गया जब ममता गुट ने पूर्व कोलकाता मेयर Firhad Hakim, Aroop Biswas और अन्य नेताओं को कथित “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निष्कासित कर दिया। इसे ममता बनर्जी द्वारा संगठन पर पकड़ मजबूत करने की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC के 28 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ा आंतरिक संकट है। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को झटका लगने के बाद संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है और कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।
इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह चर्चा भी तेज है कि यदि मामला चुनाव आयोग और अदालतों तक पहुंचता है तो पार्टी के चुनाव चिन्ह, संगठनात्मक नियंत्रण और वित्तीय संसाधनों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है।
फिलहाल TMC दो स्पष्ट धड़ों में बंटी दिखाई दे रही है। एक तरफ ममता बनर्जी का आधिकारिक गुट है, जबकि दूसरी ओर बागी नेता खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग का रुख और विधायकों का समर्थन तय करेगा कि इस राजनीतिक लड़ाई का अगला अध्याय क्या होगा।