अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में शनिवार को तमिलनाडु दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और व्याख्यान का आयोजन किया गया। श्रीराम शोध पीठ में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और कला को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अयोध्या और तमिलनाडु के बीच प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए इसे भारतीय एकता और साझा विरासत का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह और मुख्य अतिथि कांची मठ, अयोध्या के रामचन्द्र आचार्य ने प्रभु श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने तमिलनाडु की कला, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के साथ भारतीय संस्कृति में विभिन्न क्षेत्रों की साझी भूमिका का संदेश दिया।
तमिलनाडु दिवस के आयोजन के दौरान छात्र-छात्राओं की ओर से प्रस्तुत कार्यक्रमों में तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान की अलग-अलग झलक देखने को मिली। वैभवी तिवारी और जूही सिंह ने तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर वक्तव्य प्रस्तुत किया। दोनों विद्यार्थियों ने तमिलनाडु की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति में दक्षिण भारत की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भरतनाट्यम की प्रस्तुति रही। शताक्षी, निशा, माही और दीविता ने भरतनाट्यम प्रस्तुत कर दर्शकों की सराहना हासिल की। शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने तमिलनाडु की कला परंपरा की झलक पेश की। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
इसके अलावा विद्यार्थियों ने तमिलनाडु की पारंपरिक वेशभूषा पर आधारित फैशन शो भी प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में तमिलनाडु की पारंपरिक पोशाक और सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों ने अलग-अलग प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि किसी क्षेत्र की संस्कृति केवल उसकी भाषा या पहनावे तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें कला, साहित्य, परंपराएं, धार्मिक मान्यताएं और सामाजिक जीवन भी शामिल होते हैं।
तमिलनाडु की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से तमिलनाडु के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर दिया।
रामायणकालीन विरासत से जुड़े हैं अयोध्या-तमिलनाडु के संबंध
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अयोध्या और तमिलनाडु के बीच संबंध केवल भौगोलिक या सांस्कृतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। इन संबंधों की जड़ें भारतीय सभ्यता और रामायणकालीन विरासत से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों की परंपराओं में भगवान श्रीराम से जुड़ी आस्था और सांस्कृतिक संदर्भ एक साझा सूत्र के रूप में दिखाई देते हैं।
कुलपति ने कहा कि तमिलनाडु की साहित्यिक, सांस्कृतिक और भक्ति परंपरा ने भारतीय संस्कृति को विशिष्ट पहचान देने में महत्वपूर्ण योगदान किया है। दक्षिण भारत की समृद्ध धार्मिक और साहित्यिक परंपराओं ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्वरूप प्रदान किया है।
उन्होंने भगवान श्रीराम और रामेश्वरम की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उत्तर और दक्षिण भारत को एक आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ती है। उनके अनुसार अयोध्या और तमिलनाडु के बीच रामायण, रामभक्ति, मंदिर परंपरा, संगीत और साहित्य के माध्यम से लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।
डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि तमिलनाडु दिवस केवल किसी एक राज्य की संस्कृति को जानने का अवसर नहीं है, बल्कि भारत की विविधता में एकता की भावना को समझने का भी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश के विभिन्न हिस्सों की भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करने की अपील की।
कुलपति ने कहा कि भारत की विशेषता उसकी सांस्कृतिक विविधता में निहित है। अलग-अलग भाषाओं, खान-पान, पहनावे, कला और परंपराओं के बावजूद देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को इन संबंधों को समझने और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
कांची मठ के रामचन्द्र आचार्य ने भी साझा विरासत पर दिया जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांची मठ, अयोध्या के रामचन्द्र आचार्य ने भी अयोध्या और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की परंपरा दोनों क्षेत्रों को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है।
रामचन्द्र आचार्य ने कहा कि तमिलनाडु की साहित्यिक, धार्मिक और भक्ति परंपरा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। दक्षिण भारत की इन परंपराओं का प्रभाव भारतीय सांस्कृतिक जीवन के व्यापक स्वरूप में दिखाई देता है।
उन्होंने तमिलनाडु दिवस को विविधता में एकता और राष्ट्रीय सांस्कृतिक समन्वय की भावना को मजबूत करने वाला अवसर बताया। उनके अनुसार भारत की सांस्कृतिक पहचान अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं के आपसी जुड़ाव से और समृद्ध होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को देश की साझा विरासत को समझने और उसका सम्मान करने का अवसर मिलता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश
अवध विश्वविद्यालय में आयोजित तमिलनाडु दिवस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया। विद्यार्थियों ने नृत्य, वक्तव्य, पारंपरिक वेशभूषा और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से तमिलनाडु की पहचान को सामने रखा। इससे विश्वविद्यालय परिसर में देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी दिया गया।
भरतनाट्यम की प्रस्तुति के साथ पारंपरिक वेशभूषा पर आधारित फैशन शो ने तमिलनाडु की कला और परंपरा की अलग-अलग तस्वीर प्रस्तुत की। वहीं डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को राज्य की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति की व्यापकता को समझने के लिए अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की स्थानीय परंपराओं को जानना जरूरी है। तमिलनाडु दिवस जैसे आयोजन विद्यार्थियों को देश के अन्य हिस्सों की संस्कृति को करीब से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
अतिथियों का किया गया स्वागत
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम भेंटकर किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन छात्र अभय प्रताप सिंह और छात्रा जूही सिंह ने किया।
आयोजन में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. एसके रायजादा, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. शैलेन्द्र वर्मा, डॉ. अवध नारायण, डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. महेन्द्र पाल सिंह, डॉ. शांभवी मुद्रा शुक्ला, क्षितिज द्विवेदी, रत्नेश यादव और आशीष मिश्रा सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अवध विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ अयोध्या और दक्षिण भारत के बीच साझा सांस्कृतिक संबंधों पर संवाद का अवसर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए भारतीय परंपराओं की विविधता और उनके बीच मौजूद ऐतिहासिक जुड़ाव को सामने रखा गया।
