लखनऊ। ब्रह्माकुमारीज़ लखनऊ की ओर से सुल्तानपुर रोड स्थित गुलज़ार उपवन परिसर में नवनिर्मित ‘दिव्य संस्कृति भवन’ के लोकार्पण की तैयारी की जा रही है। संस्था के अनुसार आगामी 13 नवंबर 2026 को होने वाले नवदशकोत्सव एवं लोकार्पण समारोह में रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह का आगमन प्रस्तावित है। संस्था का कहना है कि राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मौखिक सहमति दी है। इसलिए फिलहाल उनके कार्यक्रम को प्रस्तावित माना जा रहा है और अंतिम कार्यक्रम आधिकारिक पुष्टि के बाद ही निश्चित होगा।
ब्रह्माकुमारीज़ की उत्तर प्रदेश प्रमुख और लखनऊ सब-जोन इंचार्ज राजयोगिनी राधा दीदी ने शुक्रवार को गोमती नगर स्थित आत्मचिंतन भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे नवदशकोत्सव के क्रम में लखनऊ में भी कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इसी श्रृंखला का प्रमुख आयोजन 13 नवंबर को गुलज़ार उपवन में होना है, जहां नवनिर्मित ‘दिव्य संस्कृति भवन’ का लोकार्पण किया जाएगा।
राजयोगिनी राधा दीदी के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने लखनऊ प्रवास के दौरान उनसे व्यक्तिगत मुलाकात में समारोह में आने के लिए मौखिक सहमति दी है। संस्था ने इसी आधार पर उनके प्रस्तावित आगमन को लेकर तैयारियां शुरू की हैं।
समारोह में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति भी प्रस्तावित बताई गई है।
हालांकि आयोजन से करीब दो सप्ताह पहले सामने आई जानकारी के अनुसार दोनों जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अभी प्रस्तावित कार्यक्रम के रूप में ही सामने आई है। अतिथियों का अंतिम कार्यक्रम सुरक्षा, सरकारी व्यस्तताओं और आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार बदल भी सकता है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी केंद्रीय मंत्री की मौखिक सहमति और अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि दो अलग चरण होते हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ के अनुसार ‘दिव्य संस्कृति भवन’ को आध्यात्मिक शिक्षा, राजयोग प्रशिक्षण, सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों के लिए विकसित किया गया है।
यह भवन गुलज़ार उपवन स्थित संस्था के परिसर में बनाया गया है। ब्रह्माकुमारीज़ की आधिकारिक केंद्र सूची में भी Lucknow Gulzar Upavan को मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत संस्था के राजयोग प्रशिक्षण केंद्र के रूप में दर्ज किया गया है।
लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज़ के अलग-अलग क्षेत्रों में कई राजयोग केंद्र संचालित हैं। आधिकारिक केंद्र निर्देशिका में गोमती नगर, हजरतगंज, अलीगंज, आलमबाग, इंदिरानगर, जानकीपुरम, सरोजनीनगर और गुलज़ार उपवन समेत शहर के विभिन्न हिस्सों में केंद्र दर्ज हैं।
गोमती नगर का आत्मचिंतन भवन, जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, भी संस्था का आधिकारिक राजयोग केंद्र है। यह विपुल खंड-6 के संस्थागत क्षेत्र में स्थित है।
ब्रह्माकुमारीज़ इस वर्ष अपनी आध्यात्मिक सेवाओं के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2026-27 को नवदशकोत्सव वर्ष के रूप में मना रही है।
संस्था की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 1936 में सिंध के हैदराबाद में ‘ओम मंडली’ के रूप में हुई थी। वर्ष 2026 में इसी यात्रा के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दुनिया के विभिन्न देशों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आधिकारिक नवदशकोत्सव कार्यक्रम में वर्ष 1936 से 2026 तक की यात्रा को 90 वर्षों की आध्यात्मिक सेवा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वर्ष 2026-27 के दौरान संस्था विभिन्न देशों में शांति, स्वस्थ जीवन, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और व्यक्तिगत परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
लखनऊ इकाई भी इसी वैश्विक आयोजन के साथ अपने स्थानीय सेवा इतिहास को जोड़ रही है।
संस्था के अनुसार लखनऊ में उसकी आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों को 72 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी अवसर को नवदशकोत्सव और नए भवन के लोकार्पण के साथ जोड़ा गया है।
