देशभर में NEET परीक्षा को लेकर जारी बहस और छात्र आंदोलनों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक बार फिर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरी तरह समाप्त करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और उनकी पार्टी का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है कि NEET को समाप्त किया जाना चाहिए और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का अधिकार राज्यों को दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में NEET परीक्षा प्रणाली, कथित अनियमितताओं और परीक्षा सुधार को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 से NEET-UG को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाने की घोषणा की है, लेकिन तमिलनाडु सरकार का कहना है कि केवल परीक्षा का प्रारूप बदलना पर्याप्त नहीं है। राज्य की मांग है कि NEET व्यवस्था को ही समाप्त किया जाए।
विजय ने दोहराया पुराना रुख
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की स्थापना से ही NEET का विरोध करती रही है। उनके अनुसार, हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश की व्यवस्था राज्यों के अधिकार क्षेत्र में होनी चाहिए। उनका कहना है कि राज्यों को अपने कोटे की MBBS, BDS और AYUSH सीटों पर स्थानीय व्यवस्था के अनुसार प्रवेश देने का अधिकार मिलना चाहिए।
कक्षा 12 के अंकों के आधार पर प्रवेश की वकालत
मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य कोटे की मेडिकल सीटों पर प्रवेश कक्षा 12 के अंकों के आधार पर कराने की अनुमति दी जाए। उनका तर्क है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी विद्यालयों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को अधिक अवसर मिल सकेंगे।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की यह मांग नई नहीं है बल्कि कई वर्षों से लगातार उठाई जाती रही है। राज्य सरकार का मानना है कि वर्तमान प्रवेश प्रणाली सभी विद्यार्थियों के लिए समान परिस्थितियां उपलब्ध नहीं करा पाती।
छात्र आंदोलन को दिया समर्थन
मुख्यमंत्री विजय ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने NEET को लेकर छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया। यह टिप्पणी मुख्यमंत्री विजय द्वारा जारी आधिकारिक बयान का हिस्सा है।
सरकार का अलग रुख
केंद्र सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि वर्ष 2027 से NEET-UG पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा होगी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।
हालांकि तमिलनाडु सरकार का कहना है कि केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। राज्य की मांग है कि NEET आधारित प्रवेश व्यवस्था को समाप्त कर राज्यों को मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने की अनुमति दी जाए।
वर्षों पुराना है तमिलनाडु का विरोध
तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जिसने NEET लागू होने के बाद से लगातार इसका विरोध किया है। राज्य सरकारों ने समय-समय पर केंद्र सरकार से NEET से छूट देने की मांग की है। उनका तर्क रहा है कि यह परीक्षा ग्रामीण, तमिल माध्यम और सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए अपेक्षाकृत कठिन परिस्थितियां पैदा करती है।
विभिन्न राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों ने यह भी कहा है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए राज्यों को अधिक अधिकार मिलने चाहिए। हालांकि इस विषय पर केंद्र सरकार का रुख अलग रहा है और वह राष्ट्रीय स्तर की एक समान प्रवेश परीक्षा को आवश्यक बताती रही है।
राजनीतिक बहस तेज
मुख्यमंत्री विजय के ताजा बयान के बाद NEET को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार परीक्षा सुधार और डिजिटल परीक्षा प्रणाली लागू करने की बात कर रही है, वहीं तमिलनाडु सरकार और कुछ अन्य राजनीतिक दल NEET को पूरी तरह समाप्त करने की मांग पर कायम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद, न्यायालय और विभिन्न राज्यों के स्तर पर इस विषय पर चर्चा और तेज हो सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से NEET समाप्त करने को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई है।