लखनऊ। लोकगायिका और कवयित्री नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज कोतवाली में दर्ज मुकदमे के सिलसिले में अपना बयान दर्ज करा दिया है। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर पुलिस नोटिस, कोतवाली बुलाए जाने के कारण और अपने पूरे अनुभव को साझा किया।
“जिंदगी में पहली बार कोतवाली गई”
वीडियो की शुरुआत में नेहा सिंह राठौर कहती हैं कि यह उनके जीवन का पहला मौका था, जब वे किसी पुलिस कोतवाली के भीतर गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस के तहत बयान दर्ज कराने पहुंची थीं। कोतवाली को अंदर से देखना उनके लिए एक अजीब अनुभव था, क्योंकि इससे पहले उनका पुलिस-प्रशासन से कोई सीधा सामना नहीं हुआ था।
“न चोरी की, न गाली दी, फिर भी FIR”
नेहा ने कहा कि उन्होंने न तो चोरी की है, न किसी को गाली दी, न चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा कोई गलत काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि न उन्होंने किसी कंपनी से चंदा लिया और न ही किसी अवैध गतिविधि में शामिल रहीं। इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर उनका अपराध क्या है।
PM से सवाल पूछना ही मेरा ‘अपराध’?
वीडियो में नेहा सिंह राठौर ने कहा कि उनका असली अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने एक आज़ाद देश के आज़ाद नागरिक के रूप में प्रधानमंत्री से सवाल पूछ लिए और सरकार की आलोचना कर दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे अपराध की तरह देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक किसान परिवार से आने वाली साधारण लड़की द्वारा प्रधानमंत्री से सवाल पूछना शायद सत्ता को असहज कर गया।
“नोटिस भेजकर औकात याद दिलाई गई”
नेहा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें नोटिस भेजकर थाने बुलाना उनकी ‘औकात’ याद दिलाने जैसा है। उन्होंने कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री से सवाल पूछने की हिम्मत शायद एक आम नागरिक को नहीं करनी चाहिए। कानून के हाथ लंबे बताए जाते हैं, लेकिन वे हर जगह समान रूप से नहीं पहुंचते।
कानून की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
नेहा सिंह राठौर ने वीडियो में कानून की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड, वीआईपी मामलों, गंदे पानी से हुई मौतों, पेपर लीक, टूटी सड़कों, रेल दुर्घटनाओं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि कई गंभीर मामलों में जिम्मेदार लोग बच निकलते हैं, लेकिन सवाल पूछने वालों पर सख्ती दिखाई जाती है।
बेरोजगारी, महंगाई और महिला अधिकारों पर बोलना भी अपराध?
नेहा ने कहा कि उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और मजदूरों के अधिकारों पर गीत और बातें रखीं, लेकिन इसे सरकारी काम में हस्तक्षेप की तरह देखा जा रहा है। महिला आयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महिलाओं के अधिकारों के लिए संस्थाएं बनी हैं, तो क्या महिलाओं की समस्याओं पर बोलना भी अपराध की श्रेणी में आ गया है।








