दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और सरकारी जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन शनिवार को नए चरण में प्रवेश कर गया। लगातार 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल पहुंचाए जाने के कुछ घंटों बाद Cockroach Janta Party यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा कर दी।
यह घटनाक्रम सोनम वांगचुक के अनशन से जुड़ी पिछली खबरों से अलग है। अब आंदोलन का नेतृत्व अभिजीत दीपके ने अपने हाथ में लेते हुए स्पष्ट किया है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं होगा। CJP ने यह भी कहा है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पहले से तय योजना के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे। उनका अनशन कथित परीक्षा पेपर लीक, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं, छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक और आर्थिक दबाव तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग से जुड़ा था। 21वें दिन उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होने और चिकित्सकीय जोखिम बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस का कहना है कि वांगचुक को चिकित्सकों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल ले जाया गया। अदालत ने इससे पहले अधिकारियों को उनकी सेहत की नियमित निगरानी करने और जीवन बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने को कहा था। लंबे उपवास के कारण डॉक्टरों ने शरीर में पोटैशियम की कमी, निर्जलीकरण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका जताई थी।
दूसरी ओर, CJP और वांगचुक के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रदर्शन स्थल से हटाया गया। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि पुलिस ने सुबह जंतर-मंतर पहुंचकर इलाके को घेर लिया और कमजोर हालत में मौजूद वांगचुक को अस्पताल ले गई। यह पुलिस कार्रवाई किस परिस्थिति में और किस स्तर के विरोध के बीच हुई, इसे लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
सफदरजंग अस्पताल की ओर से वांगचुक की स्थिति स्थिर बताई गई है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनके उपवास जारी रखने की जानकारी सामने आई है। उनकी पत्नी ने कहा कि वे केवल नमक और पानी ले रहे हैं तथा इलाज और जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं में उनकी सहमति का सम्मान किया जाना चाहिए।
वांगचुक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया। CJP ने सार्वजनिक घोषणा में कहा कि दीपके अब आंदोलन को जारी रखेंगे और 20 जुलाई का संसद मार्च रद्द नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि किसी एक व्यक्ति को प्रदर्शन स्थल से हटाने से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग समाप्त नहीं हो सकती।
इस दौरान अभिजीत दीपके भावुक भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं और छात्रों की समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार आंदोलन का उद्देश्य किसी सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। तीन छात्र कार्यकर्ताओं के भी समर्थन में अनशन जारी रखने की जानकारी सामने आई है।
CJP का यह आंदोलन कथित परीक्षा पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर केंद्रित है। संगठन का आरोप है कि बार-बार होने वाली अनियमितताओं के कारण लाखों विद्यार्थियों की मेहनत, समय और आर्थिक संसाधन प्रभावित होते हैं। आंदोलनकारी केवल परीक्षा दोबारा आयोजित कराने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों, परीक्षा एजेंसियों और संबंधित मंत्रालयों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच, पेपर लीक रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधार, प्रभावित विद्यार्थियों के लिए सहायता तथा कथित लापरवाही के लिए राजनीतिक जिम्मेदारी तय करना शामिल बताया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी इस आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है। हालांकि सरकार की ओर से इस मांग को स्वीकार किए जाने का कोई संकेत सामने नहीं आया है।
अभिजीत दीपके इससे पहले सोनम वांगचुक को अनशन समाप्त करने के लिए मनाने की कोशिश करने की बात कह चुके थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई थी और सरकार पर प्रदर्शनकारियों से संवाद न करने का आरोप लगाया था। अब वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद स्वयं दीपके का अनशन शुरू करना आंदोलन की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
20 जुलाई के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पर अब सभी की नजर है। CJP का कहना है कि मार्च शांतिपूर्ण होगा और इसके माध्यम से छात्रों, अभिभावकों तथा नागरिकों की मांगें संसद तक पहुंचाई जाएंगी। हालांकि संसद और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति तथा सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक होता है। मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की अंतिम व्यवस्था आधिकारिक निर्देशों से स्पष्ट होगी।
जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल की स्थिति को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। कुछ समर्थकों ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को वहां से हटाया गया और छात्रों के साथ बल प्रयोग हुआ। इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे दावों की अंतिम पुष्टि उपलब्ध वीडियो, आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
वांगचुक की पत्नी और कानूनी टीम ने अस्पताल में उनकी चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। परिवार ने कथित रूप से फोन तक पहुंच, मेडिकल रिपोर्ट और इलाज के लिए सहमति जैसे मुद्दे उठाए हैं। अस्पताल और संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि उनकी सेहत की निगरानी आवश्यक चिकित्सा मानकों के अनुसार की जा रही है। यह विवाद अब स्वास्थ्य, व्यक्तिगत सहमति और प्रशासन की जीवन रक्षा संबंधी जिम्मेदारी के बीच संतुलन के सवाल से भी जुड़ गया है।
कानूनी दृष्टि से किसी व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से की जा रही भूख हड़ताल और राज्य के जीवन बचाने के दायित्व के बीच अक्सर जटिल स्थिति पैदा होती है। कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण विरोध के रूप में भोजन त्याग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ने पर प्रशासन और अस्पताल पर आवश्यक कदम उठाने का दबाव बढ़ जाता है। इसी कारण दिल्ली हाईकोर्ट ने चिकित्सा निगरानी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप का निर्देश दिया था।
लंबे समय तक उपवास करने से शरीर पहले संग्रहित ग्लूकोज और वसा का उपयोग करता है। समय बढ़ने पर मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, निम्न रक्तचाप, निर्जलीकरण, हृदय की अनियमित धड़कन तथा अंगों पर प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए वांगचुक की तरह लंबे उपवास पर बैठे व्यक्ति को निरंतर चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। अभिजीत दीपके के अनशन शुरू करने के बाद उनकी सेहत की निगरानी भी आंदोलन का महत्वपूर्ण पहलू बनेगी।
इस आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं, अधिवक्ताओं, छात्र संगठनों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर सरकार पर प्रदर्शनकारियों से बातचीत न करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि आंदोलन की राजनीतिक और नीतिगत मांगों पर किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है।
सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने से आंदोलन खत्म होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अभिजीत दीपके के अनशन ने इसे नया विस्तार दे दिया है। अब प्रदर्शन केवल वांगचुक की व्यक्तिगत भूख हड़ताल तक सीमित नहीं रह गया है। CJP इसे व्यापक छात्र आंदोलन के रूप में जारी रखने और संसद मार्च के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर आंदोलन को जारी रखने की जिम्मेदारी संभाल ली है। आने वाले घटनाक्रम इस बात पर निर्भर करेंगे कि वांगचुक की सेहत कैसी रहती है, प्रशासन 20 जुलाई के मार्च को लेकर क्या निर्णय लेता है और केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ कोई औपचारिक संवाद शुरू करती है या नहीं।
यह तेजी से बदलता हुआ घटनाक्रम है। वांगचुक की मेडिकल स्थिति, दीपके की भूख हड़ताल, पुलिस कार्रवाई और संसद मार्च से जुड़ी नई जानकारी के आधार पर परिस्थितियां आगे बदल सकती हैं।
