अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। सातवीं लगातार रात अमेरिकी हमलों के दौरान दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान (Hormozgan) प्रांत में जल आपूर्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त होने के बाद करीब 20 गांवों में पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले में समुद्री जल को पेयजल में बदलने वाली प्रणाली और उससे जुड़ा पंपिंग स्टेशन प्रभावित हुआ, जिससे हजारों लोगों की पानी की आपूर्ति बाधित हो गई।
होर्मोज़गान प्रांत के अधिकारियों ने बताया कि जास्क (Jask) काउंटी के बुंजी (Bunji) क्षेत्र स्थित डिसेलिनेशन (Desalination) पंपिंग स्टेशन और बिजली ट्रांसफॉर्मर को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते लगभग 10,000 लोगों की आबादी वाले करीब 20 गांवों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह रुक गई। स्थानीय प्रशासन ने वैकल्पिक जल आपूर्ति के लिए टैंकर भेजने की व्यवस्था शुरू की है, लेकिन सामान्य व्यवस्था बहाल होने में समय लग सकता है।
अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसके ताजा हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता, निगरानी तंत्र, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और समुद्री सैन्य ढांचे को कमजोर करना था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोतों की मदद से कई सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान का आरोप है कि इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जल आपूर्ति जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से आम लोगों की जिंदगी सीधे प्रभावित हो रही है। वहीं अमेरिका ने इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है और अपने अभियान को सैन्य लक्ष्यों तक सीमित बताया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दक्षिणी ईरान पहले से ही पानी की कमी और भीषण गर्मी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मोज़गान जैसे तटीय क्षेत्रों में समुद्री जल को शुद्ध कर पेयजल उपलब्ध कराने वाले डिसेलिनेशन प्लांट लोगों की दैनिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में इन संयंत्रों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय आबादी पर तत्काल प्रभाव पड़ा है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इस कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
सैन्य संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है और कई शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं। वैश्विक तेल बाजार भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए है क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत पेयजल आपूर्ति, अस्पताल और अन्य नागरिक सुविधाओं को विशेष संरक्षण प्राप्त होता है। हालांकि किसी विशेष हमले में अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दक्षिणी ईरान में जल आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो स्थानीय लोगों को पीने के पानी के साथ-साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन फिलहाल प्रभावित गांवों तक वैकल्पिक जल आपूर्ति पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष लगातार नए मोड़ ले रहा है। एक ओर सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है तो दूसरी ओर आम नागरिकों पर इसका प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है। जल आपूर्ति बाधित होने की यह घटना इस बात का संकेत है कि संघर्ष अब नागरिक बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित कर रहा है। चूंकि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आने वाले दिनों में इस मामले में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।