बस्ती। जिले में अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। मुंडेरवा स्थित लाइसेंसी कम्पोजिट शराब की दुकान पर पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त छापेमारी में विभिन्न ब्रांडों की अंग्रेजी शराब में पानी मिलाए जाने का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान टीम को कई ब्रांडों के अद्धे और पौवे मिले। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान शराब बिक्री से प्राप्त 30,020 रुपये नकद भी बरामद किए गए।
इस घटना ने जिले में शराब की दुकानों की निगरानी और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर ग्राहक लाइसेंसी दुकान से खरीदी गई शराब को असली और सुरक्षित मानते हैं। लेकिन मुंडेरवा की दुकान पर मिली जलमिश्रित शराब ने इस भरोसे को चुनौती दी है। अब सवाल उठ रहा है कि यदि लाइसेंसी दुकान पर ही शराब में मिलावट हो रही है, तो ग्राहकों की सुरक्षा और गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
लाइसेंसी दुकान पर मिली मिलावटी शराब
मुंडेरवा में संचालित कम्पोजिट शराब की दुकान पर हुई छापेमारी के दौरान टीम ने विभिन्न ब्रांडों की शराब की जांच की। इस दौरान 8 पीएम, रॉयल स्टैग, आइकॉनिक और आफ्टर डार्क सहित कई ब्रांडों के अद्धे और पौवे बरामद किए गए। जांच में इन बोतलों में पानी मिश्रित शराब पाए जाने की बात सामने आई।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि संबंधित दुकान लाइसेंसी बताई गई है। लाइसेंसी दुकानों पर शराब की बिक्री निर्धारित नियमों और विभागीय निगरानी के तहत होनी चाहिए। इसके बावजूद वहां जलमिश्रित शराब मिलने से दुकान के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
संयुक्त टीम ने बरामद शराब को नमूने के रूप में सील किया। इसके बाद उसे सर्वमुहर के साथ कब्जे में लिया गया। नमूने सील किए जाने की कार्रवाई आगे की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे बरामद शराब की गुणवत्ता और उसमें मिलावट की स्थिति की जांच की जा सकेगी।
दो आरोपी गिरफ्तार, नकदी भी बरामद
पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान गोल्डन जायसवाल और शिवम को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी बलरामपुर जनपद के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने दुकान से शराब की बिक्री के दौरान प्राप्त 30,020 रुपये नकद भी बरामद किए।
यह कार्रवाई 29 अक्टूबर को की गई थी। मुंडेरवा के थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय और आबकारी निरीक्षक सुनील कुमार ने आबकारी टीम के साथ संयुक्त रूप से छापेमारी की। टीम ने दुकान का निरीक्षण किया और वहां रखी शराब की जांच की। इसी दौरान विभिन्न ब्रांडों के अद्धे और पौवों में पानी मिश्रित शराब मिलने का मामला सामने आया।
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बरामद शराब और नकदी को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, मिलावट की मात्रा, शराब में पानी मिलाने की प्रक्रिया और इस काम में अन्य लोगों की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कच्ची शराब के कारोबार पर भी उठे सवाल
मुंडेरवा की घटना ने जिले में अवैध शराब के दूसरे कारोबारों की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय स्तर पर कच्ची शराब के निष्कर्षण और बिक्री को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि पहले माझा क्षेत्र में इस तरह का कारोबार अधिक सक्रिय था। अब जिले की सीमावर्ती नदियों के किनारे भी अवैध शराब बनाने और बेचने की गतिविधियां बढ़ने की बात कही जा रही है।
स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि गोंडा जनपद की ओर से कच्ची शराब की खेप जिले में पहुंच रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इनकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित क्षेत्रों में जांच और कार्रवाई जरूरी है।
कच्ची शराब का अवैध कारोबार पहले से ही प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में लाइसेंसी दुकान पर जलमिश्रित शराब मिलने की घटना ने चिंता और बढ़ा दी है। सवाल केवल अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है। मामला उन दुकानों की निगरानी से भी जुड़ा है, जिन्हें नियमों के तहत कारोबार करने की अनुमति दी गई है।
आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
इस प्रकरण के सामने आने के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लाइसेंसी दुकानों का नियमित निरीक्षण, शराब की गुणवत्ता की जांच और बिक्री के नियमों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में दुकान पर मिलावट मिलने से यह जानना जरूरी हो गया है कि पहले किए गए निरीक्षणों में इस गड़बड़ी का पता क्यों नहीं चला।
स्थानीय स्तर पर विभागीय मिलीभगत और कथित सेटिंग के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अभी स्थापित नहीं है। इसलिए इस मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
यह भी जांच का विषय है कि दुकान पर मिलावटी शराब कब से बेची जा रही थी। कितने ग्राहकों तक ऐसी शराब पहुंची? क्या केवल बरामद अद्धों और पौवों में ही मिलावट थी या अन्य बोतलें भी प्रभावित थीं? इन सवालों के जवाब जांच और नमूनों की रिपोर्ट से ही मिल सकते हैं।
ग्राहकों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
शराब में पानी मिलाना केवल ग्राहकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है। इससे शराब की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मौजूद पदार्थों को लेकर भी अनिश्चितता पैदा होती है। ग्राहक ब्रांड और निर्धारित कीमत के आधार पर शराब खरीदते हैं। ऐसे में बोतल के अंदर मौजूद सामग्री अलग निकलना गंभीर अनियमितता है।
इस घटना के बाद मुंडेरवा और आसपास के क्षेत्रों में शराब की दुकानों की जांच की मांग उठ सकती है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि लाइसेंसी दुकानों पर बिकने वाली शराब की गुणवत्ता की नियमित जांच हो। साथ ही, शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई भी की जाए।
मुंडेरवा की छापेमारी में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और नकदी की बरामदगी कार्रवाई का अहम हिस्सा है। लेकिन इस मामले की पूरी तस्वीर तभी सामने आएगी, जब बरामद शराब के नमूनों की जांच होगी। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना होगा कि मिलावट के पीछे कौन लोग थे और दुकान की निगरानी में कोई चूक हुई या नहीं।
फिलहाल, मुंडेरवा की लाइसेंसी दुकान पर जलमिश्रित अंग्रेजी शराब मिलने की घटना ने बस्ती में शराब बिक्री की व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। अब निगाहें पुलिस जांच और आबकारी विभाग की आगे की कार्रवाई पर हैं।