मानसून के दौरान लगातार बारिश और कई इलाकों में जलभराव के बीच स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। बारिश के बाद पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है, जिसके कारण डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित संक्रमणों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन सतर्क हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में डेंगू की रोकथाम के लिए जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने शहर को सात जोन में बांटकर निगरानी और रोकथाम अभियान तेज किया है। इनमें तेलियरगंज, अल्लापुर, धूमनगंज, मुंडेरा, नैनी, झूंसी और फाफामऊ क्षेत्र शामिल हैं।
जलभराव के बाद बढ़ता है मच्छरों का खतरा
मानसून में जमा हुआ साफ या गंदा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए उपयुक्त स्थान बन सकता है। घरों के आसपास रखे कंटेनर, गमले, कूलर, छतों और खाली प्लॉट में पानी जमा रहने पर मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ऐसे स्थानों की पहचान कर साफ-सफाई, लार्वा नियंत्रण और जागरूकता अभियान चला रहा है। स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर संभावित संक्रमण क्षेत्रों की पहचान करना है।
प्रयागराज में सात जोन में निगरानी
प्रयागराज में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू नियंत्रण अभियान को व्यवस्थित करने के लिए शहर को सात हिस्सों में बांटा है। प्रत्येक जोन में निगरानी, संसाधनों के वितरण और प्रभावित क्षेत्रों में लक्षित कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
इस तरह की जोन आधारित व्यवस्था का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की टीमों को अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना है।
डेंगू के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली और त्वचा पर दाने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं, इसलिए स्वयं बीमारी की पुष्टि करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बारिश के मौसम में बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने से बचना चाहिए। खासतौर पर लगातार बुखार या हालत बिगड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।
घरों में इन बातों का रखें ध्यान
डेंगू से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मच्छरों के प्रजनन को रोकने की है। घरों में पानी की टंकियों को ढककर रखना, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलना और आसपास पानी जमा न होने देना जरूरी है।
फूलदान, गमले, टूटे बर्तन, पुराने टायर और अन्य छोटे कंटेनरों में जमा पानी भी नियमित रूप से खाली करना चाहिए।
मानसून में दूसरी बीमारियों का भी खतरा
मानसून के दौरान केवल डेंगू और मलेरिया ही चिंता का विषय नहीं हैं। दूषित पानी और भोजन से होने वाले संक्रमण, वायरल बुखार और त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
ऐसे में साफ पानी पीना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और खुले में रखे भोजन से बचना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी क्यों जरूरी?
बारिश के बाद अचानक बढ़ने वाले मच्छरों के प्रजनन को समय रहते नियंत्रित करना जरूरी होता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सर्विलांस और रोकथाम अभियान पर ध्यान दे रही हैं।
प्रयागराज में सात जोन की व्यवस्था इसी तरह की लक्षित निगरानी का उदाहरण है।
लोगों की भूमिका भी अहम
डेंगू नियंत्रण केवल सरकारी अभियान से संभव नहीं है। घर और आसपास पानी जमा होने से रोकना, बुखार होने पर समय पर जांच कराना और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
लंबी आस्तीन के कपड़े पहनना, मच्छरदानी का इस्तेमाल और जरूरत के अनुसार सुरक्षित मच्छर-रोधी उपाय अपनाने से मच्छरों के संपर्क को कम किया जा सकता है।
बारिश जारी रहने तक सतर्कता जरूरी
मानसून के दौरान बारिश और जलभराव का सिलसिला जारी रहने तक डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों को लेकर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और स्थानीय निकायों की साफ-सफाई व्यवस्था के साथ नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल प्रयागराज सहित बारिश प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग डेंगू नियंत्रण पर नजर बनाए हुए है। लोगों को बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और घर के आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी जाती है।