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यूपी टीईटी-2026 के दो सवाल मूल्यांकन से बाहर, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया आदेश

“UP TET-2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। अब 148 प्रश्नों के आधार पर पात्रता तय होगी और समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों के अंकों की पुनर्गणना होगी।“ प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET)-2026 में शामिल अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट […]

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“UP TET-2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। अब 148 प्रश्नों के आधार पर पात्रता तय होगी और समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों के अंकों की पुनर्गणना होगी।“

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET)-2026 में शामिल अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने परीक्षा के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। इन दोनों सवालों के अंतिम उत्तर में दो-दो विकल्प सही माने गए थे। कोर्ट के फैसले के बाद अब परीक्षा का मूल्यांकन 150 के बजाय 148 प्रश्नों के आधार पर किया जाएगा।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कानपुर नगर के विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का लाभ केवल याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को इसका फायदा मिलेगा। इसके तहत उनके अंकों की पुनर्गणना कर परिणाम और स्कोरकार्ड में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

प्रश्न 36 और 37 को लेकर क्यों उठे थे सवाल?

याचिकाकर्ताओं ने तीन जुलाई 2026 को दूसरी पाली में यूपी टीईटी की परीक्षा दी थी। 26 अगस्त 2026 को घोषित परिणाम में चारों अभ्यर्थियों के सामान्यीकृत (नॉर्मलाइज्ड) अंक निर्धारित अर्हता अंक 82 से कम थे। उनके अंक क्रमशः 81.39, 81.32, 80.40 और 80.94 थे।

विवाद की वजह प्रश्न संख्या 36 और 37 की उत्तर कुंजी बनी। प्रोविजनल आंसर की में दोनों प्रश्नों के लिए केवल विकल्प (डी) को सही बताया गया था। लेकिन अंतिम उत्तर कुंजी में आयोग ने प्रश्न 36 के लिए विकल्प (बी) और (डी), जबकि प्रश्न 37 के लिए विकल्प (ए) और (डी) को सही माना।

आयोग ने इन दोनों सवालों में निर्धारित सही विकल्पों में से कोई एक चुनने वाले अभ्यर्थियों को अंक दिए। याचिकाकर्ताओं ने इन विकल्पों में से कोई विकल्प नहीं चुना था, इसलिए उन्हें इन प्रश्नों के अंक नहीं मिले। इसी आधार पर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने कहा- 150 नहीं, 148 प्रश्नों के आधार पर हो मूल्यांकन

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी प्रश्न के दो विकल्पों को सही माना जाता है, तो उस प्रश्न के आधार पर अभ्यर्थियों के ज्ञान का सही आकलन नहीं किया जा सकता। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों को केवल संयोग से सही विकल्प चुनने के कारण अंक देना उचित नहीं है।

अदालत के अनुसार, प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर किया जाना चाहिए। इसलिए पूरी परीक्षा का मूल्यांकन 150 के बजाय 148 प्रश्नों के आधार पर होगा। पात्रता का मानक भी निर्धारित प्रतिशत के अनुसार इसी आधार पर तय किया जाएगा।

सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को मिलेगा लाभ

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राहत केवल चार याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रखी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों की स्थिति याचिकाकर्ताओं के समान है, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।

इसके बाद संबंधित आयोग को अभ्यर्थियों के अंकों की दोबारा गणना करनी होगी। परिणाम और स्कोरकार्ड में भी जरूरी संशोधन किया जाएगा। इससे उन अभ्यर्थियों की पात्रता पर असर पड़ सकता है, जिनके अंक निर्धारित कटऑफ के आसपास हैं।

प्रश्न 38 हटाने के फैसले का भी किया गया उल्लेख

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इसी परीक्षा में आयोग पहले ही प्रश्न संख्या 38 को मूल्यांकन से बाहर कर चुका था। ऐसे में प्रश्न 36 और 37 के मामले में अलग प्रक्रिया अपनाने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बनता।

अदालत ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए दोनों प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट का मानना था कि जब प्रश्न के एक से अधिक विकल्प सही माने जा रहे हों, तो सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

भर्ती में नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया है। प्रश्न 36 और 37 हटाने तथा अंकों की पुनर्गणना से अभ्यर्थियों को यूपी टीईटी-2026 के परिणाम में सुधार और उससे संबंधित पात्रता का लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे किसी आगामी भर्ती में नियुक्ति या चयन का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा।

यानी टीईटी के संशोधित परिणाम में पात्रता हासिल करना भर्ती प्रक्रिया में सीधे नियुक्ति की गारंटी नहीं होगा। अभ्यर्थियों को संबंधित भर्ती के अन्य निर्धारित नियमों और चयन प्रक्रिया को भी पूरा करना होगा।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंकिता सिंह और तनिया पांडेय ने पक्ष रखा, जबकि प्रतिवादियों की ओर से स्थायी अधिवक्ता शिव कुमार सिंह और उदयन नंदन उपस्थित रहे।

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