उरई। जालौन जिले में अपराधियों और वांछित आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी आजाद खां को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। बुधवार देर रात से गुरुवार तड़के के बीच जालौन-कोंच मार्ग पर हुई इस कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी। पुलिस ने घायल अवस्था में उसे हिरासत में लेकर उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी बस में सफर कर रही महिला के नकदी और जेवरात चोरी होने के मामले में वांछित था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस के अनुसार संयुक्त कार्रवाई जालौन कोतवाली पुलिस, एसओजी/स्वाट और सर्विलांस टीम ने की। टीम जालौन-कोंच संपर्क मार्ग पर संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक वांछित व्यक्ति हथियार के साथ क्षेत्र में मौजूद है।
सूचना के बाद पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी बढ़ाई और संदिग्ध व्यक्ति की तलाश शुरू की। डीडी मेमोरियल स्कूल के आसपास पुलिस का सामना एक संदिग्ध से हुआ। पुलिस का दावा है कि टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने पुलिसकर्मियों पर फायर कर दिया। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
घायल आरोपी की पहचान आजाद खां पुत्र कल्लू खां निवासी मोहल्ला दलेल नगर, थाना अजीतमल, जनपद औरैया के रूप में हुई है।
पुलिस ने मुठभेड़ के बाद उसके पास से एक अवैध तमंचा, कारतूस, एक खोखा कारतूस, 9,500 रुपये नकद और एक मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है। उपलब्ध पुलिस विवरण में तमंचा 315 बोर का बताया गया है। कारतूसों की गिनती को लेकर अलग-अलग प्रारंभिक रिपोर्टों में विवरण थोड़ा अलग है—एक विवरण में दो जिंदा कारतूस, एक खोखा और तमंचे में फंसा एक अतिरिक्त कारतूस बताया गया, जबकि दूसरे पुलिस-आधारित विवरण में कुल तीन जिंदा और एक खोखा कारतूस दर्ज है। इसलिए अंतिम जब्ती सूची में दर्ज संख्या ही निर्णायक होगी।
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। उसके पैर में गोली लगी है और चिकित्सकीय देखरेख में उसका उपचार कराया गया। पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि आरोपी की स्थिति उपचार के योग्य थी और गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को आरोपी की तलाश पहले से थी। उसके खिलाफ जालौन कोतवाली में दर्ज एक चोरी के मुकदमे में कार्रवाई चल रही थी और गिरफ्तारी न होने के कारण उस पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था।
मामला 30 अगस्त 2026 की एक घटना से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार उस दिन जालौन क्षेत्र में बस से यात्रा कर रही एक महिला के नकदी और जेवरात चोरी हो गए थे। जांच में आजाद खां का नाम सामने आने के बाद पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहा था।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने 30 अगस्त की बस चोरी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। हालांकि पुलिस पूछताछ में कथित स्वीकारोक्ति अपने आप अदालत में दोषसिद्धि का आधार नहीं होती। चोरी के मामले में आरोपी की भूमिका साक्ष्यों, बरामदगी, गवाहों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
अब पुलिस बरामद किए गए 9,500 रुपये का भी सत्यापन कर रही है।
यह पता लगाया जाएगा कि यह रकम आरोपी की व्यक्तिगत राशि है या इसका संबंध महिला से हुई चोरी अथवा किसी अन्य कथित आपराधिक घटना से है। केवल आरोपी के पास नकदी मिलने से वह रकम स्वतः चोरी की संपत्ति साबित नहीं होती।
इसके लिए शिकायत में दर्ज चोरी की रकम, बैंक या नकदी संबंधी विवरण, बरामदगी की परिस्थितियां और आरोपी की पूछताछ से मिले तथ्यों का मिलान करना होगा।
इसी तरह बरामद मोटरसाइकिल की भी जांच की जा रही है। पुलिस वाहन के स्वामित्व, रजिस्ट्रेशन और उसके किसी अपराध में उपयोग की जानकारी सत्यापित करेगी।
इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू आरोपी का कथित आपराधिक इतिहास है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आजाद खां के खिलाफ जालौन के अलावा औरैया, इटावा और चंदौली सहित अलग-अलग जिलों में कुल 16 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें चोरी, लूट, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों से संबंधित मुकदमे शामिल बताए गए हैं। कुछ पुलिस-आधारित विवरणों में गौहत्या और एनडीपीएस कानून से संबंधित मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि किसी व्यक्ति पर कई मुकदमे दर्ज होना और उन सभी मामलों में दोषी सिद्ध होना दो अलग कानूनी स्थितियां हैं।
प्रत्येक मुकदमे की अपनी न्यायिक स्थिति होती है। किसी मामले में जांच चल सकती है, किसी में आरोपपत्र दाखिल हो सकता है, किसी में ट्रायल जारी हो सकता है और किसी मामले का निस्तारण भी हो चुका हो सकता है।
इसलिए आरोपी के खिलाफ 16 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी को पुलिस रिकॉर्ड के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम आपराधिक दोषसिद्धि संबंधित अदालतों के निर्णय से तय होती है।
पुलिस के अनुसार आरोपी औरैया में गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में भी वांछित था।
अब उसकी गिरफ्तारी की सूचना उन जिलों और थानों को भी भेजी जा सकती है जहां उसके खिलाफ मुकदमे या वारंट लंबित हैं। संबंधित पुलिस इकाइयां आवश्यकता के अनुसार न्यायालय से वारंट, रिमांड या अन्य प्रक्रिया अपना सकती हैं।
जालौन पुलिस के लिए इस गिरफ्तारी का मुख्य आधार फिलहाल 30 अगस्त की बस चोरी का मामला और वर्तमान पुलिस मुठभेड़ है।
मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग किए जाने के दावे के कारण आरोपी के खिलाफ अवैध हथियार रखने और पुलिस पर गोली चलाने से संबंधित अलग कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
बरामद हथियार की फोरेंसिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
यदि पुलिस ने घटनास्थल से खोखा कारतूस बरामद किया है तो बैलिस्टिक परीक्षण से यह देखा जा सकता है कि वह खोखा उसी तमंचे से चला था या नहीं जिसे आरोपी के कब्जे से बरामद बताया गया है।
इसी प्रकार पुलिस द्वारा जवाबी फायरिंग में इस्तेमाल हथियार और कारतूस का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
पुलिस मुठभेड़ के मामलों में घटनास्थल का निरीक्षण, खाली खोखों की बरामदगी, हथियार की सीलिंग, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिसकर्मियों के बयान आगे की जांच में महत्वपूर्ण होते हैं।
आरोपी को गोली लगने की स्थिति में उसका मेडिकल परीक्षण भी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
मुठभेड़ की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में अभी मुख्य जानकारी पुलिस की ओर से सामने आई है। आरोपी की ओर से स्वतंत्र बयान या उसका पक्ष फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसलिए यह तथ्य कि आरोपी ने पहले पुलिस पर फायर किया और पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी गोली चलाई, वर्तमान में पुलिस का आधिकारिक घटनाक्रम है। आगे न्यायिक और विभागीय प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि होगी।
घटना का समय भी उल्लेखनीय है।
कार्रवाई बुधवार देर रात करीब 12 बजे के आसपास बताई गई है। कैलेंडर के हिसाब से मध्यरात्रि के बाद समय गुरुवार, 29 अक्टूबर की शुरुआत में आता है। इसलिए रिपोर्टों में इसे कहीं बुधवार देर रात और कहीं गुरुवार तड़के की कार्रवाई बताया जा रहा है।
स्थान जालौन-कोंच मार्ग पर डीडी मेमोरियल स्कूल के आसपास बताया गया है।
पुलिस वहां संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग और अपराधियों की तलाश के अभियान में लगी थी।
पुलिस टीम ने कथित रूप से सूचना मिलने के बाद रास्ते और आसपास के हिस्से में घेराबंदी की।
