पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच रविवार को नई धमकियों का आदान-प्रदान हुआ, जबकि यमन के ईरान समर्थित हूती समूह के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पहले से अस्थिर क्षेत्रीय स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर समझौता करने का दबाव बढ़ाते हुए गंभीर आर्थिक परिणामों और ईरानी नेतृत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके जवाब में ईरान की सेना ने कहा कि किसी भी नए अमेरिकी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों के खिलाफ व्यापक जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहा संघर्ष किसी निर्णायक समाधान की ओर बढ़ता नहीं दिख रहा। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए मौजूदा संघर्ष ने न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के कई देशों, महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर भी दबाव बढ़ाया है। हाल के दिनों में यमन में हूती बलों की गतिविधियों ने इस संकट को एक और मोर्चे तक फैला दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से समझौते की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। उनकी ओर से दिए गए संदेश में ईरान की अर्थव्यवस्था के और कमजोर होने तथा संघर्ष बढ़ने की स्थिति में नेतृत्व के खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई की संभावना जताई गई। हालांकि इसी के साथ ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात के लिए तैयार हो सकते हैं। पेजेशकियन के इस सप्ताह न्यूयॉर्क पहुंचने की उम्मीद है। इस वजह से सैन्य बयानबाजी के बीच कूटनीतिक संपर्क की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
दूसरी ओर ईरान की सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ नया हमला किया गया तो जवाबी कार्रवाई केवल एक सीमित सैन्य प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी। ईरानी सेना के अनुसार अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जा सकता है। ईरान ने यह भी कहा कि ऐसे किसी हमले में अमेरिका का सहयोग करने वाले क्षेत्रीय देशों को भी संघर्ष का पक्ष माना जा सकता है। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसके पास नए हमले की तैयारी से जुड़ी जानकारी है, हालांकि इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
इस पूरे संकट का नया केंद्र यमन और सऊदी अरब के आसपास बनता दिखाई दे रहा है। हूती बलों ने हाल में सऊदी अरब की राजधानी रियाद और दूसरे इलाकों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इससे पहले समूह ने यमन के पश्चिमी तट पर तेजी से सैन्य बढ़त हासिल की और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों तक पहुंच बनाई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कई हमलों को रोकने का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए नागरिकों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है और उड़ानों के रद्द होने या हवाई क्षेत्र बंद किए जाने जैसी परिस्थितियों की संभावना जताई है।
हूती गतिविधियों का सबसे गंभीर पहलू बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जुड़ा है। यमन के पश्चिमी तट पर हूती बलों की बढ़त ने उन्हें लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार के बेहद करीब पहुंचा दिया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सितंबर के मध्य तक इस इलाके में लड़ाई तेज हो चुकी थी और हूती बलों के दक्षिणी लाल सागर के कई रणनीतिक द्वीपों तक पहुंचने की रिपोर्टें सामने आई थीं। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाज लाल सागर के रास्ते एशिया, यूरोप और भूमध्यसागरीय बाजारों को जोड़ते हैं।
हालांकि सितंबर के मध्य तक उपलब्ध समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों के आधार पर लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई थी, लेकिन हूती सैन्य बढ़त ने बाजारों और शिपिंग कंपनियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे व्यवधानों के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित है। यदि बाब अल-मंदेब में भी बड़े पैमाने पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट का दूसरा महत्वपूर्ण केंद्र है। ईरान ने यहां से गुजरने वाले अधिकांश समुद्री यातायात को बाधित कर रखा है, जबकि अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लागू नाकेबंदी ईरान की तेल बिक्री को प्रभावित कर रही है। इसके कारण एक असामान्य स्थिति बनी है जिसमें खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात और ईरान के अपने तेल निर्यात, दोनों पर एक साथ दबाव है। हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिकी बलों के बीच तेल टैंकरों को लेकर भी टकराव बढ़ा है। अमेरिकी सैन्य कमान ने सितंबर की शुरुआत में ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर कार्रवाई की पुष्टि की थी और इसे अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर ईरानी मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया बताया था।
ऊर्जा आपूर्ति पर इस दबाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को भी प्रभावित किया है। सितंबर में ईरान और अमेरिका के बीच जहाजों तथा तेल टैंकरों पर हमलों की एक बड़ी श्रृंखला के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी। इसके बाद कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। होर्मुज और बाब अल-मंदेब जैसे दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर एक साथ जोखिम बढ़ना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए असाधारण चुनौती बन सकता है।
यमन के भीतर स्थिति भी लगातार बिगड़ रही है। हूती बलों ने सितंबर में मोखा बंदरगाह सहित पश्चिमी तट के कई इलाकों पर नियंत्रण बढ़ाया और रणनीतिक द्वीपों की ओर आगे बढ़े। दूसरी ओर यमन सरकार से जुड़े बलों ने कई मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई शुरू की है। संयुक्त राष्ट्र ने मारिब, लाहिज, अल-जौफ, हज्जाह, अल-बायदा और सादा सहित कई क्षेत्रों में झड़पों की जानकारी दी है। इस संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और पहले से गंभीर मानवीय संकट झेल रहे यमन में विस्थापन और खाद्य असुरक्षा की स्थिति और बिगड़ने का खतरा है।
सऊदी अरब के सामने भी कठिन सुरक्षा स्थिति बन गई है। एक ओर उसे यमन में हूती बढ़त को रोकने के लिए सैन्य दबाव बनाए रखने की जरूरत महसूस हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिक सैन्य कार्रवाई सऊदी शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और दूसरे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त मिसाइल और ड्रोन हमलों का कारण बन सकती है। हाल में हूती हमलों में सऊदी तेल और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के दावे और कई लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं।
तनाव के बावजूद बातचीत के कुछ चैनल खुले हुए हैं। सितंबर के मध्य में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में संपर्क होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद हूती पक्ष ने अमेरिकी जहाजों को निशाना न बनाने की बात कही, हालांकि सऊदी अरब से जुड़े लक्ष्यों को लेकर उसका रुख अलग बना हुआ है। इस कारण अमेरिका, ईरान, हूती समूह और सऊदी अरब के बीच चल रहा संकट एक सीधी सैन्य लड़ाई से कहीं अधिक जटिल क्षेत्रीय टकराव बन चुका है।
ईरान और अमेरिका के बीच जून में एक अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन जुलाई में इसकी शर्तों को लेकर मतभेद बढ़ने के बाद यह व्यवस्था टूट गई। ईरान का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से तभी खोलेगा जब जून के समझौते की शर्तें उसकी व्याख्या के अनुसार पूरी की जाएंगी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने भी संकेत दिया है कि तेहरान सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों को एक साथ जारी रखना चाहता है।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान संभावित कूटनीतिक संपर्क महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो यह मौजूदा तनाव को कम करने का एक रास्ता खोल सकती है। इसके विपरीत किसी नए बड़े सैन्य हमले, हूती कार्रवाई या क्षेत्रीय देशों की प्रत्यक्ष भागीदारी से संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल स्थिति तेजी से बदल रही है। ईरान और अमेरिका दोनों की ओर से कठोर सैन्य चेतावनियां दी जा रही हैं, हूती बल यमन और लाल सागर क्षेत्र में सक्रिय हैं और ऊर्जा तथा समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बना हुआ है। इसलिए पश्चिम एशिया में आने वाले कुछ दिनों के सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।