भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) अब लागू हो चुका है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, आयात-निर्यात को आसान बनाना और कई उत्पादों पर शुल्क (टैरिफ) कम करना है। इसके लागू होने के बाद भारतीय बाजार में कुछ ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जबकि भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन का बाजार पहले से अधिक खुल जाएगा।
इस समझौते की चर्चा केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप में इस्तेमाल होने वाले प्रसिद्ध तौलिए, स्कॉच व्हिस्की, ब्रिटिश कॉस्मेटिक्स, लग्जरी कारें और कई अन्य उत्पाद भी अब इस व्यापार समझौते के दायरे में हैं। वहीं भारतीय कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, आभूषण और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।
व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन ने भारतीय वस्तुओं के अधिकांश टैरिफ समाप्त कर दिए हैं, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से कई ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे अधिक चर्चा स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क में कटौती को लेकर हो रही है। अब तक भारत में स्कॉच व्हिस्की पर 150 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। समझौते के लागू होने के साथ यह शुल्क घटकर 75 प्रतिशत हो गया है और आने वाले वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इससे आयात लागत कम होगी और बाजार में कुछ ब्रांड अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम खुदरा कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्यों के उत्पाद शुल्क, परिवहन और वितरण लागत भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी तरह ब्रिटेन के कई प्रसिद्ध उपभोक्ता उत्पाद, जिनमें घरेलू वस्तुएं, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स और खेल आयोजनों से जुड़े आधिकारिक सामान शामिल हैं, भारतीय बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं। विंबलडन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से जुड़े आधिकारिक तौलिए और अन्य लाइसेंस प्राप्त उत्पाद भी इसी व्यापक व्यापारिक माहौल का हिस्सा माने जा रहे हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए यह समझौता अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय वस्त्र उद्योग, रेडीमेड गारमेंट, फुटवियर, चमड़ा उद्योग, रत्न एवं आभूषण, कृषि आधारित प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद और समुद्री उत्पादों को ब्रिटेन में बेहतर बाजार मिलने की संभावना है। इन क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यातकों को कम शुल्क और आसान बाजार पहुंच का लाभ मिल सकता है।
भारत की सेवा (Services) अर्थव्यवस्था को भी इस समझौते से फायदा मिलने की उम्मीद है। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही कुछ श्रेणियों के पेशेवरों के लिए दोनों देशों के बीच अस्थायी कार्य अवसरों को भी सरल बनाया गया है।
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सुरक्षा योगदान (Social Security Contribution) से भी जुड़ा है। इसके तहत निर्धारित अवधि के लिए ब्रिटेन में काम करने वाले कई भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं को दोहरी सामाजिक सुरक्षा देनदारी से राहत मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों और कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिलेंगे। समझौते के तहत सीमित कोटा व्यवस्था के साथ कुछ ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क कम किया जाएगा। हालांकि यह प्रक्रिया चरणबद्ध होगी और इसमें निर्धारित वार्षिक सीमा लागू रहेगी ताकि घरेलू उद्योग पर अचानक प्रभाव न पड़े।
ब्रिटेन की कंपनियों को भारत के सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) बाजार में भी अधिक अवसर मिलेंगे, जबकि भारतीय कंपनियों को भी ब्रिटेन के सरकारी खरीद बाजार तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। इससे दोनों देशों के बीच निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि कुछ उद्योगों ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। विशेष रूप से शराब उद्योग से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि यदि आयातित स्कॉच बड़ी मात्रा में कम कीमत पर बाजार में आती है तो घरेलू प्रीमियम ब्रांडों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ सकता है। ये उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की राय है और इस पर भविष्य में बाजार की स्थिति के आधार पर प्रभाव स्पष्ट होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का वास्तविक प्रभाव धीरे-धीरे सामने आएगा। कई शुल्क तुरंत कम हुए हैं जबकि कई उत्पादों पर कटौती अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। इसलिए उपभोक्ताओं को तत्काल हर उत्पाद में बड़ी कीमत गिरावट देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन व्यापार, निवेश और उद्योग के स्तर पर इसके दीर्घकालिक लाभ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। यदि इसका प्रभाव अपेक्षित रूप से सामने आता है तो भारतीय निर्यातकों, सेवा क्षेत्र, उद्योगों और उपभोक्ताओं सभी को अलग-अलग स्तर पर इसका लाभ मिल सकता है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में सबसे अधिक परिवर्तन देखने को मिलता है और भारतीय बाजार पर इसका वास्तविक असर कितना व्यापक होता है।