आरोपी के पास हथियार होने की सूचना मिलने के कारण टीम सतर्कता के साथ आगे बढ़ी।
पुलिस का दावा है कि आरोपी को रोकने की कोशिश के दौरान ही उसने गोली चला दी।
जवाबी फायरिंग में गोली उसके पैर में लगी।
पुलिस द्वारा पैर में गोली लगने वाले मुठभेड़ मामलों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होता है कि पूरी कार्रवाई का स्वतंत्र भौतिक और फोरेंसिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया या नहीं।
घटनास्थल से बरामद खोखे, तमंचा, जिंदा कारतूस, गोली लगने की दिशा, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिसकर्मियों के हथियारों का विवरण जांच की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण होता है।
यदि आसपास किसी प्रतिष्ठान, स्कूल या सड़क पर सीसीटीवी कैमरे हैं तो उनका फुटेज भी घटनाक्रम की पुष्टि में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अभी किसी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आरोपी के खिलाफ चोरी के जिस मामले में इनाम घोषित हुआ था, उसमें महिला बस से यात्रा कर रही थी।
सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों के बैग, नकदी और जेवरात चोरी करने वाले गिरोह अक्सर भीड़भाड़ वाले स्थानों और बसों में सक्रिय रहते हैं।
ऐसी घटनाओं में आरोपी सामान्य यात्री की तरह वाहन में चढ़कर पीड़ित का ध्यान भटकाने, बैग काटने या सामान निकालने जैसी अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि इस विशेष मामले में चोरी किस तरीके से की गई थी, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल सीमित है।
पुलिस के अनुसार जांच में आजाद खां की भूमिका सामने आई और उसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे थे।
आरोपी पर इनाम घोषित किया जाना इस बात का संकेत है कि पुलिस उसकी गिरफ्तारी को प्राथमिकता के साथ तलाश रही थी।
आमतौर पर किसी वांछित आरोपी की गिरफ्तारी पर इनाम तब घोषित किया जाता है जब वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बच रहा हो और पुलिस को उसकी तलाश में अतिरिक्त सूचना या सहयोग की आवश्यकता हो।
इनाम की घोषणा का अर्थ अपने आप अपराध सिद्ध होना नहीं है।
यह गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाया गया उपाय है।
आजाद खां की गिरफ्तारी के बाद अब 30 अगस्त की घटना की जांच भी नए चरण में प्रवेश करेगी।
पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि चोरी की घटना में वह अकेला था या किसी गिरोह के साथ काम कर रहा था।
यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनकी तलाश भी की जाएगी।
महिला के चोरी हुए जेवरात अभी पूरी तरह बरामद हुए या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने वर्तमान कार्रवाई में 9,500 रुपये नकद बरामद किए हैं लेकिन जेवरात की बरामदगी का उल्लेख नहीं किया गया है।
इसलिए पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल चोरी गए आभूषणों का पता लगाना भी होगा।
यदि आरोपी ने कथित रूप से चोरी का सामान किसी तीसरे व्यक्ति को बेचा या गिरवी रखा था तो पुलिस उस लेन-देन की भी जांच कर सकती है।
ऐसे मामलों में चोरी की संपत्ति खरीदने वाले व्यक्ति की भूमिका भी कानून के तहत जांच का विषय बन सकती है, बशर्ते यह स्थापित हो कि उसे संपत्ति के चोरी की होने की जानकारी थी या इसके संबंध में पर्याप्त संदेह होना चाहिए था।
आरोपी के मोबाइल फोन या डिजिटल संपर्क से भी पुलिस कथित गिरोह या सहयोगियों की जानकारी जुटा सकती है।
हालांकि वर्तमान बरामदगी में मोबाइल फोन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
इसलिए मोबाइल या डिजिटल साक्ष्य संबंधी कोई निष्कर्ष पुलिस के आधिकारिक खुलासे के बिना नहीं निकाला जाना चाहिए।
आपराधिक इतिहास के सत्यापन के दौरान पुलिस आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों की वर्तमान स्थिति एकत्र करेगी।
