• Home  
  • ₹10-20 के पॉलिमर नोट पर बड़ा अपडेट
- india

₹10-20 के पॉलिमर नोट पर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। ₹10 और ₹20 के नोट को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रस्तावित पॉलिमर करेंसी योजना अब एक कदम आगे बढ़ती दिख रही है। सरकार पहले ही इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। प्रस्ताव के तहत ₹10 के 100 करोड़ और ₹20 के 100 करोड़ […]

₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोट का ट्रायल

नई दिल्ली। ₹10 और ₹20 के नोट को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रस्तावित पॉलिमर करेंसी योजना अब एक कदम आगे बढ़ती दिख रही है। सरकार पहले ही इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। प्रस्ताव के तहत ₹10 के 100 करोड़ और ₹20 के 100 करोड़ पॉलिमर नोटों का परीक्षण किया जाना है। यानी पायलट प्रोजेक्ट में कुल 200 करोड़ पॉलिमर नोट शामिल होंगे।

सबसे अहम बात यह है कि पॉलिमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोटों को कागज आधारित मौजूदा नोटों के साथ ही चलाने का प्रस्ताव है। फिलहाल यह एक फील्ड ट्रायल है और व्यापक स्तर पर इन्हें जारी करने का फैसला ट्रायल के नतीजों के बाद लिया जाएगा।

मौजूदा नोटों के बराबर रह सकता है आकार

अब इस प्रस्ताव से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक RBI प्रस्तावित पॉलिमर ₹10 और ₹20 नोटों के आकार को मौजूदा नोटों के समान रखने की तैयारी कर रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा बैंकों और एटीएम व्यवस्था को हो सकता है।

Moneycontrol की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा आयाम बरकरार रखने से बैंकों को एटीएम की कैश-कैसेट, सेंसर और मशीनों की सेटिंग में बड़े बदलाव कराने की जरूरत कम होगी। इससे नई करेंसी के परीक्षण के दौरान अतिरिक्त परिचालन लागत से बचने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, नोटों के आकार को मौजूदा नोटों जैसा रखने की जानकारी अभी मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित है। RBI की ओर से इस संबंध में अंतिम आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित पायलट की जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

₹10 और ₹20 ही क्यों चुने गए?

₹10 और ₹20 के नोट रोजमर्रा के छोटे-बड़े लेनदेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मूल्यवर्गों में शामिल हैं। इनका हाथों-हाथ तेजी से इस्तेमाल होने के कारण कागजी नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब, गंदे या फटने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

इसी वजह से कम मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पॉलिमर तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पॉलिमर नोटों की उम्र कागजी नोटों की तुलना में काफी अधिक पाई गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ₹10 और ₹20 के नोट संख्या के लिहाज से चलन में मौजूद कुल नोटों का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं, हालांकि कुल मुद्रा मूल्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 1.3 प्रतिशत है। बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने के कारण इन्हें पॉलिमर करेंसी के प्रदर्शन का परीक्षण करने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

कुल 200 करोड़ नोटों का होगा फील्ड ट्रायल

RBI की योजना के तहत ₹10 के एक अरब यानी 100 करोड़ और ₹20 के एक अरब यानी 100 करोड़ पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल प्रस्तावित है। दोनों मूल्यवर्ग को मिलाकर 200 करोड़ नोट परीक्षण के लिए तैयार किए जाएंगे।

इन नोटों की कुल फेस वैल्यू करीब ₹3,000 करोड़ होगी। हालांकि यह पूरी राशि किसी नए मुद्रा मूल्य के रूप में अर्थव्यवस्था में अलग से जोड़ने का अर्थ नहीं है, क्योंकि पायलट का उद्देश्य नए सब्सट्रेट वाले नोटों की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगिता और टिकाऊपन का आकलन करना है।

परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि पॉलिमर नोट भारतीय मौसम, रोजमर्रा के इस्तेमाल, लोगों की हैंडलिंग और बैंकिंग सिस्टम के साथ किस तरह काम करते हैं। इसके अलावा नोटों की सुरक्षा, स्वीकार्यता और संचालन से जुड़े पहलुओं का भी आकलन किया जाएगा।

कागजी नोट बंद नहीं होंगे

पॉलिमर करेंसी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या इसके आने के बाद कागजी ₹10 और ₹20 के नोट बंद कर दिए जाएंगे। फिलहाल इसका जवाब नहीं है।

सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोटों को मौजूदा पेपर सब्सट्रेट वाले नोटों के साथ जारी करने का प्रस्ताव है। यानी पायलट के दौरान लोगों के पास कागजी और पॉलिमर दोनों तरह के ₹10 और ₹20 के नोट हो सकते हैं। कागजी नोटों को तत्काल हटाने या उनकी जगह पूरी तरह पॉलिमर नोट लाने का कोई प्रस्ताव नहीं बताया गया है।

इसलिए सोशल मीडिया पर अगर यह दावा किया जाए कि ₹10 या ₹20 के पुराने कागजी नोट जल्द ही अमान्य हो जाएंगे, तो उसे सही नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी ऐसी किसी व्यवस्था की पुष्टि नहीं करती।

पॉलिमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

पॉलिमर बैंकनोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाला विशेष पॉलिमर सब्सट्रेट पानी और गंदगी के प्रभाव को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से झेल सकता है। कम मूल्यवर्ग के नोटों में यह खासियत महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि ऐसे नोट लगातार हाथ बदलते हैं।

लंबी उम्र का मतलब यह भी हो सकता है कि खराब हुए नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़े। इससे लंबे समय में नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन से जुड़े खर्च पर असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक बचत कितनी होगी, यह भारत में होने वाले फील्ड ट्रायल और उसके बाद के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।

पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल करने की भी क्षमता होती है। पारदर्शी विंडो और अन्य विशेष सुरक्षा तत्व नकली नोट बनाने की कोशिशों को कठिन बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि भारत के प्रस्तावित नोटों में कौन-कौन से सुरक्षा फीचर होंगे, इसकी अंतिम जानकारी आधिकारिक डिजाइन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

2027 में शुरू हो सकता है पायलट

पॉलिमर करेंसी के फील्ड ट्रायल को लेकर अभी कोई अंतिम व्यापक लॉन्च तारीख घोषित नहीं की गई है। हालांकि 30 अक्टूबर की Moneycontrol रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पायलट की शुरुआत 1 अप्रैल 2027 से होने की संभावना है। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि पॉलिमर सब्सट्रेट की खरीद के लिए छह बोलियां प्राप्त हुई हैं।

31 अक्टूबर की Mint रिपोर्ट ने भी संभावित पायलट के लिए 1 अप्रैल 2027 की तारीख का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार इस परीक्षण का उद्देश्य नोटों की टिकाऊ क्षमता, लोगों की स्वीकार्यता और परिचालन संबंधी व्यवहार्यता का आकलन करना है।

हालांकि यह तारीख अभी अंतिम आधिकारिक लॉन्च डेट के रूप में नहीं बताई गई है। इसलिए इसे संभावित समयसीमा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

RBI पहले भी कर चुका है कोशिश

भारत में पॉलिमर नोटों का विचार नया नहीं है। इससे पहले भी RBI ने पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की कोशिश की थी। 2009 में ₹10 के पॉलिमर नोटों के परीक्षण के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रस्तावित परीक्षण में अलग-अलग जलवायु वाले शहरों को शामिल किया जाना था, ताकि नोटों की टिकाऊ क्षमता और उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

हालांकि वह प्रयास आगे नहीं बढ़ पाया। अब करीब डेढ़ दशक बाद कम मूल्यवर्ग के ₹10 और ₹20 नोटों के जरिए पॉलिमर करेंसी के परीक्षण की योजना दोबारा सामने आई है।

इस बार RBI और सरकार का जोर व्यापक फील्ड ट्रायल पर है, ताकि भारत जैसे बड़े और विविध जलवायु वाले देश में पॉलिमर नोटों की वास्तविक उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

बैंकों और एटीएम सिस्टम पर क्या असर होगा?

यदि पॉलिमर नोटों का आकार मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोटों के समान रखा जाता है तो बैंकिंग सिस्टम को इसका सीधा फायदा हो सकता है। नए आकार के नोटों के लिए एटीएम में कैश-कैसेट और सेंसर से जुड़ी सेटिंग बदलनी पड़ सकती है, जिससे अतिरिक्त खर्च आता है।

Moneycontrol के अनुसार पुराने आयाम बरकरार रखने से इस तरह के शुरुआती खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि पायलट के दौरान नोटों का वितरण किस तरीके से होगा और एटीएम में इनका इस्तेमाल किस स्तर पर किया जाएगा, यह RBI की अंतिम परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब यह भी है कि अगर पॉलिमर नोटों का आकार मौजूदा नोटों जैसा ही रहता है तो आम लोगों को केवल सामग्री में बदलाव महसूस होगा, नोट के भौतिक आकार में नहीं।

अभी इसे ‘नोट बदलने’ का फैसला न समझें

पॉलिमर नोटों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आ सकते हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा जानकारी को फील्ड ट्रायल के संदर्भ में समझा जाए। सरकार ने पॉलिमर ₹10 और ₹20 नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी है, लेकिन कागजी नोटों को हटाने का फैसला नहीं किया गया है।

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त में भी संकेत दिया था कि पॉलिमर नोटों के व्यापक इस्तेमाल से पहले उनका परीक्षण किया जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। RBI ने यह भी बताया है कि पॉलिमर नोटों की उम्र कागजी नोटों से अधिक हो सकती है, लेकिन भारत की परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन का आकलन जरूरी है।

फिलहाल तस्वीर यह है कि ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों का पायलट आगे बढ़ रहा है, 100-100 करोड़ नोटों के परीक्षण की मंजूरी है और इनके मौजूदा आकार को बनाए रखने की संभावना सामने आई है। लेकिन इन नोटों का नियमित और बड़े पैमाने पर प्रचलन तभी तय होगा जब फील्ड ट्रायल के नतीजे संतोषजनक पाए जाएंगे।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About Us

We are a trusted news portal delivering the latest updates, breaking news, and in-depth stories from around the world. Our goal is to keep you informed, every time.

 

Address : 18/587, behind : Hanuman Mandir, opposite :Lucknow, Uttar Pradesh, India , 226016

Email Us: up24networkk@gmail.com

Contact: +91 95111 50055

Quick Link

Top Categories

UP24Network. All Rights Reserved.