“उत्तर प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक परिषदीय शिक्षकों की नियुक्ति और डिग्री की जांच होगी। हाईकोर्ट के आदेश पर शिक्षकों को एक सप्ताह में प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। STF दस्तावेजों का सत्यापन करेगी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर उनकी शैक्षिक योग्यता तक की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को भी शामिल किया गया है। शिक्षकों के नियुक्ति पत्र, शैक्षिक प्रमाणपत्र और भर्ती के समय निर्धारित योग्यता का सत्यापन कराया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश जारी किए हैं। शिक्षकों को अपने शैक्षिक दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां संबंधित बीएसए कार्यालय में जमा करनी होंगी। निर्देश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में हुई कथित अनियमित, नियम विरुद्ध और फर्जी नियुक्तियों की जांच करना है। जांच में नियुक्ति प्रक्रिया के साथ-साथ प्रमाणपत्रों की वास्तविकता और निर्धारित शैक्षिक योग्यता का भी मिलान किया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई शिक्षकों की जांच
बेसिक शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
यह मामला कुसुमलता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित है। परिषदीय विद्यालयों में कथित तौर पर अनियमित और नियमों के विरुद्ध हुई नियुक्तियों के मामले में न्यायालय के निर्देश के बाद अब प्रदेशव्यापी स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस आदेश के तहत कक्षा एक से आठ तक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड और शैक्षिक योग्यताओं की जांच होगी।
हाईस्कूल से लेकर B.Ed, BTC और TET तक के प्रमाणपत्र देने होंगे
जांच के दायरे में आने वाले शिक्षकों को अपनी शैक्षिक योग्यता से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां जमा करनी होंगी। इसमें केवल अंतिम डिग्री ही नहीं, बल्कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए सभी जरूरी प्रमाणपत्र शामिल होंगे।
शिक्षकों से निम्नलिखित दस्तावेज मांगे गए हैं:
- नियुक्ति पत्र और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज।
- हाईस्कूल का प्रमाणपत्र और अंकपत्र।
- इंटरमीडिएट का प्रमाणपत्र और अंकपत्र।
- स्नातक की डिग्री और अंकपत्र।
- बीएड या बीटीसी से संबंधित प्रमाणपत्र।
- टीईटी या सीटीईटी का प्रमाणपत्र।
- नियुक्ति के समय निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता से जुड़े अन्य दस्तावेज।
इन सभी प्रमाणपत्रों का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। जांच में यह भी देखा जाएगा कि शिक्षक ने नियुक्ति के समय भर्ती नियमों के अनुसार आवश्यक योग्यता पूरी की थी या नहीं।
शिक्षकों को देना होगा परिवार के सदस्यों से जुड़ा शपथपत्र
इस सत्यापन प्रक्रिया में शिक्षकों से केवल शैक्षिक प्रमाणपत्र ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।
शिक्षकों को नोटरी से सत्यापित शपथपत्र जमा करना होगा। इसमें उन्हें बताना होगा कि उनके परिवार का कोई सदस्य उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में बीएसए या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत है अथवा पहले रहा है।
शपथपत्र में पति-पत्नी, पिता, पुत्र, पुत्री, दामाद, पुत्रवधू, सास-ससुर, साले, बहनोई, साली और ननद सहित निर्धारित रिश्तेदारों का विवरण देना होगा। इसके अलावा प्रथम श्रेणी के चचेरे, ममेरे, फुफेरे और मौसेरे भाई-बहनों की जानकारी भी देनी होगी।
यदि शिक्षक का ऐसा कोई रिश्तेदार नहीं है, तो उन्हें शपथपत्र में इसकी स्पष्ट घोषणा करनी होगी। इस जानकारी के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया में संभावित हितों के टकराव और अनियमितताओं की पड़ताल की जाएगी।
STF के 18 रेंज कार्यालयों में भेजे जाएंगे शिक्षकों के दस्तावेज
शिक्षकों से दस्तावेज एकत्र करने के बाद सत्यापन की अगली जिम्मेदारी विशेष कार्यबल यानी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को दी जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों के माध्यम से शिक्षकों के दस्तावेज एकत्र कराएंगे। इसके बाद प्रत्येक शिक्षक का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इस रिकॉर्ड में प्रमुख रूप से निम्न जानकारियां शामिल होंगी:
- शिक्षक की नियुक्ति की तारीख।
- नियुक्ति के समय प्राप्त शैक्षिक योग्यता।
- भर्ती के समय निर्धारित न्यूनतम योग्यता।
- संबंधित राजपत्र और नियमों के अनुसार प्राप्त मेरिट।
- नियुक्ति से जुड़े अन्य आवश्यक विवरण।
इन सभी जानकारियों की एक्सेल शीट तैयार की जाएगी। इसके साथ शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्र और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज STF के संबंधित रेंज कार्यालयों को भेजे जाएंगे।
प्रदेश में STF के 18 रेंज कार्यालय हैं। इसके अलावा सात पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों की मदद भी जरूरत के अनुसार ली जा सकेगी।
BSA से लेकर पुलिस आयुक्त तक की तय होगी जिम्मेदारी
शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
जिला स्तर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और मंडल स्तर पर सहायक शिक्षा निदेशक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। दस्तावेजों के सत्यापन में जरूरत पड़ने पर पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त की सहायता ली जा सकेगी।
इस पूरी कार्रवाई के लिए सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को प्रदेश स्तर का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें जांच और दस्तावेजों की प्रगति से संबंधित नियमित जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।
4 नवंबर को हाईकोर्ट में देनी है अनुपालन रिपोर्ट
इस मामले में समयसीमा भी महत्वपूर्ण है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग के सामने निर्धारित समय के भीतर दस्तावेज एकत्र करने, उनका रिकॉर्ड तैयार करने और सत्यापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती है।
शिक्षकों को निर्देश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर अपने प्रमाणपत्र बीएसए कार्यालय में जमा करने होंगे। इसके बाद संबंधित दस्तावेज STF के पास भेजे जाएंगे।
फर्जी नियुक्तियों पर कार्रवाई की तैयारी, शिक्षकों के रिकॉर्ड की होगी पड़ताल
उत्तर प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक परिषदीय शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षिक योग्यता की जांच को शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। इस प्रक्रिया से उन नियुक्तियों की भी पड़ताल हो सकेगी, जिनमें प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता, भर्ती की पात्रता या चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं।
हालांकि, जांच के दायरे में आने का मतलब यह नहीं है कि सभी संबंधित शिक्षक संदिग्ध या दोषी हैं। यह दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया है। किसी शिक्षक के खिलाफ अनियमितता की पुष्टि संबंधित प्रमाणपत्रों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बीएसए कार्यालयों में दस्तावेज जमा होने के बाद STF की जांच किस गति से आगे बढ़ती है और हाईकोर्ट में चार नवंबर को क्या अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है।
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