यदि उसके खिलाफ किसी अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी है तो गिरफ्तारी के बाद संबंधित न्यायालय को सूचना दी जाएगी।
औरैया में गैंगस्टर एक्ट के कथित लंबित मामले में भी संबंधित पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
गैंगस्टर एक्ट का मामला अलग प्रकृति का होता है और उसमें आरोपी की कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को लेकर अलग जांच और न्यायिक प्रक्रिया चलती है।
इसी तरह आर्म्स एक्ट के पुराने और नए मामलों को भी अलग-अलग देखा जाएगा।
वर्तमान मुठभेड़ में अवैध तमंचा मिलने के दावे के बाद पुलिस नया आर्म्स एक्ट मुकदमा दर्ज कर सकती है।
हथियार कहां से आया, किसने उपलब्ध कराया और आरोपी के पास कब से था—ये सवाल भी जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
यदि हथियार किसी स्थानीय अवैध हथियार नेटवर्क से खरीदा गया था तो पुलिस उसकी आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।
जालौन जिले में पिछले कुछ समय से वांछित और इनामी आरोपियों के खिलाफ पुलिस अभियान तेज किया गया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक प्रेस रिलीज सूची में अक्टूबर के दौरान जालौन में अन्य इनामी और गैंगस्टर आरोपियों के खिलाफ भी मुठभेड़ और गिरफ्तारी की कार्रवाई दर्ज हुई है। इससे यह स्पष्ट है कि जिले में सक्रिय वांछित आरोपियों के खिलाफ विशेष अभियान चल रहा है।
हालांकि प्रत्येक मुठभेड़ और गिरफ्तारी को उसके अपने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
किसी जिले में अभियान चलना प्रत्येक पुलिस दावे को स्वतः सत्यापित नहीं करता।
वर्तमान मामले में भी मुठभेड़ और बरामदगी की कानूनी पुष्टि जांच, मेडिकल, फोरेंसिक और न्यायालयी प्रक्रिया से होगी।
आरोपी को अस्पताल से चिकित्सकीय अनुमति मिलने के बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पुलिस संबंधित मामलों में उसका न्यायिक या पुलिस रिमांड मांग सकती है।
रिमांड पर अंतिम निर्णय अदालत करेगी।
यदि जांच अधिकारी को चोरी गए जेवरात की बरामदगी, अन्य आरोपियों की पहचान या अपराध में इस्तेमाल साधनों के बारे में पूछताछ आवश्यक लगती है तो पुलिस रिमांड की मांग की जा सकती है।
आरोपी को भी कानूनी प्रतिनिधित्व और अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तारी और पुराने मुकदमों का लंबा रिकॉर्ड होने के बावजूद आजाद खां को प्रत्येक मामले में कानून के अनुसार आरोपी ही माना जाएगा जब तक सक्षम अदालत अपराध सिद्ध नहीं करती।
इसलिए समाचार में “इनामी आरोपी”, “वांछित आरोपी” या पुलिस के रिकॉर्ड के आधार पर “बदमाश” जैसे शब्द उपयोग किए जा सकते हैं, लेकिन न्यायिक दोषसिद्धि से पहले उसे किसी लंबित मामले में दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
इस मामले में पुलिस के लिए तत्काल अगला चरण घायल आरोपी का उपचार, मेडिकल परीक्षण, बरामदगी का मेमो तैयार करना, हथियार और कारतूस को सील करना तथा मुठभेड़ के संबंध में अलग मुकदमा दर्ज करना होगा।
30 अगस्त की चोरी के मुकदमे में भी उसकी गिरफ्तारी दर्ज की जाएगी।
यदि बरामद नकदी या बाइक का संबंध पुराने अपराध से निकलता है तो उसे संबंधित केस की संपत्ति के रूप में शामिल किया जा सकता है।
एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने बताया है कि आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है और उसके आपराधिक इतिहास से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि वह हाल के दिनों में कहां रह रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए किसकी मदद ले रहा था।
यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर वांछित आरोपी को शरण दी हो और कानून में उसकी भूमिका कार्रवाई योग्य पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी जांच हो सकती है।
हालांकि अभी किसी सहयोगी या शरण देने वाले व्यक्ति का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
