उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में UP-Japan Investment Meet 2026 का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्यक्रम में जापानी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की और उत्तर प्रदेश को जापानी उद्योगों के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में पेश किया। कार्यक्रम में 200 से अधिक जापानी CEO, कारोबारी प्रतिनिधि और उद्योग जगत से जुड़े अधिकारी शामिल हुए।
इस निवेश बैठक का मुख्य फोकस मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश बढ़ाने पर रहा। सरकार की ओर से बताया गया कि यूपी में जापानी कंपनियों के लिए बेहतर औद्योगिक वातावरण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ा बाजार उपलब्ध है।
₹3,191 करोड़ के प्रोजेक्ट पर बड़ा फोकस
UP-Japan Investment Meet के दौरान करीब ₹3,191 करोड़ की परियोजनाओं के लिए वर्चुअल ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की गई। इन परियोजनाओं से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।
सरकार का जोर ऐसे निवेश पर है जिससे उत्तर प्रदेश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़े और राज्य को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनाने में मदद मिले। निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर सप्लायर नेटवर्क, तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसर विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
500 एकड़ में Japan City का प्रस्ताव
बैठक में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में करीब 500 एकड़ में Japan City विकसित करने का प्रस्ताव भी प्रमुखता से सामने आया। इसका उद्देश्य जापानी कंपनियों के लिए एक समर्पित औद्योगिक और कारोबारी वातावरण तैयार करना है, जहां निवेशकों को जरूरी सुविधाएं एक ही इकोसिस्टम के भीतर उपलब्ध कराई जा सकें।
इस प्रस्ताव को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच औद्योगिक साझेदारी को लंबे समय तक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Japan City में भविष्य में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार की संभावना है।
योगी ने जापानी कंपनियों को दिया निवेश का भरोसा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए राज्य की औद्योगिक क्षमता और कारोबारी माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने यूपी की इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और बढ़ते इंडस्ट्रियल बेस को निवेश के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया।
योगी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में बड़ी संख्या में MSME, बड़े उद्योग और स्टार्टअप मौजूद हैं, जिससे निवेशकों के लिए सप्लाई चेन और उपभोक्ता बाजार दोनों उपलब्ध होते हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी नजर
जापानी कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर उत्तर प्रदेश में निवेश का प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है। एस्कॉर्ट्स कुबोटा की प्रस्तावित परियोजना को भी इस निवेश अभियान से जोड़ा गया है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना में ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट से जुड़े उत्पादों के निर्माण की योजना बताई गई है। परियोजना से हजारों रोजगार अवसर बनने की संभावना जताई गई है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के अलावा राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े निवेश को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर भी जोर
इस बार की निवेश बैठक में पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग के साथ भविष्य की तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर को प्रमुख निवेश क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश में केवल असेंबली या उत्पादन इकाइयां ही न आएं, बल्कि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च से जुड़े निवेश भी विकसित हों। इससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अधिक तकनीकी और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है।
रोजगार बढ़ाने पर भी जोर
निवेश आकर्षित करने की इस पूरी रणनीति में रोजगार को महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि जापानी कंपनियों के नए प्रोजेक्ट आने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
औद्योगिक इकाइयों के साथ स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, तकनीकी प्रशिक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं से 10,000 से अधिक रोजगार अवसरों की संभावना का उल्लेख किया गया है।
जापान-यूपी साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच औद्योगिक सहयोग पहले से मौजूद है, लेकिन राज्य सरकार इस साझेदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार निवेशकों को समयबद्ध मंजूरी, बेहतर नीतिगत वातावरण और परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दे रही है।
जापानी उद्योगों की कार्यशैली में गुणवत्ता, तकनीक और दीर्घकालिक निवेश पर जोर रहता है। ऐसे में सरकार उम्मीद कर रही है कि जापान से आने वाला निवेश उत्तर प्रदेश के औद्योगिक ढांचे में तकनीकी क्षमता को भी मजबूत करेगा।
यूपी के लिए क्यों अहम है यह निवेश अभियान?
उत्तर प्रदेश लंबे समय से खुद को देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के साथ सरकार राज्य को लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रही है।
जापान जैसे तकनीकी रूप से मजबूत निवेशक देश की कंपनियों का बड़े पैमाने पर निवेश आने से राज्य में पूंजी के साथ नई तकनीक, उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव भी बढ़ सकता है।
आगे क्या?
UP-Japan Investment Meet 2026 के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में सामने आए निवेश प्रस्ताव कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं। ₹3,191 करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत और प्रस्तावित Japan City जैसे प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लिए बड़े औद्योगिक अवसर बन सकते हैं।
सरकार की कोशिश स्पष्ट है कि जापानी निवेश को केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित न रखते हुए मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और हेल्थकेयर जैसे कई क्षेत्रों में लंबे समय की औद्योगिक साझेदारी में बदला जाए। यदि प्रस्तावित निवेश समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विस्तार और रोजगार के अवसरों को नई गति मिल सकती है।