उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 50 से अधिक जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसी बीच मुजफ्फरनगर में बारिश के चलते एक कच्चा मकान ढहने से चार बच्चों समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
मौसम विभाग के अनुसार, 20 और 21 जुलाई को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
सबसे दर्दनाक घटना मुजफ्फरनगर जिले के फुगाना थाना क्षेत्र के हबीबपुर गांव में हुई। लगातार बारिश के कारण रविवार रात एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय परिवार के सदस्य घर के भीतर मौजूद थे। मकान गिरते ही सभी मलबे में दब गए। ग्रामीणों और पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
प्रशासन के अनुसार, हादसे में परिवार के मुखिया इस्लाम और उनके चार बच्चों की मौत हो गई। मृत बच्चों में जीशान, आहद, अलशिफा और रुकसार शामिल हैं। वहीं परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। जेसीबी मशीनों और स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला गया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जबकि घायलों का इलाज जारी है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
मुजफ्फरनगर हादसे के बाद जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सहारनपुर मंडल के आयुक्त ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और राहत कार्यों का जायजा लिया।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान कई जिलों में बहुत तेज बारिश हो सकती है। इसके साथ ही बिजली गिरने और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव, कच्चे मकानों को नुकसान और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, आजमगढ़, मऊ, चंदौली, महाराजगंज, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और आसपास के कई जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
लगातार बारिश का असर खेती पर भी पड़ने लगा है। धान और अन्य खरीफ फसलों वाले क्षेत्रों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारी बारिश का सिलसिला जारी रहा तो खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में पहले बारिश कम हुई थी, वहां किसानों को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से जलस्तर पर नजर रखने को कहा गया है। हालांकि फिलहाल किसी बड़े नदी तंत्र में व्यापक बाढ़ की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान जर्जर और कच्चे मकानों में रहने से बचें। यदि मकान में दरारें दिखाई दें या लगातार पानी रिस रहा हो तो सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि लगातार बारिश के कारण मिट्टी कमजोर होने से मकान ढहने का खतरा बढ़ जाता है।
बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की अपील की गई है। किसानों को गरज-चमक के दौरान खेतों में काम रोकने की सलाह दी गई है। वाहन चालकों को भी तेज बारिश के दौरान सावधानी से वाहन चलाने और जलभराव वाले रास्तों से बचने को कहा गया है।
मुजफ्फरनगर की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि लगातार बारिश केवल यातायात ही नहीं बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा राहत टीम से संपर्क करने की अपील की है।