संस्था की ओर से बताया गया कि ‘दिव्य संस्कृति भवन’ केवल कार्यक्रम स्थल के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में राजयोग, आध्यात्मिक संवाद, संस्कार निर्माण, सामाजिक जागरूकता और विभिन्न वर्गों के लिए विशेष कार्यक्रमों के केंद्र के रूप में उपयोग किया जाएगा।
13 नवंबर के बड़े कार्यक्रम से पहले लखनऊ में दो महत्वपूर्ण आयोजन 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को होने जा रहे हैं।
इन दोनों कार्यक्रमों में ब्रह्माकुमारीज़ की वरिष्ठ आध्यात्मिक मार्गदर्शिका राजयोगिनी जयन्ती दीदी शामिल होंगी।
जयन्ती दीदी 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर रहेंगी।
पहला कार्यक्रम 31 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे आयोजित होगा।
इसे ‘सिंधी स्नेह मिलन’ नाम दिया गया है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से सिंधी समाज के लोगों के लिए आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य सामाजिक जुड़ाव, आध्यात्मिक संवाद तथा मानवीय मूल्यों के विषय पर विचार-विमर्श करना बताया गया है।
दूसरा प्रमुख कार्यक्रम 1 नवंबर को शाम 4 बजे होगा।
इस दिन 11 ब्रह्माकुमारी बहनों का समर्पण समारोह आयोजित किया जाएगा।
ब्रह्माकुमारीज़ की परंपरा में समर्पण समारोह उन बहनों से जुड़ा होता है जो संस्था के आध्यात्मिक जीवन, अध्ययन और सेवा गतिविधियों से स्वयं को दीर्घकालिक रूप से जोड़ने का निर्णय लेती हैं।
आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को केंद्र में रखा जाएगा।
31 अक्टूबर और 1 नवंबर के दोनों कार्यक्रम गुलज़ार उपवन स्थित नवनिर्मित राजयोग प्रशिक्षण केंद्र, सुल्तानपुर रोड, लखनऊ में आयोजित किए जाएंगे।
इस कारण आने वाले दो सप्ताह ब्रह्माकुमारीज़ लखनऊ इकाई के लिए कार्यक्रमों की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
पहले जयन्ती दीदी के दो दिवसीय कार्यक्रम होंगे और इसके बाद 13 नवंबर को ‘दिव्य संस्कृति भवन’ के प्रस्तावित लोकार्पण समारोह की तैयारी की जाएगी।
जयन्ती दीदी ब्रह्माकुमारीज़ के वैश्विक नेतृत्व में वरिष्ठ भूमिका निभाती हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार बीके जयन्ती कृपलानी संस्था की Additional Administrative Head हैं। वह यूरोप और मध्य पूर्व में ब्रह्माकुमारीज़ की गतिविधियों का निर्देशन भी करती हैं और जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यों के लिए संस्था की प्रमुख प्रतिनिधि हैं।
संस्था की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह पांच दशकों से अधिक समय से आध्यात्मिक शिक्षा और सेवा से जुड़ी हुई हैं।
उनके कार्यक्रमों में राजयोग, व्यक्तिगत परिवर्तन, शांति, मानवीय मूल्य, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ की आधिकारिक शैक्षणिक सामग्री में यह भी दर्ज है कि जयन्ती दीदी 1982 से जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े ब्रह्माकुमारीज़ के प्रतिनिधित्व में सक्रिय रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े पुराने सार्वजनिक दस्तावेजों में भी जयन्ती कृपलानी का नाम ब्रह्माकुमारीज़ वर्ल्ड स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि के रूप में दर्ज मिलता है।
इस कारण उनका लखनऊ प्रवास संस्था के स्थानीय कार्यक्रम से आगे एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक नेतृत्व की उपस्थिति के रूप में भी देखा जा रहा है।
आयोजकों का प्रयास है कि उनके दो दिवसीय प्रवास के दौरान अलग-अलग सामाजिक वर्गों को राजयोग और संस्था के मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिले।
31 अक्टूबर का सिंधी स्नेह मिलन इसी उद्देश्य से रखा गया है।
सिंधी समाज और ब्रह्माकुमारीज़ का ऐतिहासिक संबंध भी उल्लेखनीय है, क्योंकि संस्था की शुरुआती यात्रा अविभाजित भारत के सिंध क्षेत्र से शुरू हुई थी।
आधिकारिक इतिहास के अनुसार वर्ष 1936 में सिंध के हैदराबाद में दादा लेखराज के नेतृत्व में ओम मंडली की शुरुआत हुई थी। वर्ष 1937 में संगठन के प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं को प्रमुख जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
बाद में विभाजन और अन्य ऐतिहासिक परिस्थितियों के बीच संस्था भारत आई और राजस्थान के माउंट आबू में इसका प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र स्थापित हुआ।
आने वाले दशकों में संस्था ने भारत के अलग-अलग राज्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने केंद्र स्थापित किए।
