अयोध्या में आगामी 7 नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि परिसर एक लाख दीपों की रोशनी से जगमगाएगा। दीपोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। दीप प्रज्ज्वलन और व्यवस्थाओं के संचालन के लिए करीब एक हजार कार्यकर्ता सेवा देंगे। पूरे परिसर को पांच जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
दीपोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) के सभागार में बैठक हुई। इसमें दीप प्रज्ज्वलन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। बैठक में कार्यकर्ताओं को उनके निर्धारित क्षेत्रों और जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई। मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में दीपों की व्यवस्था किस तरह होगी, इसकी योजना भी तय की गई।
पांच जोन में बांटा गया श्रीरामजन्मभूमि परिसर
श्रीरामजन्मभूमि परिसर को व्यवस्थित तरीके से दीपों से सजाने के लिए पांच जोन बनाए गए हैं। प्रत्येक जोन में दीप प्रज्ज्वलन के लिए कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पूरे परिसर में निर्धारित संख्या के अनुसार दीप जलाना और आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराना है।
जोन एक में श्रीरामलला मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यहां 30 हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इस जोन की जिम्मेदारी आचार्य केशव जी को सौंपी गई है। मंदिर परिसर का यह हिस्सा दीपोत्सव का प्रमुख केंद्र रहेगा।
जोन दो में कुबेर टीला, सप्तमंडप, शेषावतार मंदिर, हुतात्मा स्मारक और पंचवटी को शामिल किया गया है। इन स्थानों पर भी 30 हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे। इन सभी क्षेत्रों में दीपों की व्यवस्था और प्रज्ज्वलन के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
जोन तीन और चार में भी होगी विशेष सजावट
जोन तीन के अंतर्गत वापसी दर्शन मार्ग, यात्री सुविधा केंद्र, पीएफसी प्लाजा और नल टीला को रखा गया है। इस क्षेत्र में 14 हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इन स्थानों पर दीपों की सजावट के साथ निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कार्यकर्ता सेवा देंगे।
वहीं, जोन चार में यात्री सेवा केंद्र, अंगद टीला, सीता रसोई और रामानंदाचार्य द्वार को शामिल किया गया है। यहां 13 हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे। इन क्षेत्रों में भी दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।
जोन पांच में श्रीरामजन्मभूमि पथ, दर्शन मार्ग, सिंह द्वार और चरण पादुका क्षेत्र शामिल हैं। यहां 13 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इस जोन में दीपोत्सव की व्यवस्थाओं के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का भी सहयोग रहेगा।
करीब एक हजार कार्यकर्ता संभालेंगे जिम्मेदारी
दीपोत्सव के आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए करीब एक हजार कार्यकर्ताओं को सेवा में लगाया जाएगा। इन कार्यकर्ताओं को परिसर के पांचों जोन में अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। दीपों की तैयारी, स्थानों पर व्यवस्था और प्रज्ज्वलन से जुड़े काम इन्हीं के माध्यम से पूरे किए जाएंगे।
बैठक में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त), सचिव जगदीश आफले और जगन्नाथ गुलवे ने कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी को अपने निर्धारित क्षेत्रों में जिम्मेदारी के साथ काम पूरा करने की जानकारी दी।
बैठक में तैयारियों को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया। आयोजन के दौरान परिसर के प्रत्येक निर्धारित हिस्से में दीप प्रज्ज्वलन सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियों का विभाजन किया गया है।
अगले पांच दिनों में पूरा होगा परिसर का अलंकरण
दीपोत्सव से पहले श्रीरामजन्मभूमि परिसर के शेष हिस्सों को सजाने का काम भी पूरा किया जाएगा। ट्रस्ट की ओर से अगले पांच दिनों में परिसर के बाकी हिस्सों का अलंकरण और दीप प्रज्ज्वलन से जुड़ी तैयारियां पूरी करने की योजना बनाई गई है।
एक लाख दीपों के आयोजन के लिए पांच जोन में बनाई गई व्यवस्था के तहत निर्धारित स्थानों पर दीप जलाए जाएंगे। इससे मंदिर परिसर के प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थलों को दीपों से सजाया जाएगा।
अयोध्या में 7 नवंबर को होने वाला यह आयोजन श्रीरामजन्मभूमि परिसर के लिए विशेष होगा। करीब एक हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी और पांच जोन में तैयार की गई कार्ययोजना के साथ तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। अब अगले पांच दिनों में सजावट और दीप प्रज्ज्वलन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
