अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार दसवीं रात की सैन्य कार्रवाई का वीडियो जारी किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि नवीनतम अभियान के दौरान ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, समुद्री सैन्य क्षमताओं तथा वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। वीडियो में रात के समय किए गए हवाई हमलों और विस्फोटों के दृश्य दिखाई देते हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
CENTCOM के अनुसार यह अभियान लगभग पांच घंटे तक चला और यह ईरान के खिलाफ लगातार दसवीं रात की सैन्य कार्रवाई थी। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और विशेष रूप से उन संसाधनों को नष्ट करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में हमलों के लिए किया जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि हालिया कार्रवाई में मिसाइल लॉन्चिंग सुविधाओं, ड्रोन संचालन केंद्रों, सैन्य कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय सैन्य क्षमताओं और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन का दावा है कि यह अभियान क्षेत्र में समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को देखते हुए।
अमेरिकी सेना द्वारा जारी वीडियो में कई स्थानों पर सटीक हमलों के दृश्य दिखाई देते हैं। हालांकि वीडियो में दर्शाए गए सभी स्थानों और क्षति की स्वतंत्र पुष्टि किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा नहीं की गई है। ईरान की ओर से भी सभी अमेरिकी दावों पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई दिनों से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों में तेजी आने के कारण पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है ताकि क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की स्थिति न बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य अभियान इसी तरह जारी रहता है तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना है। वहीं ईरान पहले भी कह चुका है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। दोनों देशों के बयानों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम होने के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि लगातार कई रातों तक चलने वाले ऐसे अभियान आधुनिक युद्ध रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य विरोधी पक्ष की कमांड संरचना, वायु रक्षा और हथियार प्रणालियों को धीरे-धीरे कमजोर करना होता है। हालांकि किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन स्वतंत्र जांच और आधिकारिक आंकड़ों के बाद ही संभव होता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने पहले भी दोनों पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। लेकिन मौजूदा हालात में सैन्य गतिविधियां जारी रहने से पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका बनी हुई है।
यह घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य अभियान, ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कूटनीतिक प्रयासों को लेकर आने वाले समय में नए आधिकारिक अपडेट सामने आ सकते हैं।