आधिकारिक नवदशकोत्सव जानकारी में ब्रह्माकुमारीज़ की वर्तमान गतिविधियों को 130 से अधिक देशों तक फैला बताया गया है।
संस्था के इतिहास में महिला नेतृत्व एक प्रमुख विशेषता रही है।
1937 में संगठन से जुड़े प्रशासनिक ट्रस्ट में महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने को संस्था अपनी विकास यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव मानती है।
आज भी वैश्विक स्तर पर ब्रह्माकुमारीज़ का प्रशासन वरिष्ठ महिलाओं के नेतृत्व में संचालित होता है।
जयन्ती दीदी इसी नेतृत्व संरचना का हिस्सा हैं।
लखनऊ में 1 नवंबर को प्रस्तावित 11 बहनों का समर्पण समारोह भी संस्था के इसी महिला-नेतृत्व वाले आध्यात्मिक मॉडल से जुड़ा आयोजन है।
आयोजकों का कहना है कि समर्पण का अर्थ केवल व्यक्तिगत धार्मिक निर्णय नहीं बल्कि लंबे समय तक आध्यात्मिक अध्ययन, अनुशासन, समाज सेवा और संस्था की गतिविधियों में भागीदारी से है।
कार्यक्रम में इन 11 बहनों के आध्यात्मिक जीवन के औपचारिक नए चरण की शुरुआत की जाएगी।
इस अवसर पर जयन्ती दीदी का मार्गदर्शन भी प्रस्तावित है।
इसके बाद संस्था का मुख्य ध्यान 13 नवंबर के समारोह पर रहेगा।
‘दिव्य संस्कृति भवन’ के लोकार्पण को लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज़ की 72 वर्षों की सेवाओं और संस्था के वैश्विक 90वें वर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
राधा दीदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संस्था का उद्देश्य आध्यात्मिक शिक्षा को व्यक्तिगत जीवन तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक जीवन में शांति, सद्भाव, नैतिकता और सकारात्मक सोच के रूप में आगे बढ़ाना है।
इसी सोच के तहत नए भवन में भविष्य में विभिन्न वर्गों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।
इनमें युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, पेशेवरों और सामाजिक संगठनों के लिए आध्यात्मिक तथा मूल्य आधारित कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
हालांकि नए भवन में भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों का पूर्ण वार्षिक कैलेंडर अभी घोषित नहीं किया गया है।
संस्था का प्रमुख अभ्यास राजयोग ध्यान है।
ब्रह्माकुमारीज़ के आधिकारिक केंद्रों पर शुरुआती राजयोग पाठ्यक्रम और नियमित ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। लखनऊ के आधिकारिक केंद्र विवरणों में भी सात दिवसीय परिचयात्मक राजयोग पाठ्यक्रम और नियमित ध्यान कक्षाओं की जानकारी उपलब्ध है।
राजयोग को संस्था आत्मचिंतन, आत्म-जागरूकता और मानसिक शांति से जोड़कर प्रस्तुत करती है।
संस्था के धार्मिक और आध्यात्मिक दावों को उसके विश्वास और शिक्षाओं के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, जबकि सामाजिक कार्यक्रमों में वह शांति, नैतिक मूल्य, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण जैसे विषयों पर भी गतिविधियां आयोजित करती रही है।
वर्ष 2026 के नवदशकोत्सव में भी संस्था ने व्यक्तिगत आध्यात्मिक परिवर्तन को सामाजिक कार्रवाई से जोड़ने की थीम अपनाई है।
अक्टूबर 2026 में आबूरोड स्थित शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट में संस्था ने अपने 90 वर्षों के अवसर पर ‘Spiritual Awakening for World Renewal’ यानी विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागृति विषय को केंद्र में रखा।
इसी व्यापक अभियान के अंतर्गत देश के विभिन्न शहरों में नवदशकोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लखनऊ का कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है।
इस दृष्टि से ‘दिव्य संस्कृति भवन’ का लोकार्पण केवल नई इमारत शुरू करने का कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्था की स्थानीय सेवा गतिविधियों को अगले चरण में ले जाने के प्रतीकात्मक आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि वह लखनऊ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
संस्था ने उनके प्रस्तावित आगमन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
राधा दीदी के अनुसार राजनाथ सिंह ने व्यक्तिगत मुलाकात में कार्यक्रम में आने के लिए मौखिक सहमति दी है।
इसलिए आयोजक उनकी उपस्थिति की उम्मीद कर रहे हैं।
