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यूपी के कुशीनगर में बाढ़ का खतरा: नारायणी नदी की कटान से एपी बांध पर मंडराया संकट, दर्जनों गांवों में दहशत

“कुशीनगर के तरयासुजान में नारायणी नदी की कटान से एपी बांध पर टूटने का खतरा बढ़ गया है। नदी बांध से महज दो से पांच मीटर दूर है। आसपास के एक दर्जन गांवों में बाढ़ की आशंका से ग्रामीण चिंतित हैं।“ कुशीनगर/तरयासुजान। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में नारायणी नदी की लगातार हो रही कटान […]

कुशीनगर में नारायणी नदी की कटान, एपी बांध के करीब पहुंची नदी, तरयासुजान में बाढ़ का खतरा, नारायणी नदी से तटबंध को नुकसान, कुशीनगर में बचाव कार्य,

“कुशीनगर के तरयासुजान में नारायणी नदी की कटान से एपी बांध पर टूटने का खतरा बढ़ गया है। नदी बांध से महज दो से पांच मीटर दूर है। आसपास के एक दर्जन गांवों में बाढ़ की आशंका से ग्रामीण चिंतित हैं।“

कुशीनगर/तरयासुजान। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में नारायणी नदी की लगातार हो रही कटान ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। तरयासुजान क्षेत्र में एपी बांध के पास नदी तेजी से कटान कर रही है। हैरानी की बात यह है कि नदी का जलस्तर घटने के बावजूद कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है। नदी अब तटबंध के बेहद करीब पहुंच गई है। इससे बांध की सुरक्षा को लेकर आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी का दबाव इसी तरह बना रहा और बांध का कोई हिस्सा टूट गया तो आसपास के करीब एक दर्जन गांवों और टोलों में बाढ़ का पानी घुस सकता है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारी तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए लगातार बचाव कार्य किए जाने का दावा कर रहे हैं।

ततवा टोला और खलवा टोला के बीच बढ़ा नदी का दबाव

एपी बांध पर ततवा टोला और खलवा टोला के बीच पिछले तीन दिनों से नारायणी नदी का दबाव बना हुआ है। लगातार कटान के कारण तटबंध के इस हिस्से की स्थिति चिंताजनक हो गई है। गुरुवार को करीब 20 मीटर के हिस्से में एप्रन लांच होने की घटना सामने आई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विभागीय टीम की ओर से बोल्डर और मिट्टी से भरी बोरियां डालकर बचाव कार्य कराया जा रहा है। हालांकि, लगातार हो रही कटान के कारण इन प्रयासों के बावजूद नदी के रुख पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। आसपास के हिस्सों में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं। इससे तटबंध के कमजोर होने की आशंका बढ़ गई है।

बांध से महज दो से पांच मीटर दूर पहुंची नदी

नारायणी नदी की कटान अब एपी बांध के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। नदी का पानी तटबंध के स्लोप के बेहद करीब पहुंच गया है। सिंचाई विभाग के एसडीओ दीप रतन सिंह के अनुसार, बांध के स्लोप से नदी की दूरी अलग-अलग स्थानों पर कहीं दो मीटर तो कहीं पांच मीटर रह गई है।

उन्होंने बताया कि नदी में जमा सिल्ट के कटने के कारण पानी का रुख बांध की तरफ हो रहा है। इससे तटबंध पर लगातार दबाव बना हुआ है। विभागीय कर्मचारी बचाव कार्य में जुटे हैं और फिलहाल बांध को सुरक्षित बताया जा रहा है।

20 हजार क्यूसेक पानी के डिस्चार्ज के बावजूद जारी कटान

नदी में करीब 20 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बताया जा रहा है। इसके बावजूद कटान जारी रहने से स्थानीय लोगों के साथ अभियंता भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

अभियंताओं के मुताबिक, नदी में जमा सिल्ट के कारण पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। बांध के किनारे और सिल्ट के बीच नहर जैसी आकृति बन गई है। इसके कारण पानी तेजी से घूम रहा है और बैक रोलिंग की प्रक्रिया तेज हो रही है।

इस प्रक्रिया में नदी का पानी अंदर की तरफ कटान करता हुआ तटबंध के स्लोप तक पहुंच रहा है। यही वजह है कि जलस्तर में कमी आने के बाद भी बांध पर खतरा कम नहीं हुआ है।

कटान बढ़ी तो एक दर्जन गांवों में घुस सकता है बाढ़ का पानी

एपी बांध के किनारे बसे ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि नदी का कटान इसी तरह जारी रहा और तटबंध का कोई हिस्सा टूट गया तो आसपास के करीब एक दर्जन गांवों और टोलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

ग्रामीणों को पिछले बाढ़ के हालात फिर से पैदा होने का डर सता रहा है। उनका कहना है कि बांध के इतने करीब नदी पहुंचने के बाद केवल अस्थायी बचाव कार्य पर्याप्त नहीं होगा। तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी और स्थायी इंतजाम किए जाने चाहिए।

बोल्डर और मिट्टी की बोरियों से बचाव, विभाग का दावा- सुरक्षित है बांध

नदी की कटान रोकने के लिए विभाग की ओर से बोल्डर और मिट्टी भरी बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रभावित हिस्से में लगातार बचाव कार्य कराया जा रहा है, ताकि नदी के दबाव को कम किया जा सके और तटबंध को टूटने से बचाया जा सके।

एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि नदी बांध के काफी करीब पहुंच गई है, लेकिन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल बांध पूरी तरह सुरक्षित है और उसे किसी भी स्थिति में टूटने नहीं दिया जाएगा।

जलस्तर घटने के बाद भी प्रशासन के सामने चुनौती

नारायणी नदी की मौजूदा स्थिति ने बाढ़ नियंत्रण और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामान्य तौर पर जलस्तर घटने के बाद नदी का दबाव कम होने की उम्मीद रहती है, लेकिन यहां सिल्ट और पानी के बदलते बहाव के कारण कटान लगातार जारी है।

ऐसे में आने वाले समय में नदी के रुख पर नजर रखना और कमजोर हिस्सों को सुरक्षित करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें बचाव कार्य पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे बांध सुरक्षित रहे और गांवों को संभावित बाढ़ से बचाया जा सके।

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