भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026, कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 300 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,300 के नीचे चला गया और बाद में 24,200 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का दबाव रहा।
ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेज वृद्धि का असर महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
निफ्टी 24,200 के करीब
दोपहर के कारोबार में निफ्टी 24,200 के आसपास बना रहा। बाजार में शुरुआती गिरावट के बाद कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन वैश्विक संकेत और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निवेशकों के लिए चिंता बनी रहीं।
बाजार में IT सहित कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला। निवेशकों की नजर विदेशी बाजारों, रुपये की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।
Crude Oil ने बढ़ाया दबाव
ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने को बाजार की कमजोरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। तेल की कीमतों में तेज वृद्धि भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है। इससे रुपये और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एयरलाइंस, पेंट, केमिकल और कुछ अन्य क्षेत्रों की लागत को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि तेल एवं गैस कंपनियों पर असर अलग-अलग हो सकता है।
वैश्विक तनाव का असर
मंगलवार के कारोबार में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रही हैं। तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के साथ निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों में सतर्कता बरत रहे हैं।
इसके चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
निवेशकों की नजर रुपये पर भी
कच्चे तेल की कीमतों के बढ़ने के साथ डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण हो जाती है। महंगे तेल से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे रुपये में कमजोरी की चिंता पैदा हो सकती है।
बाजार विशेषज्ञों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं।
कौन से सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं?
तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव के बीच तेल आयात पर निर्भर सेक्टरों में दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ रक्षा, ऊर्जा या घरेलू मांग से जुड़े शेयरों में अलग तरह की गतिविधि हो सकती है।
फिलहाल बाजार में व्यापक धारणा सतर्क बनी हुई है। निवेशकों को किसी एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन और जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बाजारों का रुझान, विदेशी निवेशकों की गतिविधि, रुपये की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगे।
मंगलवार को Sensex और Nifty में शुरुआती गिरावट ने दिखाया कि ऊंचा क्रूड और वैश्विक तनाव भारतीय बाजार के लिए फिलहाल बड़ा जोखिम बना हुआ है।