फिर भी अंतिम समय तक सरकारी और सुरक्षा संबंधी कार्यक्रमों में बदलाव संभव होता है, इसलिए 13 नवंबर के आयोजन में उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि औपचारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही मानी जाएगी।
इसी तरह उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की भागीदारी भी फिलहाल प्रस्तावित बताई गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करने के साथ गुलज़ार उपवन परिसर में चल रही तैयारियों की जानकारी भी दी।
बड़े स्तर पर अतिथियों और संस्था से जुड़े लोगों के आने की संभावना को देखते हुए परिसर में कार्यक्रम प्रबंधन, बैठने की व्यवस्था और अन्य तैयारियां की जा रही हैं।
राजनाथ सिंह जैसे केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि होने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष स्तर की होगी और स्थानीय पुलिस तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम स्थल की समीक्षा करेंगी।
फिलहाल संस्था की ओर से कार्यक्रम की आध्यात्मिक और संगठनात्मक तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।
आयोजकों के सामने सबसे पहले 31 अक्टूबर और 1 नवंबर के कार्यक्रम हैं।
जयन्ती दीदी के लखनऊ पहुंचने के बाद दो दिवसीय प्रवास में सिंधी समाज के साथ संवाद और बहनों का समर्पण समारोह मुख्य गतिविधियां होंगी।
31 अक्टूबर को शाम साढ़े पांच बजे सिंधी स्नेह मिलन शुरू होने का कार्यक्रम है।
इसके अगले दिन 1 नवंबर को शाम चार बजे 11 बहनों का समर्पण समारोह रखा गया है।
दोनों आयोजन उसी गुलज़ार उपवन परिसर में होंगे जहां 13 नवंबर को बड़ा लोकार्पण समारोह प्रस्तावित है।
इस कारण नए राजयोग प्रशिक्षण केंद्र और ‘दिव्य संस्कृति भवन’ को लेकर संस्था की गतिविधियां लगातार तीन चरणों में आगे बढ़ेंगी।
पहला चरण जयन्ती दीदी का आगमन और सामाजिक संवाद होगा।
दूसरा चरण समर्पण समारोह होगा।
तीसरा चरण 13 नवंबर का नवदशकोत्सव और भवन लोकार्पण होगा।
आयोजन के माध्यम से संस्था अपने ऐतिहासिक 90वें वर्ष को स्थानीय स्तर पर भी विशेष रूप से चिह्नित करना चाहती है।
ब्रह्माकुमारीज़ की आधिकारिक नवदशकोत्सव जानकारी में वर्ष 2026-27 को सालभर चलने वाले वैश्विक सेवा अभियान के रूप में वर्णित किया गया है।
इसमें संस्था के अलग-अलग केंद्रों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शांति, सामाजिक सद्भाव, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नैतिकता और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
लखनऊ में नया भवन इसी दीर्घकालिक गतिविधि के लिए अतिरिक्त आधार तैयार करेगा।
गुलज़ार उपवन का परिसर शहर के मुख्य आबादी वाले क्षेत्र से थोड़ा बाहर सुल्तानपुर रोड की ओर स्थित होने के कारण बड़े कार्यक्रमों के लिए अपेक्षाकृत विस्तृत स्थान उपलब्ध कराता है।
संस्था की आधिकारिक सूची में इसे ‘Gulzar Upavan Training Centre’ के रूप में दर्ज किया गया है।
नवनिर्मित ‘दिव्य संस्कृति भवन’ इसी परिसर की गतिविधियों का विस्तार है।
संस्था के अनुसार इसका उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध कराना है जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को राजयोग, आध्यात्मिक शिक्षा और सामाजिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर जोड़ा जा सके।
आने वाले दिनों में कार्यक्रमों की अंतिम रूपरेखा और अतिथियों का विस्तृत शेड्यूल सामने आने की उम्मीद है।
सबसे पहले 31 अक्टूबर को जयन्ती दीदी का लखनऊ प्रवास शुरू होगा।
1 नवंबर के समर्पण समारोह के बाद संस्था 13 नवंबर के लोकार्पण आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देगी।
यदि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कार्यक्रम अंतिम रूप से स्वीकृत होता है तो वह ‘दिव्य संस्कृति भवन’ का लोकार्पण करेंगे।
संस्था की ओर से अभी इसी संभावना के आधार पर तैयारियां की जा रही हैं।
इस प्रकार अक्टूबर के अंतिम दिन से नवंबर के मध्य तक ब्रह्माकुमारीज़ लखनऊ में लगातार तीन महत्वपूर्ण आयोजन करने जा रही है।
31 अक्टूबर को सिंधी स्नेह मिलन, 1 नवंबर को 11 बहनों का समर्पण समारोह और 13 नवंबर को नवदशकोत्सव के साथ ‘दिव्य संस्कृति भवन’ का प्रस्तावित लोकार्पण इस पूरी श्रृंखला के प्रमुख कार्यक्रम होंगे।
राजयोगिनी जयन्ती दीदी का दो दिवसीय प्रवास निश्चित कार्यक्रमों की पहली कड़ी है, जबकि राजनाथ सिंह और ब्रजेश पाठक की प्रस्तावित उपस्थिति के साथ 13 नवंबर का समारोह इस आयोजन श्रृंखला का सबसे बड़ा कार्यक्रम बनने की संभावना है।
