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UP News: युद्ध के कारण सब्जियों का एक्सपोर्ट 50% प्रभावित

UP News: युद्ध के कारण सब्जियों का एक्सपोर्ट 50% प्रभावित, उड़ानें और समुद्री मार्ग बाधित पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। उड़ानों और समुद्री मार्गों में बाधा आने के कारण खाड़ी देशों को हरी सब्जियों का निर्यात […]

UP News: युद्ध के कारण सब्जियों का एक्सपोर्ट 50% प्रभावित

UP News: युद्ध के कारण सब्जियों का एक्सपोर्ट 50% प्रभावित, उड़ानें और समुद्री मार्ग बाधित

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। उड़ानों और समुद्री मार्गों में बाधा आने के कारण खाड़ी देशों को हरी सब्जियों का निर्यात लगभग 50 फीसदी तक प्रभावित हो गया है।

निर्यात प्रभावित होने के बाद कई कारोबारियों ने अब घरेलू बाजार में ही नए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। टमाटर और हरी मटर जैसी सब्जियां अब प्रोसेसिंग कंपनियों और खाद्य उद्योग को बेची जा रही हैं।

Gulf Countries को भेजी जाती हैं ये सब्जियां

भारत से खाड़ी देशों में लौकी, हरी मिर्च, हरी मटर, परवल, भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। आमतौर पर इन सब्जियों को पहले दुबई भेजा जाता है, जहां से आगे कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में आपूर्ति की जाती है।

उड़ानें प्रभावित होने से कारोबार पर असर

आमतौर पर लौकी, हरी मिर्च, परवल, भिंडी और हरी मटर को फ्लाइट के जरिए निर्यात किया जाता है, जबकि टमाटर का निर्यात कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से किया जाता है।

हालांकि मौजूदा हालात में उड़ानों और शिपमेंट में देरी के कारण कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। टमाटर की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है और कई जगह कीमतें करीब एक रुपये प्रति किलो तक कम हो गई हैं।

घरेलू बाजार में तलाशे जा रहे नए अवसर

निर्यात में आई कमी के बाद कई कारोबारी अब केचप बनाने वाली कंपनियों को टमाटर और फ्रोजन फूड कंपनियों को हरी मटर बेच रहे हैं। इससे उन्हें घरेलू बाजार में कुछ राहत मिल रही है।

शिपमेंट में हो रही देरी से बढ़ी चिंता

निर्यात से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि कई शिपमेंट 10 से 15 दिनों तक रास्ते में फंसे हुए हैं। कुछ मामलों में माल तय समय से काफी देर बाद खरीदारों तक पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में निर्यातकों और खरीदारों दोनों को अनुबंध के अनुसार जुर्माने का जोखिम भी उठाना पड़ सकता है।

व्यापारियों को भविष्य की चिंता

निर्यात में आई इस रुकावट के कारण कारोबारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यदि युद्ध की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कृषि निर्यात और हैंडीक्राफ्ट कारोबार दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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