अयोध्या में दीपोत्सव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 7 नवंबर को रामनगरी में भव्य आयोजन की तैयारी की जा रही है। इस बार दीपोत्सव में रामायण के सातों कांडों पर आधारित 14 भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र बनेंगी। इन झांकियों के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
संस्कृति विभाग की ओर से तैयार की जा रही झांकियों में बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की घटनाओं को 3डी मॉडल के माध्यम से दिखाया जाएगा। झांकी यात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर रामकथा पार्क तक पहुंचेगी। इसमें रामायण के प्रसंगों के साथ देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
सरयू के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीप
दीपोत्सव के लिए सरयू नदी के 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। इसके साथ ही पूरी रामनगरी को रोशनी से सजाया जाएगा। घाटों, धार्मिक स्थलों और प्रमुख मार्गों पर सजावट की व्यवस्था की जा रही है।
इस आयोजन में रामायण आधारित झांकियां विशेष आकर्षण रहेंगी। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को रामकथा के प्रमुख प्रसंग देखने का अवसर मिलेगा। 3डी मॉडल के जरिए प्रसंगों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की योजना है।
बालकांड में दिखेंगे श्रीराम के जीवन के शुरुआती प्रसंग
पहली झांकी बालकांड पर आधारित होगी। इसमें पुत्रेष्टि यज्ञ, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर और श्रीराम विवाह के प्रसंग दिखाए जाएंगे। इन घटनाओं को 3डी मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
बालकांड की झांकी के साथ फरुवाही और उत्तराखंड का छोलिया नृत्य भी आकर्षण का हिस्सा होगा। दोनों लोकनृत्यों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता को भी मंच मिलेगा।
अयोध्याकांड में वनगमन और भरत मिलाप
अयोध्याकांड पर आधारित झांकी में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन का दृश्य दिखाया जाएगा। इसके साथ केवट प्रसंग और भरत मिलाप को भी शामिल किया गया है।
इस कांड के साथ अवध का ढेढिया और मध्य प्रदेश का मटकी नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। झांकी के माध्यम से रामायण के उन प्रसंगों को दिखाया जाएगा, जो त्याग, पारिवारिक संबंधों और समर्पण का संदेश देते हैं।
अरण्यकांड में सीता हरण और जटायु युद्ध
अरण्यकांड की झांकी में स्वर्ण मृग, सीता हरण, शबरी प्रसंग और जटायु-रावण युद्ध की झलक दिखाई जाएगी। ये प्रसंग रामायण की कथा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
इस झांकी के साथ धोबिया और राजस्थान का घूमर नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। लोकनृत्यों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाया जाएगा।
सुंदरकांड में दिखेगा हनुमान जी का पराक्रम
सुंदरकांड पर आधारित झांकी में हनुमान जी का लंका दहन, माता सीता से भेंट और चूड़ामणि प्रसंग दिखाया जाएगा। इन दृश्यों के माध्यम से हनुमान जी की भक्ति, साहस और श्रीराम के प्रति समर्पण को प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके साथ करमा और छाऊ नृत्य का प्रदर्शन होगा। सुंदरकांड की झांकी रामायण के उन प्रसंगों को सामने लाएगी, जिनमें हनुमान जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
किष्किंधाकांड में राम-हनुमान मिलन
किष्किंधाकांड की झांकी में भगवान श्रीराम और हनुमान जी के मिलन का दृश्य दिखाया जाएगा। इसके अलावा सुग्रीव-बालि युद्ध और सुग्रीव के राज्याभिषेक के प्रसंग भी शामिल होंगे।
इस झांकी के साथ बुंदेलखंड का राई और गुजरात का गरबा-डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इससे रामायण के प्रसंगों के साथ क्षेत्रीय लोककलाओं को भी स्थान मिलेगा।
लंकाकांड में राम-रावण युद्ध की झलक
लंकाकांड की झांकी में राम-रावण युद्ध को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। इसके साथ लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने का प्रसंग, अंगद का पैर जमाना और पुष्पक विमान से अयोध्या वापसी के दृश्य शामिल होंगे।
इस कांड के साथ ब्रज का मयूर नृत्य और असम का बीहू नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों की लोकसंस्कृति को एक मंच पर लाने की तैयारी है।
उत्तरकांड में रामराज्य और राज्याभिषेक
उत्तरकांड पर आधारित झांकी में श्रीराम के राज्याभिषेक और रामराज्य की स्थापना के प्रसंग दिखाए जाएंगे। इसके साथ भरत मिलाप का दृश्य भी प्रस्तुत किया जाएगा।
इस झांकी के साथ पश्चिमांचल का गूजरी और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य आकर्षण का हिस्सा होगा। सातों कांडों की झांकियों में अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्य शामिल किए गए हैं।
साकेत महाविद्यालय से रामकथा पार्क तक निकलेगी यात्रा
संस्कृति विभाग की ओर से तैयार की जा रही 14 झांकियों की यात्रा साकेत महाविद्यालय से शुरू होगी। इसके बाद यह रामकथा पार्क तक पहुंचेगी। यात्रा के दौरान रामायण के सातों कांडों के प्रमुख प्रसंगों का प्रदर्शन किया जाएगा।
दीपोत्सव में झांकियों के साथ लोकनृत्यों का संयोजन आयोजन को सांस्कृतिक स्वरूप देगा। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को रामायण की कथा के साथ भारत की विविध लोककलाओं को देखने का अवसर मिलेगा।
7 नवंबर को प्रस्तावित दीपोत्सव के लिए तैयारियां अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीप जलाने और रामायण आधारित 14 भव्य झांकियां निकालने की योजना है। अब आयोजन में इन सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
