- इस वर्ष अयोध्या में होने वाले दसवें दिव्य दीपोत्सव के मेहमान बनेंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- ये मैसेज देने की कोशिश है कि शाह व योगी के बीच कोई मतभेद नहीं, सारी बातें हवा हवाई हैं
अभयानंद शुक्ल
लखनऊ। राजधानी में बीते 30 अक्टूबर को हुई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा और उनकी बैठकें इस बात का सीधा संकेत हैं कि अब वे उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इसे ये भी कह सकते हैं कि उन्होंने यूपी की चुनावी बागडोर संभाल ली है। उनका हालिया लखनऊ दौरा इस बात का भी संकेत है कि योगी और उनके बीच मतभेद की जो खबरें सोशल मीडिया पर और राजनीतिक गलियारों में चल रही थीं, वे सब हवा हवाई हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि इस बार अयोध्या के दसवें दिव्य दीपोत्सव के मेहमान अमित शाह ही होंगे। सूत्रों का कहना है कि इसपर अनौपचारिक सहमति हो गई है और औपचारिक निमंत्रण जल्द ही दिया जाएगा। यानी अंगद के पांव को जमाने के लिए फिर आ रहे हैं अमित शाह।
बीते 30 अक्टूबर को आए अमित शाह का खुलेआम ये कहना कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अंगद का वह पांव है, जो जम चुका है। उसे उखाड़ना किसी के बूते की बात नहीं है। यानी शाह के इरादे पूरी तरह योगी को तीसरी बार भी मुख्यमंत्री बनाने वाले ही दिख दे रहे हैं। इस बार जिस तरह की केमिस्ट्री गृहमंत्री और सीएम के बीच दिखी, वो इस बात का सबूत है कि यदि कभी कोई गिला शिकवा रहा होगा, तो वह भी दूर हो गया है। और बताते हैं कि इसी बाइंडिंग को दिखाने और मैसेजिंग के लिए इस बार अयोध्या में दसवें दिव्य दीपोत्सव के सरकारी मेहमान के तौर पर भी अमित शाह का आगमन संभव है। सूत्रों का दावा है कि शाह का आना तय है, बस औपचारिकता बाकी है। इसी क्रम में ये भी बताया जा रहा है कि योगी कल 2 नवंबर को अयोध्या में तैयारियों का जायजा लेने के लिए जाएंगे। चूंकि अमित शाह हाई सिक्योरिटी वाले नेता हैं, इसलिए सिक्योरिटी के पहलुओं की भी समीक्षा सीएम करेंगे। वैसे भाजपा ने अभी तक औपचारिक तौर पर ऐसा कुछ भी नहीं बताया है, किंतु सूत्रों का दावा है कि इसकी तैयारी चल रही है।
उधर जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा के 2027 के चुनावों की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे सूबे में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। धीरे-धीरे सियासी गुटों की पिक्चर भी क्लियर होती जा रही है। और बताते हैं कि ये अमित शाह के बिछाए शतरंज की बिसात का ही कमाल है कि अब ये लगभग तय हो गया है कि असदुद्दीन ओवैसी इंडी गठबंधन में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। और खबर तो ये भी है कि ओवैसी की राह आसान करने के लिए ही सपा के कद्दावर मुस्लिम चेहरे आज़म खां को रिहाई के पहले ही फिर गिरफ्तार कर लिया गया है, ताकि वे बाहर आकर ओवैसी का बना-बनाया खेल न बिगाड़ दें। यानी उन्होंने अब तक सपा के खिलाफ जो माहौल बना कर रखा है, वह खराब न हो। और इसीलिए शायद 31 को जब आजम खां रामपुर जेल से रिहा होने वाले थे, उसी वक्त इडी ने उन्हें एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस चुनावी मौसम में उनकी फिर गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि ये कच्ची गिरफ्तारी नहीं, क्योंकि जरा भी आजम खां के छूटने की गुंजाइश होती तो भाजपा उनकी फिर गिरफ्तारी का रिस्क नहीं लेती। यानी अब आशंका यही है कि विधानसभा चुनाव तक आजम खां को जेल में ही रहना होगा ताकि ओवैसी की राह आसान रहे। सभी जानते हैं कि ओवैसी की मजबूती का मतलब, उत्तर प्रदेश में बिहार पार्ट दो ही है। यानी चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के लिए चालें चलनी शुरू कर दी हैं।