लखनऊ में साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कैसरबाग पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो होटल के कमरे से साइबर फ्रॉड की रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए निकालकर आगे पहुंचाता था। पुलिस ने लाटूश रोड स्थित आशीर्वाद होटल के कमरा नंबर 101 में छापा मारकर छह लोगों को पकड़ा। इनमें दो वयस्क आरोपी और चार नाबालिग शामिल हैं। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के छह संदिग्ध खातों में जमा करीब ₹3.28 करोड़ की रकम फ्रीज कराई गई है।
पुलिस के मुताबिक गिरोह साइबर ठगी से हासिल रकम को ऐसे बैंक खातों में मंगवाता था, जिन्हें दूसरे लोगों के नाम पर खुलवाया जाता था। इसके बाद आरोपी ATM के जरिए पैसे निकालकर गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचाते थे। इस काम के बदले उन्हें कथित तौर पर 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
होटल के कमरे से चल रहा था नेटवर्क
कैसरबाग पुलिस को सूचना मिली थी कि लाटूश रोड स्थित आशीर्वाद होटल के कमरा नंबर 101 में कुछ लोग साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में शामिल हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने 3 सितंबर को कमरे में छापा मारा।
तलाशी के दौरान पुलिस को छह ATM कार्ड, भारतपे वन स्वाइप मशीन, जियो सिम कार्ड और दो बैंक पासबुक समेत अन्य सामान मिला। पुलिस ने इस बरामदगी के आधार पर नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच आगे बढ़ाई।
छह SBI खातों में मिली ₹3.28 करोड़ की रकम
जांच में सामने आया कि गिरोह से जुड़े SBI के छह खातों में साइबर ठगी से जुड़ी करीब ₹3.28 करोड़ की रकम जमा थी। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करा दिया है।
पुलिस अब इन खातों में हुए पुराने लेनदेन की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क ने कितनी रकम का लेनदेन किया और किन-किन साइबर अपराधों से इसका संबंध है।
म्यूल अकाउंट के जरिए होता था पैसों का खेल
पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। साइबर ठगी से हासिल रकम इन खातों में भेजी जाती थी। इसके बाद ATM से नकदी निकालकर रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इस व्यवस्था का इस्तेमाल साइबर अपराधों से मिली रकम को सीधे मुख्य आरोपियों तक पहुंचने से रोकने और पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है।
10 फीसदी कमीशन के लिए निकालते थे रकम
पूछताछ में पुलिस को बताया गया कि आरोपी ATM से रकम निकालने और उसे मुख्य संचालकों के खातों तक पहुंचाने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे। पुलिस के मुताबिक रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने के बाद नकद निकासी की जाती थी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में कितने और लोग शामिल हैं और इसके पीछे मौजूद मुख्य संचालक कौन हैं।
दो आरोपी गिरफ्तार, चार नाबालिग संरक्षण में
पुलिस ने मामले में रितेश सिंह और प्रिंस कुशवाहा को गिरफ्तार किया है, जबकि चार नाबालिगों को पुलिस संरक्षण में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश करने की प्रक्रिया की गई है।
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में इस काम से जुड़े थे। अब पुलिस इनके संपर्कों और बैंक लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।
नौ साइबर शिकायतों से जुड़े तार
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे नौ मामले भी मिले हैं, जिनकी शिकायतें पहले से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हैं और जिनका संबंध आरोपियों या उनके बैंक खातों से हो सकता है।
पुलिस अब इन शिकायतों के विवरण, बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल साक्ष्यों को मिलाकर नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाने में जुटी है।
आगे मुख्य संचालकों तक पहुंचेगी पुलिस
इस कार्रवाई के बाद पुलिस की जांच अब केवल होटल में पकड़े गए लोगों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों का फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर है जो कथित तौर पर म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराते थे, साइबर ठगी की रकम भेजते थे और बाद में निकाली गई राशि को अपने नेटवर्क में आगे पहुंचाते थे।
बैंक खातों के लेनदेन, ATM निकासी, मोबाइल नंबर और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से नेटवर्क की आगे की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब लखनऊ पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ अभियान तेज कर रही है। इससे पहले भी राजधानी में फर्जी कॉल सेंटर और अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की जा चुकी है।
हालिया होटल रेड से यह भी सामने आया है कि साइबर अपराधी केवल कॉल सेंटर या बड़े दफ्तरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अस्थायी रूप से होटल के कमरों का इस्तेमाल भी वित्तीय नेटवर्क संचालित करने के लिए कर सकते हैं।
जांच में और खुलासे की उम्मीद
फिलहाल पुलिस ने ₹3.28 करोड़ की संदिग्ध रकम को फ्रीज कर दिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। आने वाले दिनों में बैंक ट्रांजैक्शन और NCRP शिकायतों की जांच से साइबर ठगी के और मामलों का खुलासा हो सकता है।
लखनऊ के आशीर्वाद होटल से पकड़ा गया यह नेटवर्क दिखाता है कि साइबर फ्रॉड में म्यूल अकाउंट और बैंकिंग चैनल किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालकों और उनसे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।