शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 17वें दिन में प्रवेश कर गई है। जंतर-मंतर पर जारी इस प्रदर्शन के दौरान उनका वजन 8.2 किलोग्राम कम हो गया है, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक को कमजोरी, रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर कम होने और शारीरिक थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन से जुड़े आयोजकों का कहना है कि लगातार उपवास के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य तेजी से गिरा है। स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक उनका वजन 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है और ब्लड शुगर का स्तर भी सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। इसके बावजूद वांगचुक ने कहा है कि वह मानसिक रूप से मजबूत हैं और अपनी मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया मिलने तक आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं।
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि शारीरिक रूप से वे कमजोर महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत है। उन्होंने आंदोलन को छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने की बात कही। हालांकि उनके स्वास्थ्य को देखते हुए चिकित्सकों की निगरानी लगातार बढ़ा दी गई है।
इस बीच कई प्रमुख साहित्यकारों, कलाकारों और सामाजिक हस्तियों ने वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह सहित कई सार्वजनिक हस्तियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि आंदोलन महत्वपूर्ण है, लेकिन वांगचुक का स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने आग्रह किया कि वे अपना अनशन समाप्त करें ताकि आगे की लोकतांत्रिक लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
विपक्ष के कई नेताओं ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर संवाद शुरू करने की अपील की है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
सोनम वांगचुक इससे पहले भी पर्यावरण संरक्षण, लद्दाख से जुड़े संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर आंदोलन कर चुके हैं। हाल के वर्षों में वे विभिन्न जन आंदोलनों के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखते रहे हैं। वर्तमान आंदोलन का केंद्र बिंदु परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं।
फिलहाल वांगचुक की चिकित्सकीय निगरानी जारी है और आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य टीम मौजूद है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करने की अपीलें लगातार तेज होती जा रही हैं।
