उत्तर प्रदेश में कई दिनों की उमस और गर्मी के बाद मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने प्रयागराज से वाराणसी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इनमें से करीब 31 जिलों में कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भारी बारिश के साथ आंधी और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी की गई है। प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के जिलों में बादल छाए रहने के साथ कई दौर की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां अगले कुछ दिनों तक सक्रिय रह सकती हैं और 21 जुलाई तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
प्रयागराज में बारिश का असर पहले ही दिखाई देने लगा है। जिले में बादलों, पूर्वी हवाओं और तेज वर्षा के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लंबे समय से उमस और गर्मी का सामना कर रहे लोगों को मौसम बदलने से राहत मिली है। हालांकि तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर पानी जमा होने और नालियों के उफान पर आने जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।
वाराणसी में भी आने वाले दिनों के दौरान बादल छाए रहने, बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। स्थानीय पूर्वानुमान में 20 जुलाई को भारी बारिश और आकाशीय बिजली की चेतावनी दी गई है। 21 जुलाई को भी गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। ऐसे में वाराणसी शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों और गंगा के किनारे मौजूद इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम की चेतावनी केवल प्रयागराज और वाराणसी तक सीमित नहीं है। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर और आसपास के जिलों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा चल सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता अलग रहने की संभावना है। कुछ जिलों में केवल छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं, जबकि पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में कम समय के भीतर तेज वर्षा होने का खतरा है।
मौसम विभाग की चेतावनी में आकाशीय बिजली को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान लोगों को खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे और लोहे की संरचनाओं के पास खड़े होने से बचना चाहिए। गरज सुनाई देने पर सुरक्षित पक्के भवन के अंदर चले जाना चाहिए। पेड़ के नीचे रुकना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता, क्योंकि बिजली गिरने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
किसानों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह चेतावनी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। तेज बारिश और बिजली चमकने के दौरान खेत में काम जारी रखना खतरनाक हो सकता है। किसानों को मौसम की स्थिति देखकर ही सिंचाई, खाद डालने, कीटनाशक छिड़काव और फसल कटाई से जुड़े निर्णय लेने की सलाह दी गई है। पशुओं को भी खुले स्थान या पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय सुरक्षित शेड में रखना चाहिए।
बारिश से धान सहित खरीफ की फसलों को लाभ मिल सकता है। मानसून कमजोर पड़ने के कारण कई क्षेत्रों में किसानों को पर्याप्त वर्षा का इंतजार था। नई बारिश मिट्टी में नमी बढ़ाने और धान की रोपाई में मदद कर सकती है। हालांकि अत्यधिक वर्षा होने पर निचले खेतों में जलभराव, पौधों को नुकसान और मिट्टी के कटाव की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
शहरी क्षेत्रों में नगर निगमों और स्थानीय निकायों के लिए जलभराव बड़ी चुनौती बन सकता है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में कम समय में तेज बारिश होने पर निचले इलाकों, अंडरपास, रेलवे क्रॉसिंग और बाजारों में पानी जमा होने की आशंका रहती है। नालियों की क्षमता से अधिक पानी आने पर यातायात प्रभावित हो सकता है और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वाहन चालकों को बारिश के दौरान गति नियंत्रित रखने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। तेज बारिश से दृश्यता अचानक कम हो सकती है। पानी से भरी सड़क की गहराई का सही अंदाजा नहीं लगने पर वाहन गड्ढे में फंस सकता है या इंजन में पानी जाने से बंद हो सकता है। लोगों को जलमग्न सड़क, पुलिया या अंडरपास से जबरन वाहन निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और कमजोर मकानों के लिए भी तेज बारिश खतरा पैदा कर सकती है। लगातार वर्षा के कारण मिट्टी की दीवारें कमजोर पड़ सकती हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे मकानों में रहने वाले लोगों को स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा सकती है। जर्जर भवनों, पुरानी दीवारों और निर्माणाधीन ढांचों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली के तार टूटने और होर्डिंग या अस्थायी ढांचे क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी रहता है। बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। खुले या टूटे बिजली के तार दिखाई देने पर लोगों को उनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए और संबंधित विभाग को तुरंत सूचना देनी चाहिए।
नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी जलस्तर से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की जरूरत है। प्रयागराज और वाराणसी सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती और अन्य नदियां गुजरती हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार तेज बारिश और ऊपरी इलाकों से पानी आने की स्थिति में नदी के जलस्तर में वृद्धि हो सकती है। फिलहाल किसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का निष्कर्ष संबंधित प्रशासन के आधिकारिक आकलन के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
मछुआरों, नाविकों और घाटों पर काम करने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवा, बारिश और बिजली चमकने की स्थिति में नदी में नाव चलाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। प्रयागराज और वाराणसी के घाटों पर स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।
प्रदेश में मौसम बदलने का कारण मानसूनी हवाओं की सक्रियता और क्षेत्र में बने मौसमी तंत्र को माना जा रहा है। नमी वाली हवाओं के कारण पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बादलों का निर्माण बढ़ा है। इसी वजह से कई जिलों में गरज वाले बादल बनने और कम समय में तेज बारिश होने की परिस्थितियां तैयार हुई हैं।
मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में भी आंधी और बिजली की गतिविधियां हो सकती हैं। राज्य में कम से कम अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हालांकि हर जिले और हर क्षेत्र में लगातार बारिश होना जरूरी नहीं है। मानसून के दौरान एक ही जिले के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा की मात्रा में बड़ा अंतर हो सकता है।
येलो अलर्ट का अर्थ लोगों को संभावित खराब मौसम के प्रति सावधान करना है। यह जरूरी नहीं कि चेतावनी वाले प्रत्येक जिले में नुकसान पहुंचाने वाली बारिश हो, लेकिन परिस्थितियां तेज वर्षा, बिजली और आंधी के अनुकूल रह सकती हैं। इसलिए प्रशासन, किसानों, यात्रियों और आम नागरिकों को मौसम की निगरानी करने और आवश्यक तैयारी रखने की जरूरत होती है।
लोगों को मोबाइल पर बिजली और मौसम से जुड़ी आधिकारिक चेतावनियों को सक्रिय रखने की सलाह दी गई है। यात्रा शुरू करने से पहले अपने मार्ग की स्थिति जांचना उपयोगी हो सकता है। बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों, नालों, तालाबों और नदी किनारे अकेले जाने से रोकना चाहिए। बारिश के दौरान सेल्फी या वीडियो बनाने के लिए पुल, घाट और उफनते नालों के पास जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
बारिश से तापमान में गिरावट आने और उमस से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि हवा में नमी अधिक रहने के कारण बारिश रुकने के बाद कुछ समय तक उमस बनी रह सकती है। जलभराव और गंदा पानी जमा होने से मच्छरों तथा जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। लोगों को पीने के पानी की स्वच्छता और आसपास सफाई पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल प्रयागराज से वाराणसी तक पूर्वी उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा मौसम की चेतावनी के दायरे में है। प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में बारिश, तेज हवा, गरज-चमक या आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है। इनमें से कई जिलों में तेज से बहुत तेज बारिश हो सकती है। मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के ताजा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