30 अगस्त के बस चोरी मामले में पीड़ित महिला के बयान और चोरी की वास्तविक रकम तथा जेवरात का विवरण भी महत्वपूर्ण होगा।
यदि पुलिस आरोपी से किसी और संपत्ति की बरामदगी करती है तो पहचान और स्वामित्व की पुष्टि पीड़िता से कराई जा सकती है।
बरामद सामान को अदालत की प्रक्रिया के बाद पीड़ित को वापस दिलाने की व्यवस्था होती है।
फिलहाल वर्तमान मुठभेड़ से पुलिस ने 9,500 रुपये नकद, मोटरसाइकिल और हथियार-कारतूस बरामद करने की जानकारी दी है।
आजाद खां के खिलाफ दर्ज 16 मुकदमों के रिकॉर्ड की वजह से पुलिस उसके संभावित अंतरजनपदीय नेटवर्क की भी जांच कर सकती है।
औरैया, जालौन, इटावा और चंदौली जैसे अलग-अलग जिलों में मुकदमे दर्ज होने का अर्थ है कि उसकी गतिविधियों को केवल एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जा रहा।
यदि अलग-अलग मामलों की कार्यशैली समान पाई जाती है तो पुलिस यह जांच सकती है कि कोई संगठित गिरोह सक्रिय था या नहीं।
लेकिन यह अभी जांच का विषय है।
सिर्फ अलग-अलग जिलों में मुकदमे होने के आधार पर किसी संगठित गिरोह का अस्तित्व सिद्ध नहीं माना जा सकता।
पुलिस की वर्तमान कार्रवाई ने बस चोरी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ किया है।
अब पीड़ित महिला से जुड़े मामले में आरोपपत्र, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो पुलिस निर्धारित समय में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करेगी।
मुठभेड़ से जुड़े मामले की जांच अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत चलेगी।
इसमें पुलिस पर फायरिंग का दावा, बरामद तमंचा और घटनास्थल से मिले खोखे प्रमुख साक्ष्य होंगे।
हथियार को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की संभावना है।
वहीं घायल आरोपी की एक्स-रे और मेडिकल रिपोर्ट से गोली लगने की जगह और दिशा स्पष्ट होगी।
ऐसी मेडिकल रिपोर्ट घटना के घटनाक्रम की पुष्टि या परीक्षण में भी महत्वपूर्ण होती है।
स्थानीय स्तर पर मुठभेड़ की खबर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है।
25 हजार रुपये के इनामी आरोपी का लंबे समय से वांछित होना और उस पर 16 मुकदमे दर्ज होने का पुलिस रिकॉर्ड इस मामले की गंभीरता बढ़ाता है।
लेकिन पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम अब अदालत में ऐसे साक्ष्य पेश करना होगा जो चोरी और मुठभेड़ दोनों मामलों में आरोपों को कानूनी रूप से स्थापित कर सकें।
अपराध नियंत्रण अभियान का अंतिम मूल्यांकन केवल गिरफ्तारी की संख्या से नहीं बल्कि जांच की गुणवत्ता, चोरी की संपत्ति की बरामदगी और अदालत में मामलों के टिकने से भी होता है।
29 अक्टूबर की वर्तमान स्थिति में पुलिस के अनुसार आजाद खां को मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।
उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित था।
वह 30 अगस्त 2026 को बस में महिला से नकदी और जेवरात चोरी के मामले में वांछित बताया गया है।
पुलिस ने एक 315 बोर का अवैध तमंचा, कारतूस, एक खोखा, 9,500 रुपये नकद और एक मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ चार जिलों में कुल 16 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
अब इलाज के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा और पुराने तथा वर्तमान मामलों में विधिक कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
साथ ही पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि बरामद नकदी और मोटरसाइकिल का महिला से हुई चोरी या किसी अन्य अपराध से क्या संबंध है तथा चोरी हुए जेवरात कहां हैं।
इस मुठभेड़ के साथ एक वांछित आरोपी की तलाश जरूर समाप्त हुई है, लेकिन पुलिस जांच का बड़ा हिस्सा अब शुरू होगा—हथियार की फोरेंसिक जांच, चोरी की संपत्ति की तलाश, पुराने मुकदमों का सत्यापन, कथित गिरोह के संभावित सदस्यों की पहचान और अदालत में साक्ष्यों की प्रस्तुति इस केस की आगे की दिशा तय करेंगे।
