उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ अपने कानून को और अधिक कठोर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए संशोधन प्रस्ताव को विधानसभा ने पारित कर दिया है, जिसमें कुछ गंभीर मामलों में अधिकतम सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामलों को रोकने और कानून को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया गया है।
यह संशोधन उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 (Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act, 2021) में बदलाव का प्रस्ताव करता है। पहले इस कानून के तहत कई मामलों में अधिकतम सजा 10 वर्ष तक थी, लेकिन संशोधन के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में दोषी पाए जाने पर 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
सरकार के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उसकी जान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है, बल प्रयोग करता है, धोखाधड़ी करता है, विवाह या विवाह का झांसा देता है, या किसी महिला, नाबालिग अथवा अन्य व्यक्ति की तस्करी या शोषण के माध्यम से धर्मांतरण कराने का प्रयास करता है, तो ऐसे मामलों में 20 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही जुर्माने और पीड़ित को मुआवजा देने का भी प्रावधान रखा गया है।
संशोधन में सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) से जुड़े मामलों के लिए भी सजा को कड़ा किया गया है। ऐसे मामलों में अब 7 से 14 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार यदि विदेशी या अवैध स्रोतों से धन लेकर अवैध धर्मांतरण कराया जाता है, तो भी 7 से 14 वर्ष तक की सजा और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
संशोधन का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि अब केवल पीड़ित या उसके परिवार के सदस्य ही नहीं, बल्कि कोई भी व्यक्ति अवैध धर्मांतरण से संबंधित जानकारी या शिकायत दर्ज करा सकता है। पहले यह अधिकार सीमित दायरे में था। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे मामलों की सूचना समय पर प्रशासन तक पहुंच सकेगी।
इसके अलावा जमानत संबंधी प्रावधानों को भी अधिक सख्त बनाया गया है। संशोधन के अनुसार, आरोपित को जमानत देने से पहले अदालत को सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। यदि सरकारी पक्ष जमानत का विरोध करता है, तो अदालत को यह संतुष्ट होना होगा कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है और जमानत मिलने के बाद वह दोबारा ऐसा अपराध नहीं करेगा।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून अवैध धर्मांतरण के संगठित मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी कारण सजा की अवधि बढ़ाने, जुर्माने की राशि बढ़ाने और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने जैसे बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून को अधिक कठोर बनाया गया है।
वहीं विपक्षी दलों ने इस संशोधन को लेकर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। विपक्ष का कहना है कि कानून का उद्देश्य अवैध धर्मांतरण को रोकना होना चाहिए, लेकिन इसके प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। हालांकि सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021 में पहली बार अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए यह कानून लागू किया गया था। अब पारित संशोधन के माध्यम से इसकी कई धाराओं को और अधिक कठोर बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे जबरन, धोखे, लालच या दबाव के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
इस संशोधन के पारित होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामलों में सबसे कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू किए गए हैं। आने वाले समय में इस कानून के क्रियान्वयन और इसके प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।